जम्मू-कश्मीर के कठुआ जिले में सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों ने एक साझा कार्रवाई करते हुए सीमा पार पाकिस्तान समर्थित एक आधुनिक डिजिटल जासूसी नेटवर्क को ध्वस्त कर दिया है। इस अभियान के दौरान पुलिस ने 24 वर्षीय ट्रक चालक अमन को हिरासत में लिया है। पकड़े गए युवक पर पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी के साथ भारतीय सेना की गतिविधियों से जुड़ी बेहद गोपनीय और संवेदनशील फुटेज साझा करने का गंभीर आरोप है। यह पूरा मामला हनी-ट्रैप, सीमावर्ती सर्विलांस और सैन्य ठिकानों की डिजिटल टोह लेने से जुड़ा हुआ है।
हनी-ट्रैप के जाल में उलझकर शुरू की जासूसी
जांच में सामने आया है कि अमन सीमा पार मौजूद हैंडलर्स द्वारा चलाए गए एक सुनियोजित हनी-ट्रैप का शिकार बन गया था। जाल में फंसने के बाद उसे ब्लैकमेल और दबाव के जरिए जासूसी के दलदल में धकेल दिया गया। सीमा पार के एजेंटों ने उसे संवेदनशील कठुआ सेक्टर के भीतर मौजूद स्थानीय सैन्य ठिकानों और सेना के साजो-सामान ले जाने वाले लॉजिस्टिकल रूट की रेकी करने के लिए मजबूर किया। उसे पाकिस्तान की इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (आईएसआई) की ओर से भारत विरोधी जासूसी और तोड़फोड़ से जुड़ी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए लगातार दिशा-निर्देश मिल रहे थे। विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के संयुक्त इनपुट के आधार पर संदिग्ध के खिलाफ कड़े 1923 के ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है।
पारंपरिक जासूसी के बजाय 20,000 रुपये का सिम वाला स्मार्ट कैमरा
इस पूरे जासूसी तंत्र को पारंपरिक मामलों से अलग बनाने वाली सबसे अहम कड़ी सीमा पार के हैंडलर्स का तकनीकी तरीका था। आम तौर पर जासूस मैन्युअल रिपोर्ट या कभी-कभार खींची गई तस्वीरों पर निर्भर रहते हैं, जिससे जानकारी मिलने में देरी होती है। लेकिन इस मॉड्यूल में पाकिस्तानी एजेंटों ने अमन को 20,000 रुपये की वित्तीय मदद दी ताकि वह बाजार से एक हाई-डेफिनिशन, सिम-सक्षम स्मार्ट सीसीटीवी कैमरा खरीद सके। इसके बाद अमन ने इस आधुनिक कैमरे को अपने घर के ठीक बाहर हाईवे की तरफ मुंह करके इंस्टॉल कर दिया।
हाईवे पर सेना के काफिलों की रियल-टाइम डिजिटल निगरानी
सक्रिय मोबाइल सिम कार्ड लगे होने के कारण यह हार्डवेयर एक स्वायत्त वायरलेस ट्रांसमीटर की तरह काम करता था। इसे चलाने के लिए किसी स्थानीय ब्रॉडबैंड या वाई-फाई कनेक्शन की दरकार नहीं थी। यह डिवाइस एन्क्रिप्टेड रियल-टाइम वीडियो फीड को बिना किसी मध्यस्थ नेटवर्क के सीधे सीमा पार बैठे ऑपरेटरों तक पहुंचाती थी। एक प्रमुख ट्रांजिट हाईवे पर लगे इस कैमरे की मदद से पाकिस्तानी हैंडलर भारतीय सैनिकों की तैनाती, भारी तोपखाने के मूवमेंट और सेना के रसद काफिलों पर 24 घंटे लगातार नजर रख रहे थे। इस युक्ति से सीमा पार बैठे दुश्मनों ने जमीन पर अपना कोई जासूस तैनात किए बिना ही एक स्थाई डिजिटल ऑब्जर्वेशन पोस्ट खड़ी कर ली थी।
डिजिटल साक्ष्यों की फोरेंसिक जांच और पूर्व की बरामदगियां
पुलिस ने गिरफ्तार आरोपी का मोबाइल डिवाइस और हाईवे पर लगा संपूर्ण डिजिटल हार्डवेयर कब्जे में लेकर विस्तृत फोरेंसिक जांच के लिए भेज दिया है। जांच अधिकारी अब अमन के बैंक खातों के वित्तीय लेन-देन, कॉल और चैट लॉग की गहराई से छानबीन कर रहे हैं ताकि इस नेटवर्क से जुड़े संभावित सब-एजेंटों या अन्य स्थानीय संपर्कों का पता लगाया जा सके। सीमावर्ती इलाकों में लगातार सुरक्षा चौकसी बढ़ाई जा रही है। इससे पहले भी पुलिस ने पुंछ के मुख्य बाजार में स्थित एक ज्वेलरी शॉप पर छापेमारी कर एके-47 राइफल, जिंदा कारतूस, पाकिस्तानी मुद्रा और झंडे बरामद किए थे। वहीं उधमपुर में रातभर चले एक अन्य सुरक्षा ऑपरेशन में जंगल के भीतर दो आतंकी मार गिराए गए थे और उनके पास से भारी मात्रा में हथियार व गोला-बारूद बरामद हुआ था।





















