घर के आंगन या बालकनी में हरियाली के साथ मनमोहक खुशबू जोड़ना हर बागवानी प्रेमी की ख्वाहिश होती है। सामान्य रंग-बिरंगे फूलों के अलावा ऐसे सुगंधित पौधे चुनना एक बेहतरीन फैसला साबित होता है, जो शाम ढलने पर अपनी महक से पूरे परिसर को सराबोर कर दें। चमेली, बेला, जूही और गंधराज ऐसे ही पौधे हैं, जिनकी सफेद पंखुड़ियां और भीनी खुशबू शाम के समय वातावरण को बिल्कुल तरोताजा बना देती हैं। प्रकृति में इन पौधों की कई किस्मों की विशेषता यही है कि उनकी गंध रात के समय अधिक तीव्र हो जाती है, ताकि रात में विचरण करने वाले परागण कीट इनकी ओर आकर्षित हो सकें। हालांकि दिन के समय भी इनकी धीमी गंध महसूस की जा सकती है, लेकिन सूरज ढलते ही इनका प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है।
शाम के समय महकने वाली प्रमुख किस्में और उनकी खासियतें
पलामू जिले के विशेषज्ञ डॉ. डीएस श्रीवास्तव के अनुसार, यदि कोई अपने बगीचे या घर के खुले हिस्से में खुशबूदार हरियाली जोड़ना चाहता है, तो चमेली और बेला बेहद असरदार विकल्प हैं। इन दोनों ही पौधों पर खिलने वाले सफेद फूल न केवल दिखने में बेहद आकर्षक होते हैं, बल्कि कई किस्मों में शाम से लेकर रात करीब नौ बजे तक इनकी तीव्र और मनभावन खुशबू का आनंद लिया जा सकता है। इन पौधों को सुविधा अनुसार बड़े गमलों में अथवा सीधे जमीन की क्यारियों में लगाया जा सकता है। हालांकि इनमें फूल खिलने का चक्र मौसम और चुनी गई किस्म पर पूरी तरह निर्भर करता है। मिसाल के तौर पर, दिसंबर और जनवरी के भीषण ठंड वाले महीनों में कुछ विशेष किस्मों पर फूलों की संख्या अपेक्षाकृत कम हो सकती है।
जूही और गंधराज से सजाएं बैठने की जगहें
अन्य दो प्रमुख पौधों की बात करें तो गंधराज अपने अपेक्षाकृत बड़े, दूधिया सफेद और भारी सुगंध वाले फूलों के लिए विख्यात है। वहीं जूही के छोटे आकार के नाजुक फूल भी वातावरण को अपनी तेज खुशबू से भर देने की पूरी क्षमता रखते हैं। डॉ. डीएस श्रीवास्तव के अनुसार, इन पौधों को घर के मुख्य प्रवेश द्वार, बालकनी की रेलिंग के करीब या फिर परिवार के बैठने की जगह के पास रोपना सबसे उत्तम निर्णय होता है। शाम को जब लोग दिनभर की भागदौड़ के बाद बालकनी या आंगन में फुर्सत के पल बिताते हैं, तब इन फूलों की प्राकृतिक महक मन को शांति प्रदान करती है। उचित रख-रखाव और देखभाल मिलने पर ये पौधे घर की सुंदरता बढ़ाने के साथ-साथ पूरे परिवेश को सकारात्मक ऊर्जा से भर देते हैं।
पत्तियां हरी होने के बावजूद फूल न आने की वजहें
अक्सर देखा जाता है कि चमेली या बेला के पौधे बेहद हरे-भरे रहते हैं, उन पर नई पत्तियों का विकास भी तेजी से होता है, लेकिन कलियां और फूल नदारद रहते हैं। इस समस्या पर ध्यान दिलाते हुए विशेषज्ञ स्पष्ट करते हैं कि ऐसा केवल पोषक तत्वों या खाद की कमी से नहीं होता। इसके पीछे धूप और उर्वरक के संतुलन की कमी मुख्य कारण हो सकती है। चमेली और बेला की ज्यादातर किस्मों में भरपूर कलियां बनने के लिए रोजाना कम से कम 4 से 5 घंटे की सीधी धूप मिलना अनिवार्य है। इसके अलावा, जरूरत से ज्यादा नाइट्रोजन युक्त खाद डालने से भी बचना चाहिए, क्योंकि नाइट्रोजन पौधे में केवल हरी पत्तियां बढ़ाता है और फूलों के विकास को रोक देता है।
उचित सिंचाई, छंटाई और पोषण के जरूरी नियम
पौधों में पानी देने की प्रक्रिया को बेहद संतुलित रखना चाहिए। मिट्टी में नमी हमेशा बनी रहनी चाहिए, लेकिन गमले या क्यारी में जलभराव बिल्कुल नहीं होना चाहिए, इसलिए अच्छी जल निकासी वाली हल्की मिट्टी का ही प्रयोग करें। इसके साथ ही, समय-समय पर सूखी टहनियों, पीली पत्तियों और मुरझा चुके हिस्सों की छंटाई करते रहना आवश्यक है। छंटाई का काम पौधे की किस्म और उसके फूल आने के मौसम को ध्यान में रखकर ही करें, जिससे नई शाखाओं और कलियों के निकलने में कोई बाधा न पहुंचे। अत्यधिक खाद के बजाय जरूरत के मुताबिक संतुलित खाद दें। नियमित देखरेख, पर्याप्त धूप और सही सिंचाई मिलने पर पौधों में फूल खिलने की संभावना तेजी से बढ़ जाती है और आपका परिसर रात तक महकता रहता है।





















