जम्मू-कश्मीर के रामबन जिले में बटोट के पास मंगलवार शाम एक संदिग्ध घटनाक्रम में दो पुलिसकर्मियों की जान चली गई। सना इलाके में जियारत मोड़ के समीप एक लावारिस खड़ी कार के भीतर दोनों पुलिस जवान अचेत अवस्था में पाए गए थे। आसपास मौजूद स्थानीय नागरिकों की नजर जब वाहन के भीतर पड़ी तो उन्होंने तुरंत दोनों को बाहर निकाला और जिला अस्पताल रामबन पहुंचाया। वहां मौजूद चिकित्सकों ने प्राथमिक परीक्षण के बाद दोनों को मृत घोषित कर दिया। अचानक हुई इस घटना से पूरे इलाके और पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया है।
मृतक पुलिसकर्मियों की पहचान और तैनाती
अस्पताल प्रशासन और पुलिस अधिकारियों द्वारा की गई शिनाख्त के अनुसार, जान गंवाने वाले जवानों में हेड कांस्टेबल फरीद अहमद (बेल्ट नंबर 408/Rbn) और सिलेक्शन ग्रेड कांस्टेबल मोहम्मद याकूब (बेल्ट नंबर 309/Rbn) शामिल हैं। ये दोनों पुलिसकर्मी जिला पुलिस लाइन (DPL) रामबन में तैनात थे। दोनों जवान कार में किस सिलसिले में मौजूद थे और उनकी हालत अचानक इतनी नाजुक कैसे हो गई, इसको लेकर सहकर्मियों और स्थानीय लोगों के बीच गहरा असमंजस बना हुआ है। पुलिस का कहना है कि मौत के वास्तविक कारणों का खुलासा करने के लिए गहन पड़ताल की जा रही है।
जम्मू-कश्मीर नंबर की कार में मिले थे दोनों जवान
घटनास्थल से मिले विवरण के मुताबिक, दोनों पुलिसकर्मी एक फिएट वियास (Fiat Vias) कार के अंदर अचेतावस्था में पाए गए थे। इस चार पहिया वाहन पर जम्मू-कश्मीर की ही पंजीकरण संख्या अंकित थी। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस टीम ने मौके का मुआयना किया और कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी है। दोनों जवानों के शवों को पोस्टमॉर्टम और अन्य कानूनी औपचारिकताओं को पूरा करने के लिए जिला अस्पताल के शवगृह में सुरक्षित रखवाया गया है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि चिकित्सीय परीक्षण की प्रक्रिया संपन्न होने के बाद दोनों के पार्थिव शरीर उनके परिजनों को सौंप दिए जाएंगे।
घाटी में हालिया सुरक्षा घटनाएं
इस रहस्यमयी घटना से पूर्व, हाल ही में कश्मीर के अनंतनाग-कोकरनाग मार्ग पर भी सुरक्षाबलों को निशाना बनाने की वारदात सामने आई थी। उस दौरान आतंकवादियों द्वारा की गई अंधाधुंध गोलीबारी में ड्यूटी पर तैनात एक पुलिसकर्मी गंभीर रूप से जख्मी हो गए थे, जबकि एक अन्य नागरिक भी घायल हुआ था। गोलीबारी में गंभीर चोटें आने के चलते अस्पताल में इलाज के दौरान उस पुलिसकर्मी ने दम तोड़ दिया था।
शहीद हुए उस जवान की पहचान बडगाम निवासी आशिक हुसैन के रूप में हुई थी, जो आईआरपी 3rd बटालियन (IRP 3rd Bn) में तैनात थे और अमरनाथ यात्रा सुरक्षा ड्यूटी का हिस्सा थे। हमले के तुरंत बाद उन्हें निकटवर्ती चिकित्सा केंद्र में भर्ती कराया गया था, जहां डॉक्टरों के प्रयासों के बावजूद उनकी जान नहीं बचाई जा सकी थी। उस हमले के फौरन बाद सुरक्षाबलों ने संबंधित समूचे क्षेत्र की घेराबंदी कर हमलावर आतंकियों की धरपकड़ के लिए व्यापक तलाशी अभियान संचालित किया था।





















