पारंपरिक खेती की चुनौतियों और बढ़ती लागत के बीच राजस्थान के सिरोही जिले के किसानों ने एक नया कदम उठाया है। जिले के आमथला गांव स्थित तपोवन में अब सफेद और हरी सब्जियों के साथ-साथ बैंगनी और पीली फूलगोभी की खेती की जा रही है। ब्रह्माकुमारी संस्थान के तपोवन क्षेत्र में हो रहा यह प्रयोग आसपास के किसानों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बन गया है और यह खेती किसानों की आय बढ़ाने का एक बेहतर जरिया साबित हो रही है।
तीन साल से चल रहा है यह अनोखा प्रयोग
तपोवन क्षेत्र में रंगीन गोभी की खेती पिछले करीब 3 साल से की जा रही है। यह गोभी एक उन्नत किस्म की सब्जी है जो पोषक तत्वों से भरपूर होती है और सामान्य सफेद गोभी की तुलना में सेहत के लिए ज्यादा फायदेमंद मानी जाती है। संस्थान से जुड़े शरत भाई के अनुसार, सिरोही में पहले से ही हरी ब्रॉकली और सफेद फूलगोभी उगाई जाती थी, लेकिन अब बैंगनी और पीली किस्मों का उत्पादन एक पूरी तरह से नया और सफल प्रयास बन चुका है।
फसल चक्र और बुवाई की पूरी प्रक्रिया
बाजार की मांग को देखते हुए किसान इस तकनीक को अपनाकर अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत कर सकते हैं। इस आधुनिक और जैविक खेती को सीखने के लिए दूर-दराज से किसान तपोवन पहुंच रहे हैं। शरत भाई ने बताया कि इस ब्रॉकली की बुवाई मुख्य रूप से अगस्त और सितंबर के महीनों में की जाती है। इसके बाद दिसंबर और जनवरी के दौरान फसल कटाई के लिए पूरी तरह तैयार हो जाती है। इस पूरी फसल का चक्र लगभग ढाई से तीन महीने का होता है।
एक सीजन में लगभग ढाई से तीन टन गोभी की पैदावार होती है। इसकी एक खास विशेषता यह है कि पहली तुड़ाई के बाद पौधों में निकलने वाले नए अंकुरों का उपयोग दोबारा फसल के बीज और पौधे तैयार करने के लिए किया जाता है, जिससे किसानों को बार-बार नए बीज खरीदने की आवश्यकता नहीं पड़ती है।
कीटों से बचाव के लिए पूरी तरह जैविक उपाय
फसल की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए पूरी तरह से जैविक तरीकों पर जोर दिया जा रहा है। फूलगोभी की फसल में मावा जैसे रस चूसने वाले कीटों से फसल को नुकसान पहुंचने का खतरा हमेशा बना रहता है, जिससे पौधों की ग्रोथ और फूलों की क्वालिटी पर बुरा असर पड़ सकता है। इसके अलावा मच्छरों के प्रकोप से पौधों को बचाना भी बेहद जरूरी होता है। इन समस्याओं से निपटने के लिए तपोवन में ही जैविक कीटनाशक तैयार किया जाता है जिसमें नीम की खली और छाछ के मिश्रण से बने तरल का छिड़काव किया जाता है।
बाजार में मिलते हैं दोगुने-तिगुने दाम
इन रंगीन किस्मों की खेती का सबसे बड़ा फायदा यह है कि बाजार में इनके दाम सामान्य गोभी के मुकाबले काफी अधिक मिलते हैं। महानगरों और मेट्रो सिटी में बैंगनी और पीली गोभी की मांग बहुत ज्यादा है, जिसके कारण किसानों को सामान्य सफेद फूलगोभी की तुलना में दो से तीन गुना तक अधिक कीमत मिल जाती है। हालांकि, वास्तविक मुनाफा फसल की कुल क्वालिटी, उत्पादन की मात्रा और बाजार की मौजूदा स्थिति पर निर्भर करता है।



















