लद्दाख के निवासियों के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। केंद्र शासित प्रदेश को अपना पहला सरकारी मेडिकल कॉलेज मिलने जा रहा है, जिसके शैक्षणिक सत्र 2027-28 से शुरू होने की पूरी संभावना जताई जा रही है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना को गति देने के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने लेह के स्टिपुक फारका में बनने वाले इस संस्थान के वास्ते फैकल्टी और सहायक कर्मचारियों के चयन की प्रक्रिया को हरी झंडी दिखा दी है। इसके तहत बुनियादी ढांचे के निर्माण कार्य का 80 प्रतिशत पूरा होने से पहले ही भर्ती प्रक्रिया शुरू करने की एक विशेष छूट प्रदान की गई है, ताकि तय समयसीमा में सभी तैयारियां पूरी की जा सकें।
भर्ती प्रक्रिया और केंद्रीय मंजूरी की मुख्य बातें
स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से 13 अक्टूबर, 2026 को जारी किए गए आधिकारिक पत्र के जरिए लद्दाख के स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के आयुक्त-सह-सचिव को इस महत्वपूर्ण निर्णय से अवगत कराया गया है। मंत्रालय के अनुसार, वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग ने इस प्रस्ताव की पूरी तरह से जांच-परख करने के बाद कुछ निर्धारित शर्तों के साथ अपनी सहमति दी है। इस कॉलेज के लिए कुल 103 नियमित पदों को पहले ही 27 नवंबर, 2024 को व्यय विभाग के नोट के माध्यम से मंजूरी मिल चुकी थी। इन पदों पर चरणबद्ध तरीके से नियुक्तियां की जाएंगी ताकि आगामी शैक्षणिक आवश्यकताओं को समय पर पूरा किया जा सके। लद्दाख प्रशासन ने 5 अगस्त, 2026 को भेजे गए अपने पत्र में इस पूरी योजना और भर्ती की रूपरेखा को साझा किया था, जिसके बाद यह प्रशासनिक कदम उठाया गया है।
प्रशासनिक प्रतिक्रिया और आगे की योजनाएं
लद्दाख के उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने इस फैसले का खुले दिल से स्वागत किया है और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा का आभार व्यक्त किया है। उन्होंने सोशल मीडिया मंच X पर लिखा कि उन्होंने बुनियादी ढांचे के 80 प्रतिशत निर्माण की शर्त में ढील देने का आग्रह किया था, जिससे समय रहते स्टॉफ की भर्ती शुरू हो सके। मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि सभी 103 पदों पर नियुक्तियां तय नियमों के तहत पूरी तरह से नियमित आधार पर की जानी चाहिए। जब तक स्टिपुक फारका में स्थायी शैक्षणिक परिसर बनकर तैयार नहीं होता, तब तक चलाई जाने वाली अंतरिम व्यवस्थाएं पूरी तरह अस्थायी रहेंगी। स्थायी ढांचा तैयार होने के बाद सभी सुविधाओं को वहां स्थानांतरित करना होगा और इसकी जानकारी व्यय विभाग को देनी होगी।
स्थानीय छात्रों और स्वास्थ्य क्षेत्र को लाभ
इस नए मेडिकल कॉलेज की स्थापना को इस दूरदराज के क्षेत्र के लोगों की बरसों पुरानी और प्रमुख मांग पूरी होने के रूप में देखा जा रहा है। इस संस्थान के शुरू होने से स्थानीय विद्यार्थियों को डॉक्टर बनने की पढ़ाई के लिए अपने घर-परिवार से दूर देश के दूसरे राज्यों में जाने की मजबूरी से बड़ी राहत मिलेगी। इसके अलावा, इस भौगोलिक रूप से दुर्गम और कठिन जलवायु वाले क्षेत्र में चिकित्सा सेवाओं का स्तर भी काफी सुधर जाएगा। कठिन मौसम और विशेष स्वास्थ्य सुविधाओं तक सीमित पहुंच के कारण यहां के लोगों को अक्सर परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इस कॉलेज के जरिए आने वाले समय में स्थानीय स्तर पर ही प्रशिक्षित डॉक्टर और कुशल स्वास्थ्यकर्मी उपलब्ध हो सकेंगे, जिससे पूरी स्वास्थ्य प्रणाली को मजबूती मिलेगी।



















