रांची में पिछले कुछ दिनों से फिल्म ‘द ववन’ को लेकर जबरदस्त चर्चा बनी हुई थी और रिलीज के बाद सिनेमाघरों में भी इसका असर साफ देखने को मिल रहा है। इस फिल्म को लेकर दर्शकों के बीच भारी उत्साह है क्योंकि इसमें पहली बार बड़े पर्दे पर छठ महापर्व की भव्यता और उसकी सांस्कृतिक गहराई को बहुत ही शानदार तरीके से उकेरा गया है। सिनेमाघरों से बाहर आ रहे दर्शक इस फिल्म की जमकर तारीफ कर रहे हैं और इसे एक अलग ही अनुभव बता रहे हैं।
संस्कृति का अनूठा संगम और पारिवारिक सराहना
फिल्म देखकर बाहर आए संदीप ने बताया कि हर किसी को एक बार यह फिल्म जरूर देखनी चाहिए। यह सिनेमा हमारी प्राचीन भारतीय संस्कृति को बहुत ही करीने से बड़े पर्दे पर जीवंत करता है। फिल्म देखने का अनुभव बेहद सुखद रहा और इसकी सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसमें एक भी ऐसा दृश्य नहीं है जिसे परिवार के साथ बैठकर न देखा जा सके। लंबे अर्से बाद सिनेमा जगत में ऐसी मुकम्मल पारिवारिक फिल्म आई है जिसे घर के बुजुर्गों से लेकर छोटे बच्चे तक एक साथ बैठकर पूरी तल्लीनता के साथ आनंद ले सकते हैं।
छठ गीतों और भावनाओं का अनूठा मेल
अपनी प्रतिक्रिया देते हुए अदिति ने कहा कि फिल्म में कई ऐसे मार्मिक दृश्य आते हैं जिन्हें देखकर आंखें नम हो जाती हैं लेकिन दिल को एक अजीब सा सुकून मिलता है। खासकर जब सिनेमाघर में छठ का पारंपरिक गीत गूंजता है तो ऐसा महसूस होता है जैसे हम अपने घर और अपने त्योहार के बीच पहुंच गए हों। विशाल मिश्रा ने इस गाने को बेहद खूबसूरती से गाया है जो सीधे दिल को छू जाता है। दर्शकों की भावनाओं का इसमें पूरा ख्याल रखा गया है और इसके लिए वे इस फिल्म को पूरे 10 में से 10 अंक देंगी।
पूरे परिवार के साथ सिनेमाघर पहुंचे लोग
सुनील ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि वे इस फिल्म को देखने के लिए काफी लंबे समय से उत्सुक थे और इस दिन का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे। उनकी पत्नी ने मजाक में कहा था कि सिनेमाहॉल में पॉपकॉर्न की जगह इस बार ठेकुआ लेकर चलना चाहिए। वे अपने बच्चे, दादी, मामी और पूरे परिवार को साथ लेकर आए थे। उनके मुताबिक यह फिल्म किसी उत्सव से कम नहीं है और ऐसा बहुत कम होता है जब पूरा परिवार एकजुट होकर एक साथ कोई फिल्म देखने जाता है।
भविष्य के लिए एक बेहतरीन सिनेमाई प्रयास
कृतिका का मानना है कि आज के समय में ऐसी ही सार्थक फिल्में बनने की जरूरत है जो हमारी संस्कृति को बड़े पर्दे पर और अधिक बारीकी से प्रस्तुत करें। देश की संस्कृति में ऐसी अनगिनत कहानियां मौजूद हैं जिन पर काम किए जाने की सख्त जरूरत है क्योंकि दर्शक इस तरह के आयोजनों और विषयवस्तु को खूब पसंद कर रहे हैं। फिल्म ने पूरी तरह से मनोरंजन किया और यह पूरी तरह से पैसा वसूल साबित हुई, जिसके चलते वे इसे 10 में से 10 नंबर देंगी।


















