जमशेदपुर के पास मिर्जाडीह का साप्ताहिक हाट आज के आधुनिक शॉपिंग दौर में भी अपनी अनूठी पहचान बनाए हुए है। हफ्ते में दो दिन सजने वाले इस ग्रामीण बाजार में न केवल आसपास के गांव वाले अपनी रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करने आते हैं, बल्कि शहर से भी बड़ी तादाद में लोग सीधे किसानों से खरीदारी करने यहां पहुंच रहे हैं। यहां खेतों से लाई गई ताजी सब्जियों से लेकर घरेलू अनाज और औजार तक सब कुछ एक ही जगह मिल जाता है।
सीधे खेतों से बाजार पहुंचता है बिना पॉलिश वाला अनाज
इस बाजार का सबसे प्रमुख आकर्षण यहां मिलने वाला देसी और पारंपरिक अनाज है। स्थानीय ग्रामीण किसान अपने खेतों और घरों में उपजाए गए अनाज को सीधे बाजार में बिक्री के लिए लाते हैं। बाजार में बिकने वाली दाल और चावल पर आधुनिक मिलों जैसी अत्यधिक पॉलिश नहीं होती है। प्राकृतिक स्वाद और शुद्धता की तलाश में शहर के कई बाशिंदे खास तौर पर यहां दाल और चावल खरीदने आते हैं, जिससे किसानों को भी उनकी उपज का सीधा खरीदार मिल जाता है।
सब्जियों से लेकर खेती के औजारों तक विस्तृत खरीदारी
मिर्जाडीह के इस हाट में दैनिक जीवन की लगभग हर जरूरी वस्तु उपलब्ध रहती है। ग्रामीण व्यापारी यहां कपड़े, राशन, मनिहारी यानी चूड़ी-बिंदी और श्रृंगार का सामान लेकर पहुंचते हैं। इसके अलावा खेती-किसानी में काम आने वाले पारंपरिक लोहे और लकड़ी के उपकरण भी यहां आसानी से मिल जाते हैं। शाम के समय जब किसान अपनी बाड़ियों से तोड़ी हुई हरी सब्जियां लेकर बैठते हैं, तो खरीदारों की आवाजाही काफी तेज हो जाती है।
शाम के खान-पान से जीवंत हो उठता है ग्रामीण परिवेश
खरीदारी के साथ-साथ यह बाजार शाम ढलते ही एक सामाजिक मेले जैसा रूप ले लेता है। बाजार परिसर में मिष्ठान, चाट-पकौड़ी और पारंपरिक खान-पान की छोटी-छोटी दुकानें सज जाती हैं। खरीदारी करने आए ग्रामीण और शहरी ग्राहक इन व्यंजनों का स्वाद लेते हैं, जिससे पूरे हाट में रौनक और जीवंतता बढ़ जाती है।
मंगलवार और शुक्रवार को शाम 4 बजे से जुटती है भीड़
यह साप्ताहिक हाट सप्ताह में दो दिन, मंगलवार और शुक्रवार को आयोजित किया जाता है। दोपहर बाद करीब 4 बजे से दुकानें लगनी शुरू होती हैं और जैसे-जैसे शाम ढलती है, पूरा परिसर ग्राहकों से भर जाता है। जहां ग्रामीण अपनी घरेलू जरूरतों का सामान लेते हैं, वहीं शहरी लोग विशुद्ध स्थानीय उत्पाद जुटाते हैं। यही पारंपरिक तालमेल इस बाजार को आज भी बेहद प्रासंगिक बनाए हुए है।


















