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देवघर के हुलास महतो ने झींगा खेती से बदली किस्मत, 10 हजार लगाकर कमाए 50 हजारझारखंड
17 अक्तू॰ 2026, 11:11 am (2 घंटे पहले)· 0

देवघर के हुलास महतो ने झींगा खेती से बदली किस्मत, 10 हजार लगाकर कमाए 50 हजार

झारखंड के देवघर जिले के किसान हुलास महतो ने एक एकड़ जमीन पर झींगा की खेती कर शानदार मुनाफा कमाया है। वह खुद 35 किलोमीटर दूर तक जाकर इसे बेचते हैं और बच्चों को पढ़ा रहे हैं।

देवघर जिले में कृषि के क्षेत्र में पारंपरिक फसलों के अलावा अब किसान नए और उन्नत तरीकों से भी अपनी आमदनी बढ़ा रहे हैं। आमतौर पर खेतों में धान, गेहूं और मौसमी सब्जियां उगाने की परंपरा रही है, लेकिन कुछ किसान लीक से हटकर अपनी मेहनत के बल पर परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं। देवघर प्रखंड के अंतर्गत आने वाले ग्वालबदिया गांव निवासी हुलास महतो ऐसे ही मेहनतकश किसानों की श्रेणी में आते हैं, जिनकी पूरी आजीविका खेती के दम पर ही चल रही है। उनके परिवार में खेती का यह सिलसिला कई दशकों से चला आ रहा है और वह इस पुश्तैनी काम को आगे बढ़ाने वाली तीसरी पीढ़ी के रूप में सक्रिय हैं।

एक एकड़ में झींगा की खेती और कड़ी मेहनत

हुलास महतो वर्तमान में एक एकड़ जमीन पर बड़े पैमाने पर झींगा की खेती कर रहे हैं। फसल तैयार होने के बाद वह खुद इसकी कटाई करते हैं और इसे बेचने के लिए दूर-दराज के इलाकों में जाते हैं। अपने उत्पादन की सही कीमत पाने के लिए उन्हें अपने निवास स्थान से लगभग 35 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है। इसके बाद वह गांवों में घर-घर जाकर या फेरी लगाकर ग्राहकों तक सीधे झींगा पहुंचाते हैं। खेती के इस काम में केवल फसल उगाना ही शामिल नहीं है, बल्कि उसके विपणन और परिवहन की जिम्मेदारी भी वह खुद ही निभाते हैं, ताकि मुनाफा सीधा उनके पास आ सके।

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लागत से पांच गुना तक की बंपर कमाई

खेती की इस अनूठी और लाभकारी योजना के बारे में बात करते हुए हुलास महतो बताते हैं कि इस पूरे उद्यम में उनकी लागत मात्र 10 हजार रुपये आई थी। इसके मुकाबले उन्होंने अब तक करीब 50 हजार रुपये की शुद्ध कमाई कर ली है। पिछले करीब 20 साल से कृषि कार्यों से जुड़े होने के कारण उन्हें मौसम के मिजाज और बाजार की नब्ज की अच्छी समझ है। वह साल के अलग-अलग समय पर विभिन्न प्रकार की सब्जियों का उत्पादन भी करते हैं और उन्हें स्थानीय बाजारों या गांवों में बेचकर अपने परिवार का खर्च उठाते हैं।

पारंपरिक खेती और परिवार की जिम्मेदारी

हुलास महतो के परिवार में उनकी आजीविका का एकमात्र साधन खेती ही है। उनके दो बेटे हैं जो वर्तमान में अपनी पढ़ाई पूरी कर रहे हैं। किसान का साफ तौर पर कहना है कि खेती से होने वाली इसी आय के जरिए वह अपने दोनों बच्चों की शिक्षा का खर्च उठा रहे हैं। परिवार की आर्थिक जिम्मेदारियों को संभालना और बच्चों के भविष्य को संवारने का सपना ही उन्हें हर दिन कड़ी मेहनत करने की प्रेरणा देता है। खेती में भले ही मौसम की अनिश्चितता और बाजार की चुनौतियां बनी रहती हैं, लेकिन उनका हौसला कभी कमजोर नहीं पड़ता।

सवाल-जवाब

हुलास महतो कहां के रहने वाले हैं?
वह देवघर प्रखंड के ग्वालबदिया गांव के रहने वाले हैं।
वह कितनी जमीन पर खेती कर रहे हैं?
वह वर्तमान में एक एकड़ जमीन पर झींगा की खेती कर रहे हैं।
झींगा बेचने के लिए उन्हें कितनी दूर जाना पड़ता है?
उन्हें अपने गांव से करीब 35 किलोमीटर दूर तक जाकर गांवों में झींगा बेचना पड़ता है।
इस खेती में उनकी कितनी लागत आई और कितनी कमाई हुई?
इस खेती में उनकी लागत करीब 10 हजार रुपये थी और उन्होंने 50 हजार रुपये की कमाई की है।
वह कितने वर्षों से खेती कर रहे हैं?
वह पिछले करीब 20 साल से खेती-किसानी के काम से जुड़े हुए हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Laxmi Gupta@laxmi-gupta·21 मिनट पहले

मेहनत हो तो कम लागत में भी किस्मत बदली जा सकती है, हुलास जी ने साबित कर दिया।

Ravikash Gupta@ravikash·43 मिनट पहले

सिर्फ दस हजार लगाकर पचास हजार कमाना वाकई कमाल है। हुलास जी की मेहनत और खुद जाकर बेचने की जिद ने साबित कर दिया कि चाहो तो छोटे किसान भी बड़ा मुनाफा निकाल सकते हैं।

Arjun Mehta@arjun-mehta·42 मिनट पहले

रवि जी, बिल्कुल सही कहा आपने। बिचौलियों को छोड़कर खुद बेचने की हिम्मत हो तो लागत से कई गुना ज्यादा कमाया जा सकता है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·1 घंटे पहले

दस हजार लगाकर पचास हजार कमा लिए, भाई ने मेहनत के दम पर सच में कमाल कर दिया।

Rohan Verma@rohan-verma·1 घंटे पहले

करण भाई, बात तो सही है। पर क्या हुलास जी को झींगा बेचने 35 किलोमीटर रोज़ाना साइकिल से जाना पड़ता है या उनके पास कोई मोटरबाइक है?

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