जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले में पुलिस महकमे के भीतर उस वक्त चिंता बढ़ गई जब विभाग में कार्यरत 55 वर्षीय स्पेशल पुलिस ऑफिसर (एसपीओ) अचानक रहस्यमयी परिस्थितियों में लापता हो गए। इस घटना की जानकारी मिलते ही पूरे इलाके में सुरक्षा बल चौकन्ने हो गए हैं और बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान शुरू किया गया है।
लापता जवान की पहचान किश्तवाड़ जिले के अंतर्गत आने वाले त्रिगाम गांव के निवासी बशीर अहमद के रूप में की गई है। बशीर अहमद किन हालातों में ओझल हुए और वे आखिरी बार कहां देखे गए थे, इस संबंध में विस्तृत ब्योरा अभी सामने नहीं आया है। पुलिस और खुफिया एजेंसियां उनके संभावित ठिकानों की पड़ताल करने के साथ ही उनकी आखिरी लोकेशन का पता लगाने में जुटी हुई हैं।
संवेदनशील इलाके में वनों और संभावित ठिकानों पर सघन तलाशी
यह मामला एक ऐसे नाजुक समय पर सामने आया है जब समूची कश्मीर घाटी और जम्मू संभाग में आतंकी तंत्र के मददगारों तथा ओवरग्राउंड नेटवर्क पर सुरक्षा एजेंसियां कड़ा शिकंजा कस रही हैं। सुरक्षा की दृष्टि से बेहद संवेदनशील माने जाने वाले इस पर्वतीय क्षेत्र से पुलिस से जुड़े एक जवान का अचानक गायब होना सुरक्षा तंत्र के लिए गंभीर विषय बन गया है। इसी वजह से महकमा पूरी तरह सतर्क है और घने जंगलों तथा आसपास के दुर्गम क्षेत्रों में चप्पे-चप्पे की खाक छानी जा रही है।
श्रीनगर में आतंकी पनाहगाह के तौर पर इस्तेमाल रिहायशी संपत्ति जब्त
सुरक्षा एजेंसियों की सख्त कार्रवाई के सिलसिले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने 12 अक्टूबर को श्रीनगर स्थित एक रिहायशी अचल संपत्ति को कुर्क कर लिया। इस ठिकाने पर पाकिस्तानी आतंकियों को शरण देने और आतंकी तंत्र से जुड़े आपत्तिजनक साजो-सामान को छिपाकर रखने का आरोप है। एनआईए के अनुसार यह मकान श्रीनगर के हजरतबल क्षेत्र में पड़ने वाले दनिहामा गांव के खसरा नंबर 315 पर बना हुआ है।
यह अचल संपत्ति गुलाम मोहम्मद मीर, जिसे 'मामा गैस' के नाम से भी जाना जाता है, की मिल्कियत है। इस कार्रवाई को सीमा पार रची गई एक गंभीर आतंकी साजिश के मामले में अंजाम दिया गया है, जिसका सीधा ताल्लुक प्रतिबंधित संगठन लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) से है। एजेंसी ने अपने महानिदेशक से वैधानिक अनुमति हासिल करने के बाद गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम, 1967 (यूएपीए) की धारा 25 के तहत इस मकान को अटैच किया है।
जांच में आतंकी साजिश से सीधे तार जुड़े होने की पुष्टि
एजेंसी की पड़ताल में इस रिहायशी ठिकाने और सीमा पार से संचालित साजिश के बीच पुख्ता साक्ष्य मिले हैं। जांच के मुताबिक इस मकान को सीमा पार से आए घुसपैठियों के छिपने और आतंकी नेटवर्क की सामग्री को गुप्त रखने के लिए इस्तेमाल में लाया जा रहा था। इस पूरे मामले को सबसे पहले 31 मार्च को ज़कूरा पुलिस स्टेशन में दर्ज किया गया था, जिसके बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए इसे एनआईए ने अपने हाथों में ले लिया और नए सिरे से केस दर्ज करके छानबीन आगे बढ़ाई।
लश्कर के ओवरग्राउंड नेटवर्क का भंडाफोड़
विस्तृत जांच के दौरान स्थानीय ओवरग्राउंड वर्कर्स (ओजीडब्ल्यू) के एक सक्रिय सिंडिकेट का पर्दाफाश हुआ है, जो पाकिस्तान में बैठे लश्कर-ए-तैयबा के हैंडलर्स के सीधे निर्देशों पर काम कर रहा था। यह नेटवर्क सीमा पार से आतंकवादियों को भारतीय क्षेत्र में अवैध तरीके से दाखिल कराने, उन्हें एक जगह से दूसरी जगह सुरक्षित पहुंचाने, छिपने के गुप्त ठिकाने उपलब्ध कराने और आवश्यक लॉजिस्टिक मदद देने का जिम्मा संभालता था। इन आतंकियों का मूल इरादा सरकारी संस्थानों, तैनात सुरक्षाबलों और आम नागरिकों को हिंसा का निशाना बनाना था।
जांच एजेंसी के विवरण के अनुसार, 6 अप्रैल को गुलाम मोहम्मद मीर के इस घर पर ली गई तलाशी के दौरान दो संदिग्ध पाकिस्तानी आतंकवादी पाए गए थे, जिनकी शिनाख्त अबू हुरैरा और खुबैब के तौर पर हुई। ये दोनों आतंकी कथित रूप से लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े हुए थे। उस तलाशी अभियान के दौरान मौके से विस्फोटक जैसा पदार्थ, कई डिजिटल उपकरण और अन्य आपत्तिजनक दस्तावेज बरामद करके जब्त किए गए थे।
























