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श्रीनगर पहुंचे अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने जम्मू कश्मीर को बताया भारत का अहम हिस्साजम्मू-कश्मीर
19 अग॰ 2026, 8:23 pm (2 घंटे पहले)· 1

श्रीनगर पहुंचे अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने जम्मू कश्मीर को बताया भारत का अहम हिस्सा

भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने श्रीनगर में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से मुलाकात की और जम्मू कश्मीर को भारत का महत्वपूर्ण हिस्सा करार दिया। इस दौरान उन्होंने सुरक्षा व्यवस्था की तारीफ करते हुए अमेरिकी यात्रा चेतावनी की समीक्षा के संकेत भी दिए।

भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने जम्मू-कश्मीर के अपने पहले अधिकारिक दौरे के दौरान इस क्षेत्र की प्रशासनिक और रणनीतिक स्थिति पर एक बड़ा बयान दिया है। श्रीनगर में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से शिष्टाचार मुलाकात के बाद अमेरिकी राजदूत ने सार्वजनिक रूप से जम्मू-कश्मीर को भारत का अहम हिस्सा बताया। उन्होंने अपनी यात्रा के दौरान कहा कि हर व्यक्ति यह भली-भांति जानता है कि वे भारत में अमेरिकी राजदूत के रूप में सेवा दे रहे हैं और यह क्षेत्र भारत का एक बेहद महत्वपूर्ण अंग है। पहली बार श्रीनगर पहुंचे राजदूत गोर ने इस जगह की प्राकृतिक सुंदरता की जमकर तारीफ की और वहां अपनी मौजूदगी पर प्रसन्नता व्यक्त की।

कश्मीर पर अमेरिकी कूटनीति का बदलता रुख

अमेरिकी राजदूत का यह बयान कश्मीर को लेकर वॉशिंगटन की पारंपरिक भाषा के मुकाबले काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ऐतिहासिक रूप से अमेरिकी कूटनीतिज्ञ और विदेश विभाग के अधिकारी इस संवेदनशील विषय पर बहुत सतर्क शब्दों का प्रयोग करते रहे हैं। अतीत में अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इस क्षेत्र को अक्सर विवादित क्षेत्र के रूप में संदर्भित किया जाता रहा है। ऐसे समय में जब अमेरिकी राजदूत स्वयं श्रीनगर की धरती पर खड़े होकर इसे भारत का अभिन्न अंग बता रहे हैं, तो इसे एक व्यावहारिक कूटनीतिक बदलाव के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

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अनुच्छेद 370 के बाद दूसरा बड़ा अमेरिकी दौरा

साल 2019 में केंद्र सरकार द्वारा अनुच्छेद 370 को समाप्त करने और जम्मू-कश्मीर का विशेष राज्य का दर्जा वापस लेने के बाद किसी अमेरिकी राजदूत का यह महज दूसरा आधिकारिक दौरा है। इससे पहले तत्कालीन अमेरिकी राजदूत केनेथ जस्टर ने साल 2020 में घाटी का दौरा किया था। सर्जियो गोर का यह दौरा साल 2025 में पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद सुरक्षा परिदृश्य को समझने के लिहाज से भी काफी अहम माना जा रहा है। अपनी यात्रा के दौरान सर्जियो गोर ने क्षेत्र में हुए सुरक्षा सुधारों की खुले दिल से सराहना की। उन्होंने स्पष्ट किया कि नई दिल्ली स्थित केंद्र सरकार और केंद्र शासित प्रदेश के स्थानीय प्रशासन ने सुरक्षा ढांचे को मजबूत करने और आम नागरिकों के साथ-साथ पर्यटकों के लिए वातावरण को सुरक्षित बनाने हेतु कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं।

यात्रा एडवाइजरी में ढील देने का दिया संकेत

राजदूत सर्जियो गोर ने अमेरिकी नागरिकों के लिए लागू सख्त यात्रा परामर्श यानी ट्रैवल एडवाइजरी की समीक्षा करने का भी स्पष्ट संकेत दिया है। वर्तमान में अमेरिकी विदेश विभाग की ओर से जम्मू-कश्मीर के अधिकांश क्षेत्रों के लिए Level 4: Do Not Travel यानी यात्रा न करने की सबसे सख्त एडवाइजरी जारी की गई है। इस एडवाइजरी में नागरिक अशांति और आतंकवाद के खतरों का हवाला दिया गया है, हालांकि इसमें पूर्वी लद्दाख और लेह क्षेत्र को छूट दी गई है।

गोर ने संवाददाताओं से बातचीत में बताया कि अमेरिका अपने विदेशी नागरिकों की सुरक्षा के लिए समय-समय पर अपनी यात्रा चेतावनियों की समीक्षा करता रहता है। उन्होंने कहा कि यद्यपि वे इस समय किसी बहुत बड़ी आधिकारिक घोषणा की स्थिति में नहीं हैं, लेकिन अमेरिकी प्रशासन इस बात पर गंभीरता से विचार करेगा कि क्या जम्मू-कश्मीर के लिए ट्रैवल एडवाइजरी के स्तर को कम किया जा सकता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जम्मू-कश्मीर एक अत्यंत सुंदर क्षेत्र है और सुरक्षा स्थिति में सुधार के साथ अमेरिकी पर्यटक यहां के प्राकृतिक सौंदर्य और व्यापारिक अवसरों का अनुभव करने के लिए आना पसंद करेंगे। यदि अमेरिका अपनी यात्रा चेतावनी के स्तर को घटाता है, तो इसका सीधा और सकारात्मक प्रभाव घाटी के पर्यटन उद्योग और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।

मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के साथ द्विपक्षीय चर्चा

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर के साथ हुई इस उच्चस्तरीय बैठक को बेहद सकारात्मक और फलदायी करार दिया। इस मुलाकात के दौरान भारत और अमेरिका के द्विपक्षीय संबंधों के साथ-साथ केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में अमेरिकी निवेश और तकनीकी सहयोग की संभावनाओं पर विस्तृत चर्चा हुई। मुख्यमंत्री अब्दुल्ला ने बातचीत के दौरान क्षेत्र से जुड़े कुछ पुराने और लंबित मुद्दों की ओर भी ध्यान आकर्षित किया और स्वीकार किया कि उनके पूर्ण समाधान में कुछ समय लग सकता है। हालांकि, उन्होंने भरोसा जताया कि आने वाले दिनों में केंद्र शासित प्रदेश और अमेरिका के बीच आर्थिक व सामाजिक सहयोग के नए द्वार खुलेंगे। श्रीनगर में अपनी बैठकों को पूरा करने के बाद राजदूत गोर के अपने इस दौरे में लद्दाख का रुख करने का भी कार्यक्रम है।

पाकिस्तान के लिए कूटनीतिक झटका और पीओजेके का घटनाक्रम

सर्जियो गोर द्वारा सार्वजनिक मंच से जम्मू-कश्मीर को भारत का अभिन्न हिस्सा स्वीकार करना पड़ोसी देश पाकिस्तान के लिए एक बड़ा कूटनीतिक झटका माना जा रहा है। पाकिस्तान लंबे समय से कश्मीर मुद्दे का अंतरराष्ट्रीयकरण करने और इसे विभिन्न वैश्विक मंचों पर उठाने का प्रयास करता रहा है। ऐसे में नई दिल्ली के साथ मजबूत होते अमेरिकी रिश्तों और अमेरिकी राजदूत द्वारा जमीनी हकीकत को खुले तौर पर स्वीकार किए जाने से इस्लामाबाद के दावों की हवा निकल गई है। हालांकि अमेरिका ने कश्मीर नीति में किसी औपचारिक बदलाव का लिखित ऐलान नहीं किया है, लेकिन राजदूत का यह दौरा और सुरक्षा स्थिति की सार्वजनिक सराहना यह दर्शाती है कि वॉशिंगटन अब इस क्षेत्र के साथ प्रत्यक्ष और व्यावहारिक जुड़ाव बढ़ाने की नीति पर चल रहा है।

दूसरी ओर, पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर यानी पीओजेके में बुनियादी राजनीतिक अधिकारों के हनन, गंभीर आर्थिक संकट और स्थानीय जनता द्वारा लगातार किए जा रहे विरोध प्रदर्शनों की खबरें सुर्खियों में रही हैं। इस तुलनात्मक पृष्ठभूमि में अमेरिकी राजदूत का बयान केवल एक औपचारिक राजनयिक शिष्टाचार नहीं है, बल्कि यह दक्षिण एशिया के पूरे कूटनीतिक संतुलन में आ रहे बड़े बदलाव की ओर इशारा करता है। यद्यपि इस दौरे पर पाकिस्तान सरकार की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है, लेकिन श्रीनगर से दिए गए इस स्पष्ट अमेरिकी संदेश को इस्लामाबाद के रणनीतिक गलियारों में बेहद गंभीरता से आंका जा रहा है।

सवाल-जवाब

अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने जम्मू-कश्मीर के दौरे पर क्या कहा?
सर्जियो गोर ने श्रीनगर में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से मुलाकात के बाद कहा कि यह उनकी पहली यात्रा है और जम्मू-कश्मीर भारत का एक बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा है।
क्या अमेरिका जम्मू-कश्मीर के लिए अपनी ट्रैवल एडवाइजरी बदल रहा है?
राजदूत गोर ने कहा कि अमेरिका अपनी यात्रा चेतावनियों की नियमित समीक्षा करता है और इस बात पर विचार किया जाएगा कि क्या वर्तमान एडवाइजरी स्तर को कम किया जा सकता है।
अनुच्छेद 370 हटने के बाद यह कौन से अमेरिकी राजदूत का दौरा है?
2019 में अनुच्छेद 370 हटने के बाद किसी अमेरिकी राजदूत का यह दूसरा दौरा है; इससे पहले 2020 में केनेथ जस्टर ने दौरा किया था।
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और अमेरिकी राजदूत की बैठक में क्या चर्चा हुई?
बैठक में भारत-अमेरिका संबंधों, जम्मू-कश्मीर में अमेरिकी सहयोग की संभावनाओं और क्षेत्रीय विकास के अवसरों पर सकारात्मक बातचीत हुई।
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