पिछोला झील के सीने पर तैरती मेवाड़ की अनूठी विरासत, पर्यटकों को क्यों लुभाता है जग मंदिरठंड के मौसम में कमरा गर्म रखने के लिए सबसे भरोसेमंद स्पेस हीटर और खरीदारी गाइडकांगो में बुंडीबुग्यो इबोला का बढ़ता कहर, 7000 से अधिक संक्रमित और आधे मरीजों की मौत के बाद टीकों की दौड़ तेजपुष्य नक्षत्र में मंगल के प्रवेश से 4 राशियों को 24 दिन तक मिलेंगे बड़े लाभदक्षिण मध्य रेलवे में कवच 4.0 की शुरुआत, रेल पटरियों पर सुरक्षा का नया सुरक्षा कवच तैयारअमेरिकी डॉलर की मजबूती और ब्रिटेन के सुस्त सर्विस आंकड़ों से पाउंड 12 हफ्तों के निचले स्तर पर फिसलाचक्रवात अर्णब का संकट: तटीय इलाकों में तेज हवाओं और मूसलाधार बारिश का अलर्टस्विस नेशनल बैंक की नीति बैठक से पहले ब्याज दरों में स्थिरता के आसार, वैश्विक बाजारों में डॉलर की मजबूतीसैमसंग का बड़ा दांव: चीनी फोन्स को टक्कर देने आ रही बड़ी बैटरी और सुपरफास्ट मेमोरीराजस्थान में बारिश थमते ही लौटी मई-जून जैसी तपिश, जैसलमेर में 41.5 डिग्री पहुंचा पारा
पलामू की मेकअप आर्टिस्ट रिद्धिमा ने साझा किया सीमित लागत में ब्यूटी पार्लर और एकेडमी शुरू करने का मॉडलझारखंड
23 सित॰ 2026, 1:08 pm (4 घंटे पहले)· 0

पलामू की मेकअप आर्टिस्ट रिद्धिमा ने साझा किया सीमित लागत में ब्यूटी पार्लर और एकेडमी शुरू करने का मॉडल

शिक्षिका की नौकरी छोड़कर ब्यूटी इंडस्ट्री में कदम रखने वाली रिद्धिमा ने करीब एक लाख रुपये के बजट में बेसिक पार्लर सेटअप, आवश्यक उपकरणों के खर्च और ट्रेनिंग एकेडमी के जरिए अतिरिक्त कमाई का व्यवहारिक खाका पेश किया है.

स्वरोजगार और उद्यमिता की दिशा में आगे बढ़ रही महिलाओं के लिए ब्यूटी और ग्रूमिंग सेक्टर एक टिकाऊ आजीविका का माध्यम बनकर उभर रहा है. पलामू क्षेत्र में कार्यरत मेकअप आर्टिस्ट रिद्धिमा के अनुसार, सीमित पूंजी और सुव्यवस्थित योजना के साथ इस क्षेत्र में स्वतंत्र उद्यम खड़ा किया जा सकता है. उनका मानना है कि यदि सही कौशल, तकनीकी प्रशिक्षण, लगन और बेहतर ग्राहक सेवा पर ध्यान दिया जाए, तो एक साधारण स्तर का ब्यूटी पार्लर भी समय के साथ बड़े पेशेवर स्टूडियो में तब्दील हो सकता है. बेसिक कार्यप्रणाली और प्राथमिक सुविधाओं के साथ लगभग एक लाख रुपये की लागत में इस काम की शुरुआत की जा सकती है.

अध्यापन से पेशेवर मेकअप और एकेडमी संचालन का सफर

इस कार्यक्षेत्र में रिद्धिमा की यात्रा सीधे तौर पर शुरू नहीं हुई थी. ब्यूटीशियन बनने और अपना उद्यम स्थापित करने से पहले वह एक निजी विद्यालय में शिक्षण कार्य करती थीं. बाद में उन्होंने मेकअप के क्षेत्र में विधिवत प्रशिक्षण हासिल किया और इसे अपने पूर्णकालिक करियर के रूप में चुना. शुरुआती दौर में उन्हें कई लोगों की बातें और ताने भी सुनने पड़े, लेकिन उन्होंने काम पर ध्यान केंद्रित रखा. अपनी मेहनत के दम पर उन्होंने आगे चलकर चैनपुर में एक मेकअप एकेडमी और स्टूडियो की नींव रखी, जहां विद्यार्थियों को व्यावहारिक और सैद्धांतिक प्रशिक्षण दिया जाता है.

ये भी पढ़ें

वर्तमान में वह मेकअप सेवाएं देने के साथ-साथ छात्र-छात्राओं को प्रशिक्षित भी कर रही हैं. उनके संस्थान में इस समय पांचवां बैच संचालित हो रहा है, जिसमें स्थानीय विद्यार्थियों के अलावा दूर-दराज के इलाकों से आने वाले शिक्षार्थी भी शामिल हैं. वे यहां मेकअप और ब्यूटी से जुड़ी आधुनिक तकनीक सीख रहे हैं. रिद्धिमा के मुताबिक, सेवाएं देने के अलावा प्रशिक्षण का दायरा बढ़ाने से कारोबार में अतिरिक्त और स्थिर आमदनी का जरिया तैयार होता है.

शुरुआती पार्लर के लिए आवश्यक उपकरण और सामग्री

एक नए और बुनियादी पार्लर की स्थापना के लिए उपकरणों का चुनाव बजट के अनुसार होना जरूरी है. करीब एक लाख रुपये के कुल बजट में आवश्यक साज-सज्जा और बुनियादी सुविधाएं जुटाई जा सकती हैं. इसमें बैठने के लिए दो पार्लर चेयर, दो बड़े साइज के मिरर और बालों की धुलाई के लिए हेयर वॉश सेटअप सबसे पहली जरूरत बनते हैं.

इसके अलावा हेयर स्टाइलिंग और अन्य तकनीकी कार्यों के लिए हेयर ड्रायर, स्ट्रेटनर, कर्लिंग आयरन, कैंची और कंघियों की आवश्यकता होती है. त्वचा संबंधी सेवाओं के लिए फेशियल बेड, स्टीमर और वैक्स हीटर शामिल किए जाते हैं. साथ ही मैनीक्योर और पेडीक्योर के टूल्स, फेशियल किट, वैक्स, ब्लीच, शैम्पू, कंडीशनर, हेयर सीरम, तौलिया और प्राथमिक स्तर का मेकअप किट भी इस शुरुआती सूची में रखा जाता है.

लागत का विस्तृत वर्गीकरण और बजट प्रबंधन

रिद्धिमा के अनुसार, विधिवत ट्रेनिंग पूरी करने के बाद बेसिक सामान खरीदकर एक सुव्यवस्थित काम शुरू किया जा सकता है. खर्चों का विभाजन करते हुए उन्होंने बताया कि दो चेयर और दो बड़े मिरर की खरीद पर लगभग 16 हजार रुपये का खर्च आता है. वहीं बाल धोने के लिए उपयोगी हेयर वॉश सेटअप स्थापित करने में करीब 8 हजार रुपये लगते हैं.

हेयर स्टाइलिंग से जुड़े बुनियादी बिजली उपकरणों पर लगभग 9 हजार रुपये का व्यय होता है. फेशियल बेड और स्टीमर की व्यवस्था करने में करीब 9 से 10 हजार रुपये का बजट निर्धारित करना पड़ता है. इसके अतिरिक्त फेशियल, वैक्सिंग और मेकअप से जुड़ी उपभोग्य सामग्रियों पर करीब 18 से 20 हजार रुपये खर्च होते हैं. रैक, टेबल, तौलिया और अन्य फुटकर जरूरी सामानों को जोड़कर पूरा बेसिक इंफ्रास्ट्रक्चर लगभग 78 से 80 हजार रुपये के बीच बनकर तैयार हो जाता है.

इन्वेंट्री बैकअप और आकस्मिक खर्चों के लिए बचत

एक लाख रुपये के कुल बजट में से बुनियादी बुनियादी ढांचे पर 78 से 80 हजार रुपये खर्च होने के बाद भी पूंजी शेष रह जाती है. रिद्धिमा की सलाह है कि बचे हुए करीब 20 हजार रुपये को अतिरिक्त प्रोडक्ट स्टॉक रखने और किसी भी तरह के आकस्मिक खर्चों के लिए सुरक्षित रखा जाना चाहिए. उनका कहना है कि शुरुआत में अनावश्यक दिखावे या बहुत महंगे उपकरणों में निवेश करने के बजाय सीमित पूंजी से शुरुआत करनी चाहिए. जैसे-जैसे ग्राहकों की संख्या बढ़ती जाए और नियमित नकद प्रवाह बनने लगे, वैसे-वैसे सेवाओं की श्रेणी और उपकरणों की गुणवत्ता का धीरे-धीरे विस्तार किया जा सकता है.

महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता और कमाई के विभिन्न आयाम

महिलाओं के लिए यह क्षेत्र स्वरोजगार की असीम संभावनाएं प्रदान करता है. शुरुआत में महिलाएं इसे अपने घर के किसी कमरे से छोटे स्तर पर भी संचालित कर सकती हैं. अनुभव, साख और कार्यकुशलता बढ़ने के बाद इसे बाजार में बड़े स्टूडियो अथवा ट्रेनिंग एकेडमी का रूप दिया जा सकता है. एक ही छत के नीचे मेकअप, हेयर स्टाइलिंग, फेशियल, वैक्सिंग और थ्रेडिंग जैसी सेवाएं प्रदान करके आय के बहुआयामी स्रोत बनाए जा सकते हैं.

हालांकि, इस कार्य में लाखों की कमाई पहले दिन से तय नहीं होती. आय की मात्रा पूरी तरह से इस बात पर निर्भर करती है कि पार्लर किस स्थान पर स्थित है, वहां ग्राहकों की दैनिक संख्या कितनी है, सेवाओं के लिए क्या शुल्क निर्धारित किया गया है, काम करने वाले का कौशल कितना निपुण है और मासिक परिचालन खर्च कितना आ रहा है.

सवाल-जवाब

बेसिक ब्यूटी पार्लर शुरू करने के लिए न्यूनतम कितनी पूंजी की आवश्यकता होती है?
मेकअप आर्टिस्ट रिद्धिमा के अनुसार, लगभग 78 से 80 हजार रुपये में जरूरी उपकरण लेकर एक लाख रुपये के कुल बजट में बेसिक पार्लर शुरू किया जा सकता है.
चेयर और मिरर के सेटअप पर कितना खर्च आता है?
दो पार्लर चेयर और दो बड़े मिरर की खरीद पर लगभग 16 हजार रुपये का खर्च आता है.
हेयर वॉश और स्टाइलिंग टूल्स के लिए कितना बजट चाहिए?
हेयर वॉश सेटअप में करीब 8 हजार रुपये और ड्रायर, स्ट्रेटनर व कर्लिंग आयरन जैसे हेयर स्टाइलिंग उपकरणों में लगभग 9 हजार रुपये लगते हैं.
फेशियल, वैक्सिंग और मेकअप उत्पादों पर कितना खर्च अनुमानित है?
फेशियल बेड और स्टीमर पर 9 से 10 हजार रुपये, जबकि फेशियल किट, वैक्स और मेकअप सामग्री पर 18 से 20 हजार रुपये का खर्च आता है.
एक लाख के बजट में से बची हुई राशि का क्या इस्तेमाल करना चाहिए?
सेटअप के बाद बचे करीब 20 हजार रुपये को अतिरिक्त प्रोडक्ट स्टॉक और आकस्मिक खर्चों के लिए सुरक्षित रखना चाहिए.
पार्लर व्यवसाय से लाखों की कमाई किन बातों पर निर्भर करती है?
कमाई निश्चित नहीं होती; यह पार्लर के स्थान, ग्राहकों की संख्या, सेवा शुल्क, कारीगर के कौशल और परिचालन खर्च पर निर्भर करती है.
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 4

Arjun Mehta@arjun-mehta·3 घंटे पहले

सिर्फ एक लाख रुपये में पार्लर और एकेडमी दोनों शुरू करना थोड़ा मुश्किल लगता है। आज के समय में अच्छे उपकरण और जगह का किराया ही सारा बजट पार कर जाता है, फिर ट्रेनिंग का सामान कहाँ से आएगा?

Ravikash Gupta@ravikash·3 घंटे पहले

अर्जुन जी, बात सही है आपकी। एक लाख में सब कुछ मैनेज करना वाकई चुनौती है, पर छोटे स्तर से शुरुआत करने वाले कई लोग जुगाड़ और लोकल वेंडर से काम चला लेते हैं।

Karan Malhotra@karan-malhotra·3 घंटे पहले

नौकरी छोड़कर खुद का काम शुरू करना आसान नहीं होता, ऊपर से लोगों के ताने अलग सुनने पड़ते हैं। एक लाख में पार्लर और एकेडमी दोनों चलाना वाकई हिम्मत का काम है।

Rohan Verma@rohan-verma·3 घंटे पहले

बिल्कुल सही कहा करण भाई। मैंने भी ग्राउंड रिपोर्टिंग के दौरान ऐसी कई महिलाओं को देखा है जो ताने सुनकर ही आगे बढ़ी हैं।

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp