देवघर से गिरिडीह और रांची की तरफ सफर करने वाले मुसाफिर जब बूढ़ई बाजार के पास पहुँचते हैं, तो उनकी गाड़ियाँ स्वतः ही रुक जाती हैं। यहाँ की मुख्य सड़क के किनारे मिलने वाले एक खास देसी नाश्ते की खूशबू लोगों को अपनी तरफ आकर्षित कर लेती है। केवल बीस से पचास रुपये की मामूली कीमत में मिलने वाली इस नाश्ते की प्लेट का आकार और विविधता देखकर पहली बार आने वाले लोग हैरान रह जाते हैं। इस प्लेट में चॉप, समोसा, घुघनी, मुड़ी, चूड़ा और पकौड़ी जैसी छह अलग-अलग चीजें परोसी जाती हैं, जिनका यह अनूठा संगम लंबे समय से लोगों की पसंद बना हुआ है।
स्वाद और किफायत का मेल है यह नाश्ता
इस रास्ते से गुजरने वाला शायद ही कोई मुसाफिर हो जो यहाँ रुके बिना आगे बढ़े। बूढ़ई बाजार का यह पारंपरिक नाश्ता अब इस पूरे इलाके की एक अलग पहचान बन चुका है। दुकान पर पहुँचने वाले ग्राहकों की थाली में सबसे पहले मुड़ी डाली जाती है, जिसके ऊपर गर्मागर्म घुघनी की रसदार सब्जी फैलाई जाती है। इसके बाद उस मिश्रण में सूखा चूड़ा, कुरकुरा चॉप, गरमागरम पकौड़ी और एक पूरा समोसा मिलाया जाता है। हर एक कौर के साथ मुसाफिरों को अलग-अलग प्रकार के जायके का अनुभव होता है। खास बात यह है कि आज के मंहगाई भरे दौर में भी इतना भारी-भरकम और पेट भरने वाला नाश्ता केवल बीस से पचास रुपये के बीच मिल जाता है, जिसकी वजह से स्थानीय निवासियों के अलावा दूर-दराज से आने वाले सैलानी और यात्री भी इसका भरपूर लुत्फ उठाते हैं।
ग्राहकों की जुबान पर चढ़ा वर्षों पुराना स्वाद
बूढ़ई के ही रहने वाले एक नियमित ग्राहक संतोष दास ने इस बारे में अपना अनुभव साझा करते हुए बताया कि वह पिछले करीब पंद्रह वर्षों से लगातार इस देसी नाश्ते का स्वाद लेते आ रहे हैं। उनके अनुसार इस खास थाली में परोसी जाने वाली मुड़ी, घुघनी, चूड़ा, चॉप, पकौड़ी और समोसे का मेल ही इसकी असली खूबी है। उन्होंने आगे बताया कि इसका जायका इतना शानदार होता है कि जो व्यक्ति इसे एक बार चख लेता है, उसका मन बार-बार यहाँ खींचकर चला आता है। यही कारण है कि इस दुकान पर सुबह से लेकर शाम तक हमेशा खाने वालों की अच्छी खासी भीड़ जमा रहती है।
राहगीरों और श्रद्धालुओं की पहली पसंद
बता दें कि देवघर, गिरिडीह और रांची को आपस में जोड़ने वाले इस व्यस्त मार्ग पर हर रोज भारी संख्या में वाहनों की आवाजाही होती है। ऐसे में सफर करने वाले तमाम लोग बूढ़ई बाजार पहुँचकर एक कप चाय के साथ इस प्रसिद्ध देसी नाश्ते का आनंद लेना कभी नहीं भूलते हैं। स्थानीय लोगों का ऐसा भी कहना है कि प्रसिद्ध मंदिर में दर्शन-पूजन के लिए आने वाले श्रद्धालु भी अपनी यात्रा के दौरान यहाँ रुककर इस खास प्लेट का स्वाद जरूर चखते हैं। कम कीमत में भरपूर मात्रा और बेहतरीन देसी स्वाद ने इस व्यंजन को बूढ़ई बाजार की एक बड़ी पहचान दिला दी है। आज के समय में यह सिर्फ एक सामान्य नाश्ता नहीं रह गया है, बल्कि इस पूरे कस्बे की ऐसी खूबी बन चुका है जिसके बारे में यहाँ से गुजरने वाला हर दूसरा व्यक्ति चर्चा करता दिखाई देता है।



















