दीपावली की आहट मिलते ही रिहायशी इलाकों और बाजारों में साज-सज्जा का दौर पूरी तेजी पर आ चुका है। घरों को रंग-बिरंगी झालरों, चमचमाती रोशनियों और तरह-तरह के सजावटी सामानों से सजाया जा रहा है। भारतीय परंपरा में दीपोत्सव के दौरान आंगन, मुख्य द्वार, कमरों की चौखट और पूजा घर के फर्श पर खूबसूरत रंगोली उकेरने का गहरा धार्मिक व सांस्कृतिक महत्व माना जाता है। लोकमान्यता के अनुसार घर के प्रवेश द्वार पर बनी स्वच्छ और सुंदर रंगोली सुख, समृद्धि और खुशहाली के आगमन का प्रतीक होती है। हालांकि, पारंपरिक तरीके से हाथों से महीन और जटिल रंगोली बनाना काफी धैर्य, समय और मेहनत की मांग करता है, जिससे अक्सर लोग त्योहार की व्यस्तता में परेशान हो जाते हैं।
कोडरमा के झंडा चौक पर उपलब्ध हुआ नया विकल्प
इस बार कोडरमा के स्थानीय बाजार में त्योहार पर रंगोली सजाने के शौकीनों के लिए एक बहुत ही सुलभ और तेज विकल्प देखने को मिल रहा है। पारंपरिक रूप से जमीन पर बैठकर घंटों डिजाइन बनाने और रंगों को सहेजने की झंझट को दूर करने के लिए खास किट बाजार में उतारी गई है। उत्तर प्रदेश से आए व्यापारियों का एक दल कोडरमा के झंडा चौक के पास इन आधुनिक रंगोली किट और सामग्रियों की बिक्री कर रहा है। इस किट की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसके जरिए कोई भी व्यक्ति महज 10 से 15 सेकंड के भीतर फर्श पर बेहद नफासत भरी और मनमोहक रंगोली उतार सकता है।
मात्र 10 रुपये से शुरू है छलनी और अबीर किट की कीमत
झंडा चौक पर इस सामग्री को बेच रहे व्यापारी मोहम्मद अब्दुल के अनुसार, उनके पास ग्राहकों के लिए रंगोली बनाने की पूरी किट मौजूद है। इस सेट में विभिन्न प्रकार के रंगों वाले अबीर के साथ-साथ अलग-अलग पारंपरिक और आधुनिक आकृतियों वाली विशेष छलनी अथवा जाली दी जा रही है। कीमत के लिहाज से यह हर वर्ग के बजट में फिट बैठती है। इस किट का शुरुआती मूल्य मात्र 10 रुपये है, जबकि अलग-अलग आकारों और जटिल डिजाइनों के आधार पर इसकी अधिकतम कीमत 70 रुपये तक जाती है। कम लागत और तुरंत परिणाम देने की वजह से स्थानीय लोग इसे हाथों-हाथ खरीद रहे हैं।
जाली से रंगोली तैयार करने का बेहद आसान तरीका
इस किट का उपयोग करने का तरीका इतना सरल है कि कोई भी इसे पहली बार में ही बिना किसी गलती के इस्तेमाल कर सकता है। सबसे पहले जिस स्थान पर रंगोली सजानी हो, जैसे आंगन या मुख्य चौखट, वहां फर्श को साफ करके पसंद की डिजाइन वाली जाली को सपाट रख दिया जाता है। इसके उपरांत जाली के छिद्रों के ऊपर अपने मनपसंद रंग का अबीर चारों तरफ एकसार फैला दिया जाता है। अबीर बिछाने के बाद जाली को दोनों हाथों से बेहद सावधानीपूर्वक सीधा ऊपर उठा लिया जाता है। जाली हटते ही फर्श पर एक साफ-सुथरी और स्पष्ट डिजाइन वाली रंगोली उभर आती है। इस पूरी प्रक्रिया में केवल 10 से 15 सेकंड का समय खर्च होता है और न तो उंगलियों से रेखाएं खींचने की मशक्कत करनी पड़ती है और न ही रंग इधर-उधर बिखरते हैं।
छोटे डिजाइनों को जोड़कर बनाएं विशाल रंगोली
इस किट की एक और प्रमुख विशेषता इसका लचीलापन है। इसमें अलग-अलग आकृतियों वाली छोटी जालियां उपलब्ध हैं, जिन्हें आपस में मिलाकर या एक क्रम में रखकर एक बड़ी और भव्य रंगोली का रूप दिया जा सकता है। लोग अपने मकान के मुख्य प्रवेश द्वार, आंगन के केंद्र, ठाकुर जी के पूजा स्थल या कमरों के दरवाजों पर अपनी पसंद के अनुसार अलग-अलग रूपांकनों का चुनाव कर सकते हैं। इसके अलावा, एक ही जाली के अलग-अलग हिस्सों में कई रंगों का अबीर डालकर बहुरंगी रंगोली भी तैयार की जा सकती है। जिन लोगों को कलाकारी या रंगोली बनाने का कोई पूर्व अनुभव नहीं है, वे भी इसकी मदद से किसी पेशेवर कलाकार की तरह सटीक आकृतियां बना सकते हैं। घर की महिलाओं और बच्चों के लिए भी इस छलनी का उपयोग करना बेहद सुगम और सुरक्षित है।
कामकाजी लोगों और महिलाओं के समय की होगी बचत
दीपावली के पर्व पर अमूमन हर घर में साफ-सफाई, पकवान तैयार करने, खरीदारी करने और शाम की लक्ष्मी पूजा की व्यवस्था करने में लोगों का पूरा दिन बीत जाता है। ऐसे में रंगोली के लिए घंटों का समय निकाल पाना बेहद चुनौतीपूर्ण हो जाता है। विशेष रूप से नौकरीपेशा लोगों और कामकाजी महिलाओं के लिए यह किट समय प्रबंधन का एक बेहतरीन जरिया साबित हो रही है। मोहम्मद अब्दुल का कहना है कि इस विशेष किट की सहायता से कोई भी व्यक्ति कुछ ही मिनटों में घर के कई कमरों और दरवाजों पर सुंदर आकृतियां उकेर सकता है। अपनी किफायती दर और झटपट तैयार होने वाले गुणों के कारण यह सामग्री कोडरमा के बाजार में खासी लोकप्रियता हासिल कर रही है।


















