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जमशेदपुर के अस्पतालों में लंबे इलाज का टेंशन खत्म, मरीजों के लिए धतकीडीह बना सबसे सुलभ ठिकानाझारखंड
22 जुल॰ 2026, 3:55 pm (27 दिन पहले)· 0

जमशेदपुर के अस्पतालों में लंबे इलाज का टेंशन खत्म, मरीजों के लिए धतकीडीह बना सबसे सुलभ ठिकाना

जमशेदपुर के टीएमएच और कैंसर अस्पताल में इलाज के लिए आने वाले लोगों के लिए धतकीडीह इलाका एक बड़ा सहारा बन गया है। यहां बजट के अनुसार घर जैसी सुविधाओं वाले कमरे और फ्लैट आसानी से मिल जाते हैं।

घर से दूर जाकर गंभीर बीमारियों का इलाज कराना किसी भी परिवार के लिए एक भारी मानसिक और आर्थिक चुनौती होता है, खासकर तब जब इलाज कई हफ्तों तक चले। झारखंड के जमशेदपुर में बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं की तलाश में आने वाले हजारों परिवारों के सामने सबसे बड़ी समस्या एक सुरक्षित और सुविधाजनक अस्थायी आवास खोजने की होती है। यह शहर टाटा मेन हॉस्पिटल (TMH) और टाटा कैंसर हॉस्पिटल जैसे बड़े चिकित्सा संस्थानों के लिए जाना जाता है। इन अस्पतालों में हर दिन सिर्फ झारखंड के विभिन्न जिलों से ही नहीं, बल्कि पड़ोसी राज्यों जैसे बिहार, ओडिशा और पश्चिम बंगाल सहित देश के अन्य हिस्सों से भी भारी संख्या में मरीज आते हैं। कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों या प्रमुख सर्जरी के मामलों में डॉक्टरों की सलाह पर मरीजों और उनके साथ आए तीमारदारों को लगातार 15 दिन से लेकर पूरे एक महीने तक, और कई बार इससे भी ज्यादा समय के लिए इसी शहर में अपना डेरा डालना पड़ता है। ऐसे मुश्किल वक्त में उनके लिए सबसे बड़ी चिंता एक अच्छी जगह तलाशने की होती है। इस बड़ी जरूरत को समझते हुए, जमशेदपुर का धतकीडीह इलाका अब बाहर से आने वाले मरीजों के लिए एक बहुत ही भरोसेमंद और किफायती आवासीय केंद्र बन गया है, जिसने बाहर से आने वाले हजारों लोगों की परेशानी को पूरी तरह खत्म कर दिया है।

अस्पतालों से निकटता का बड़ा फायदा

टाटा मेन हॉस्पिटल और कैंसर केयर सेंटर के बेहद करीब होने की वजह से धतकीडीह क्षेत्र अब मरीजों और उनके परिजनों की सबसे पहली पसंद बन चुका है। इस इलाके के कई मकान मालिकों ने इस लगातार बढ़ती मांग को पहचाना है और अब वे विशेष रूप से मरीजों के परिवारों को किराए पर आवास मुहैया कराते हैं। यहां आने वाले लोगों को किराए पर साधारण कमरों से लेकर कई कमरों वाले फ्लैट और पूरी तरह से सजे-धजे (फुल फर्निश्ड) घर आसानी से मिल जाते हैं। चिकित्सा केंद्रों के इतने करीब होने के कारण, परिवारों को हर दिन अस्पताल आने-जाने की थकान नहीं झेलनी पड़ती। यह खास लोकेशन न सिर्फ उनके सफर का समय बचाती है, बल्कि रोजमर्रा के ट्रांसपोर्ट का खर्च भी काफी हद तक कम कर देती है। यही मुख्य वजह है कि इलाज के दौरान शहर के बाहर से आए ज्यादातर लोग अपने अस्थायी निवास के तौर पर इसी इलाके को चुनते हैं, जिससे उन्हें शहर के अनजान रास्तों पर बेवजह भटकना नहीं पड़ता।

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हर बजट और जरूरत के हिसाब से कमरे

धतकीडीह की एक सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां हर तरह की आर्थिक क्षमता और पारिवारिक जरूरत के हिसाब से घर उपलब्ध हैं। बाहर से आने वाले लोग अपने परिवार के सदस्यों की संख्या के आधार पर बहुत ही आसानी से सही जगह चुन सकते हैं। यहां छोटे परिवारों के लिए एक सिंगल कमरे से लेकर बड़े परिवारों के लिए दो या तीन कमरों वाले बड़े फ्लैट तक मौजूद हैं। अगर किराए की बात करें, तो इस इलाके का रियल एस्टेट बाजार काफी किफायती है। यहां बुनियादी सुविधाओं वाले कमरों का मासिक किराया लगभग 5 हजार रुपये से शुरू हो जाता है। वहीं दूसरी तरफ, जो परिवार थोड़ी ज्यादा सहूलियत चाहते हैं, वे बेहतर सुविधाओं वाले फुल फर्निश्ड फ्लैट भी ले सकते हैं। इन प्रीमियम फ्लैट्स का किराया 15 हजार रुपये प्रतिमाह या उससे थोड़ा ज्यादा भी हो सकता है, जो पूरी तरह से उसमें मिलने वाली सुविधाओं पर निर्भर करता है। किराए के इन विकल्पों की वजह से लोग बिना किसी परेशानी के अपने बजट में एक बढ़िया ठिकाना ढूंढ लेते हैं, और उन्हें अपनी हैसियत से ज्यादा खर्च करने का दबाव नहीं झेलना पड़ता।

घर जैसी सुविधाओं से मिलती है बड़ी राहत

किसी भी मध्यमवर्गीय परिवार के लिए एक महीने तक होटल में रुकना न तो व्यावहारिक होता है और न ही सस्ता। इसलिए किराए पर मिलने वाले इन कमरों और फ्लैट्स की काफी ज्यादा अहमियत है। धतकीडीह में मिलने वाले इन घरों में आमतौर पर रहने वालों की हर छोटी-बड़ी जरूरत का ख्याल रखा जाता है। किरायेदारों को पहले से ही बेड, पंखा, कपड़े रखने के लिए अलमारी और खाना पकाने के लिए किचन की अच्छी व्यवस्था मिलती है। इसके साथ ही, बिजली और पानी जैसी बुनियादी जरूरतें भी बिना किसी रुकावट के उपलब्ध रहती हैं। कई मकान मालिक तो इससे भी एक कदम आगे बढ़कर रसोई गैस (गैस चूल्हा), फ्रिज और घर में इस्तेमाल होने वाले अन्य जरूरी सामान भी मुहैया कराते हैं। इसका सबसे बड़ा फायदा यह होता है कि मरीजों के घरवालों को अपने कुछ दिनों के ठहराव के लिए नए बर्तन या फर्नीचर खरीदने में पैसे बर्बाद नहीं करने पड़ते। वे आसानी से अपना खाना खुद बना सकते हैं और बाकी घर के कामों की चिंता किए बिना अपना पूरा ध्यान मरीज की देखभाल पर लगा सकते हैं। लंबे समय तक रुकने वाले लोगों के लिए यह पूरी व्यवस्था एक बहुत बड़ी राहत का काम करती है, क्योंकि बीमारी के तनाव के बीच उन्हें रहने-खाने का अलग से संघर्ष नहीं करना पड़ता।

परिवहन और स्थानीय बाजार की बेहतरीन पहुंच

किराए के इन घरों में मिलने वाले आराम के अलावा, धतकीडीह इलाके का बुनियादी ढांचा भी अस्थायी निवासियों के लिए बहुत मददगार साबित होता है। यह पूरी बस्ती मुख्य अस्पतालों से बमुश्किल एक किलोमीटर की दूरी पर बसी हुई है। इतनी कम दूरी होने के कारण लोगों को दिन हो या रात, किसी भी समय सफर करने के लिए ऑटो-रिक्शा, ई-रिक्शा और परिवहन के अन्य साधन पल भर में मिल जाते हैं। बेहतरीन ट्रांसपोर्ट के साथ-साथ इस इलाके में एक बहुत अच्छा स्थानीय बाजार भी है। मरीजों के परिजनों को पैदल दूरी पर ही जनरल स्टोर, सभी जरूरी दवाइयों वाले मेडिकल स्टोर, किराने की दुकानें और कई अच्छे रेस्टोरेंट मिल जाते हैं। इन तमाम सुविधाओं के होने से दूसरे शहरों से आए लोगों को अपनी रोजमर्रा की जरूरतों का सामान जुटाने में कभी भी भटकना नहीं पड़ता। कुल मिलाकर, सस्ते आवास, जरूरी घरेलू सुविधाओं और एक बेहतरीन स्थानीय बाजार के तालमेल ने धतकीडीह को जमशेदपुर में स्वास्थ्य सेवाएं लेने आ रहे लोगों के लिए एक वरदान बना दिया है, जिससे वे अपने इलाज का सफर बहुत ही शांतिपूर्ण तरीके से पूरा कर पाते हैं।

सवाल-जवाब

जमशेदपुर में टीएमएच के पास किराए का कमरा कहां आसानी से मिल सकता है?
टाटा मेन हॉस्पिटल और कैंसर अस्पताल के मरीजों के लिए धतकीडीह इलाके में किराए के कमरे सबसे आसानी से उपलब्ध हैं।
धतकीडीह में एक कमरे का महीने का किराया कितना है?
यहां साधारण कमरों का मासिक किराया लगभग 5 हजार रुपये से शुरू होता है।
क्या मरीजों के परिजनों के लिए फ्लैट्स में खाना पकाने की सुविधा होती है?
हां, इन किराए के कमरों और फ्लैट्स में रसोई की सुविधा, गैस चूल्हा और कई बार फ्रिज भी दिया जाता है जिससे बाहर का खाना नहीं खाना पड़ता।
धतकीडीह से टाटा अस्पताल की दूरी कितनी है?
धतकीडीह से अस्पताल लगभग एक किलोमीटर की दूरी पर स्थित हैं, जहां से ऑटो और ई-रिक्शा हमेशा मिलते हैं।
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