झारखंड के कोडरमा जिले में सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं को संजोने वाला ऐतिहासिक गोपाष्टमी मेला सात वर्ष के लंबे अंतराल के बाद एक बार फिर अपनी भव्यता के साथ लौटने जा रहा है। कोरोना काल की परिस्थितियों के चलते इस पारंपरिक आयोजन को रोक दिया गया था, जिसे अब पूरे उत्साह के साथ दोबारा शुरू करने का फैसला किया गया है। श्री कोडरमा गौशाला समिति द्वारा संचालित होने वाले इस पांच दिवसीय मेले की तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच चुकी हैं। गौशाला परिसर में रंग-रोगन, मरम्मत और सजावट के कार्य युद्धस्तर पर संचालित किए जा रहे हैं, ताकि हर आयु वर्ग के श्रद्धालुओं और दर्शकों के लिए एक आनंददायक वातावरण तैयार किया जा सके।
श्री कोडरमा गौशाला समिति के कार्यकारी सचिव जितेंद्र कुमार अरुण के अनुसार, इस प्रतिष्ठित मेले का उद्देश्य गौ संवर्धन और धार्मिक रीति-रिवाजों को सहेजने के साथ-साथ क्षेत्रवासियों को स्वस्थ पारिवारिक मनोरंजन और सांस्कृतिक गतिविधियों का साझा मंच प्रदान करना है। आयोजन को सुचारू और व्यवस्थित रूप से संचालित करने के लिए समिति ने राम रतन महर्षि और प्रदीप खाटूवाला को मेला मंत्री पद की जिम्मेदारी सौंपी है। दोनों पदाधिकारी मेला मैदान की व्यवस्थाओं और समन्वय की निगरानी कर रहे हैं।
भगवान श्रीकृष्ण की 28 प्रतिमाएं और मीना बाजार बनेंगे प्रमुख आकर्षण
इस बार मेले का केंद्रीय आकर्षण गौशाला परिसर में स्थापित की जाने वाली भगवान श्रीकृष्ण की विभिन्न बाल और युवा लीलाओं पर आधारित 28 विशेष प्रतिमाएं होंगी। स्थानीय और कुशल मूर्तिकार इन प्रतिमाओं को सजीव रूप देने में जुटे हैं। एक ही स्थल पर भगवान कृष्ण से जुड़े अलग-अलग प्रसंगों की सजीव झांकियों के दर्शन श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहेंगे।
धार्मिक आयोजनों के अलावा मेले में बच्चों और युवाओं के मनोरंजन के व्यापक प्रबंध किए जा रहे हैं। परिसर में विशाल झूले स्थापित किए जा रहे हैं। इसके साथ ही घरेलू उपयोग की वस्तुओं और पारंपरिक शिल्प के लिए प्रसिद्ध मीना बाजार, खिलौनों की अनेक दुकानें और स्वादिष्ट व्यंजनों के विविध फूड स्टॉल भी मेले के मुख्य आकर्षण होंगे। यह व्यवस्था पूरे परिवार को एक साथ खरीदारी और खानपान का भरपूर अवसर प्रदान करेगी।
पांच दिवसीय सांस्कृतिक कार्यक्रमों का विस्तृत विवरण
मेले के दौरान 17 नवंबर से लेकर 21 नवंबर तक प्रतिदिन विशिष्ट सांस्कृतिक और साहित्यिक मंच सजाए जाएंगे। समिति ने पांचों दिनों के कार्यक्रमों की समय-सारणी इस प्रकार निर्धारित की है
- 17 नवंबर: उद्घाटन दिवस पर कोडरमा जिले के प्रतिभाशाली स्थानीय गायकों और वादकों द्वारा भुले-बिसरे पुराने गीतों की संगीतमयी शाम सजाई जाएगी।
- 18 नवंबर: दूसरे दिन विख्यात जादूगर शंकर सम्राट के हैरतअंगेज जादू के शो का मंचन होगा, जो बच्चों और बड़ों को रोमांचित करेगा।
- 19 नवंबर: तीसरे दिन विभिन्न विद्यालयों के विद्यार्थियों के बीच इंटर स्कूल समूह नृत्य प्रतियोगिता का आयोजन किया जाएगा, जिसमें स्कूली प्रतिभागी अपनी कला प्रस्तुत करेंगे।
- 20 नवंबर: चौथे दिन इंटर स्कूल चित्रकला प्रतियोगिता के साथ-साथ हास्य नाटिका प्रतियोगिता कराई जाएगी, जिसमें छात्र अपनी रचनात्मक और अभिनय क्षमता का प्रदर्शन करेंगे।
- 21 नवंबर: मेले के अंतिम दिन एक भव्य हास्य कवि सम्मेलन का आयोजन होगा, जिसके साथ पांच दिवसीय ऐतिहासिक उत्सव का औपचारिक समापन किया जाएगा।
सुरक्षा व्यवस्था और भीड़ नियंत्रण के कड़े इंतजाम
इस ऐतिहासिक उत्सव में कोडरमा जिले के स्थानीय निवासियों के अतिरिक्त निकटवर्ती क्षेत्रों जैसे बरही, बरकट्ठा, गिरिडीह और राजधनवार से भी भारी संख्या में जनसैलाब उमड़ने की पूरी संभावना है। दर्शकों की भारी संभावित तादाद को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण के पुख्ता इंतजाम किए जा रहे हैं।
कार्यकारी सचिव जितेंद्र कुमार अरुण ने स्पष्ट किया कि मेले में शांति, कानून व्यवस्था और सहज आवागमन सुनिश्चित करने के लिए स्थानीय पुलिस प्रशासन के जवानों के साथ-साथ एनसीसी कैडेटों की भी सक्रिय तैनाती की जाएगी। स्वयंसेवकों और सुरक्षाकर्मियों की यह संयुक्त व्यवस्था महिलाओं, बच्चों और वरिष्ठ नागरिकों को किसी भी असुविधा से बचाएगी। सात वर्षों के विराम के पश्चात पुनः प्रारंभ हो रहा यह मेला कोडरमा के पुराने सामाजिक सौहार्द और सांस्कृतिक वैभव को नई ऊर्जा प्रदान करने के लिए पूरी तरह तैयार है।



















