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डिजिटल लत पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संदेश, इलाहाबाद हाई कोर्ट के पूर्व जज यशवंत वर्मा की बढ़ीं मुश्किलें और दिल्ली के अस्पतालों में कबाड़ हुईं मशीनेंभारत
13 अग॰ 2026, 5:58 pm (11 घंटे पहले)· 2

डिजिटल लत पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संदेश, इलाहाबाद हाई कोर्ट के पूर्व जज यशवंत वर्मा की बढ़ीं मुश्किलें और दिल्ली के अस्पतालों में कबाड़ हुईं मशीनें

पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की आत्मकथा के विमोचन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने युवाओं को स्क्रीन एडिक्शन छोड़कर किताबें पढ़ने की सलाह दी। वहीं संसदीय समिति ने पूर्व जज यशवंत वर्मा के घर मिले अधजले कैश मामले की रिपोर्ट सौंपी है और दिल्ली के 26 सरकारी अस्पतालों में करोड़ों की मेडिकल मशीनें कबाड़ पाई गईं।

आधुनिक जीवनशैली में स्मार्टफोन और सोशल मीडिया की लत लगातार गंभीर रूप धारण करती जा रही है। पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की आत्मकथा के विमोचन समारोह के दौरान संबोधन देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने युवाओं और अभिभावकों को एक बेहद महत्वपूर्ण संदेश दिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि वर्तमान दौर भले ही रील्स और डिजिटल शॉर्टकट का हो, लेकिन देश के युवाओं को किताबों से सच्ची दोस्ती करनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि इंटरनेट पर रील्स बनाना या देखना अपने आप में कोई गलत काम नहीं है, लेकिन समय का प्रबंधन और आत्म-नियंत्रण बहुत आवश्यक है। रील्स देखते समय वक्त का अंदाजा ही नहीं लगता और घंटों समय बर्बाद हो जाता है, इसलिए हर व्यक्ति को अपने स्क्रीन टाइम पर संयम रखना चाहिए।

किताबों की घटती आदत और मानसिक विकास पर असर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने युवाओं को सलाह दी कि वे राष्ट्रनायकों और महापुरुषों की जीवनियों का अध्ययन करें ताकि उनके जीवन के कड़े संघर्षों से सीख ली जा सके। उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि आज केवल युवा ही नहीं, बल्कि हर आयु वर्ग के लोग दिन-रात मोबाइल स्क्रीन से चिपके रहते हैं। छोटे-छोटे बच्चों में मोबाइल की लत इस कदर बढ़ गई है कि उनका स्वाभाविक मानसिक विकास प्रभावित हो रहा है और कई तरह की शारीरिक व मानसिक बीमारियां पनप रही हैं। समाज में अध्ययन की आदत धीरे-धीरे समाप्त हो रही है। प्रधानमंत्री ने उन अभिभावकों को भी चेताया जो बच्चों को बहलाने के लिए उनके हाथों में किताबों की जगह स्मार्टफोन थमा देते हैं। उन्होंने आग्रह किया कि बच्चों को शुरुआती उम्र से ही अध्ययन की संस्कृति से जोड़ा जाए।

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पूर्व जज यशवंत वर्मा के मामले में संसदीय समिति की रिपोर्ट

दूसरी तरफ, इलाहाबाद हाई कोर्ट के पूर्व जज यशवंत वर्मा से जुड़े गंभीर मामले में एक संसदीय समिति ने अपनी जांच पूरी कर रिपोर्ट पेश कर दी है। समिति ने जज के खिलाफ लगे तमाम आरोपों को पूरी तरह सही पाया है। गौरतलब है कि पिछले साल 14 मार्च को दिल्ली स्थित जस्टिस यशवंत वर्मा के आधिकारिक आवास के स्टोर रूम से बोरियों में भरे हुए जले और अधजले नोट बरामद किए गए थे। संसदीय समिति ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया है कि जज से जब इस नकदी के स्रोत, स्वामित्व और ठिकाने के बारे में सवाल पूछे गए, तो उन्होंने जांच पैनल को कोई संतोषजनक या स्पष्ट उत्तर नहीं दिया। वे लगातार जवाब देने से बचते रहे और टालमटोल करते रहे।

सबूत मिटाने और महाभियोग प्रक्रिया की स्थिति

जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा भी हुआ है कि सरकारी आवास से मिले अधजले नोटों को बाद में गायब कर दिया गया और स्टोर रूम को सील किए जाने से पहले सबूतों के साथ भारी छेड़छाड़ की गई। जब सुप्रीम कोर्ट की आंतरिक समिति ने इस मामले में अपनी रिपोर्ट सौंपी थी, तब भारत के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश ने जस्टिस वर्मा से इस्तीफा देने को कहा था, लेकिन उन्होंने इनकार कर दिया था। इसके बाद संसद में महाभियोग की प्रक्रिया शुरू की गई। हालांकि, बर्खास्तगी की कार्रवाई पूरी होने से पहले ही इस साल अप्रैल में जस्टिस वर्मा ने त्यागपत्र दे दिया। 4 महीने पहले इस्तीफा देने के आधार पर संसद में महाभियोग की कार्यवाही रोकने की मांग की गई थी, परंतु यह इस्तीफा अभी तक आधिकारिक रूप से स्वीकार नहीं हुआ है। यही कारण है कि इलाहाबाद हाई कोर्ट के जजों की आधिकारिक सूची में उनका नाम अब भी दर्ज है।

दिल्ली के सरकारी अस्पतालों में करोड़ों के उपकरणों की बर्बादी

स्वास्थ्य व्यवस्था के मोर्चे पर भी एक निराशाजनक तस्वीर सामने आई है। दिल्ली हाई कोर्ट के निर्देशों के बाद दिल्ली सरकार द्वारा संचालित 26 अस्पतालों में किए गए ऑडिट में करोड़ों रुपये के आधुनिक मेडिकल उपकरणों के धूल फांकने का खुलासा हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार, कई अस्पतालों में करोड़ों की लागत से खरीदी गई मशीनें सिर्फ इसलिए बंद पड़ी हैं क्योंकि उन्हें चलाने के लिए प्रशिक्षित तकनीशियन नहीं हैं। वहीं कई जगहों पर तकनीशियन तो उपलब्ध हैं, लेकिन मशीन स्थापित करने के लिए आवश्यक स्थान ही नहीं बनाया गया।

कैंसर संस्थान और जीटीबी अस्पताल का हाल

ऑडिट रिपोर्ट के आंकड़े बेहद हैरान करने वाले हैं। दिल्ली स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट में लगभग 9 साल पहले 15.5 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि से खरीदी गई साइक्लोट्रॉन मशीन कर्मचारियों की कमी के कारण आज तक शुरू ही नहीं हो सकी। इसी अस्पताल में 10 करोड़ रुपये में ली गई सिटी और आरटी सिम्युलेटर मशीनें रखरखाव के अभाव में कबाड़ में तब्दील हो रही हैं। इसके अलावा जर्मनी से मंगवाई गई टिश्यू स्लाइसिंग मशीन 9 साल से बक्से में बंद पड़ी है क्योंकि अस्पताल प्रशासन उसे लगाने के लिए जगह ही उपलब्ध नहीं करा सका। इसी तरह गुरु तेगबहादुर अस्पताल में कोविड महामारी के समय खरीदे गए 400 वेंटिलेटर और 910 ऑक्सीजन कंसेन्ट्रेटर बिना इस्तेमाल के पड़े-पड़े खराब हो रहे हैं।

प्रशासनिक लापरवाही और कठोर कार्रवाई की आवश्यकता

मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री पंकज सिंह ने कहा कि ये तमाम कीमती उपकरण पूर्ववर्ती केजरीवाल सरकार के कार्यकाल में खरीदे गए थे, लेकिन न तो जरूरी ऑपरेटरों की भर्ती की गई और न ही इनके उचित रखरखाव का इंतजाम किया गया। देश में जहां अस्पतालों और आधुनिक जांच सुविधाओं की भारी कमी है, वहां अल्ट्रासाउंड और एमआरआई जैसी प्राथमिक जांचों के लिए मरीजों को कई-कई सप्ताह का इंतजार करना पड़ता है। कैंसर रोगियों और नेत्र बैंक से आंख पाने की उम्मीद में भटक रहे लोगों की पीड़ा के बीच सार्वजनिक धन से खरीदे गए उपकरणों की यह बर्बादी बेहद दुखद है। इस पूरे घटनाक्रम की गहन निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और जो भी अधिकारी या जिम्मेदार लोग इसमें दोषी पाए जाएं, उनकी व्यक्तिगत संपत्ति जब्त करके इस नुकसान की भरपाई की जानी चाहिए ताकि भविष्य के लिए एक नजीर कायम हो सके।

सवाल-जवाब

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रील्स और किताबों को लेकर क्या सलाह दी?
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि रील्स बनाना या देखना गलत नहीं है, लेकिन समय का ध्यान रखना और खुद पर नियंत्रण जरूरी है। युवाओं को किताबों से दोस्ती करनी चाहिए और राष्ट्रनायकों की जीवनियों से प्रेरणा लेनी चाहिए।
पूर्व जज यशवंत वर्मा के सरकारी घर में क्या बरामद हुआ था?
पिछले साल 14 मार्च को दिल्ली स्थित उनके सरकारी आवास के स्टोर रूम से जले हुए नोटों की बोरियां मिली थीं, जिसके स्रोत के बारे में वे जांच समिति को स्पष्ट जानकारी नहीं दे सके।
संसदीय समिति ने जज यशवंत वर्मा के मामले में क्या निष्कर्ष निकाला?
समिति ने पाया कि जज के घर में मिले अधजले नोट गायब कर दिए गए, स्टोर रूम सील करने से पहले सबूत मिटाए गए और उन्होंने जांच पैनल को गुमराह करने की कोशिश की।
दिल्ली के सरकारी अस्पतालों के ऑडिट में क्या चौंकाने वाले खुलासे हुए?
ऑडिट में सामने आया कि 26 अस्पतालों में करोड़ों रुपये के कीमती उपकरण जगह या तकनीशियन न होने के कारण सालों से बंद पड़े हैं, जिनमें वेंटिलेटर, ऑक्सीजन कंसेन्ट्रेटर और कैंसर जांच मशीनें शामिल हैं।
दिल्ली के कैंसर संस्थान और जीटीबी अस्पताल में कौन सी मशीनें बेकार पड़ी हैं?
कैंसर संस्थान में 15.5 करोड़ की साइक्लोट्रॉन, 10 करोड़ की सिटी-आरटी सिम्युलेटर और जर्मनी की टिश्यू स्लाइसिंग मशीन बंद हैं, जबकि जीटीबी अस्पताल में 400 वेंटिलेटर और 910 ऑक्सीजन कंसेन्ट्रेटर धूल फांक रहे हैं।
दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री ने अस्पतालों में मशीनों की बर्बादी पर क्या कहा?
स्वास्थ्य मंत्री पंकज सिंह ने कहा कि ये उपकरण केजरीवाल सरकार के दौरान खरीदे गए थे, लेकिन न तो ऑपरेटरों की भर्ती की गई और न ही इनके रखरखाव की व्यवस्था की गई।
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