झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य में आयोजित होने वाली महत्वपूर्ण भर्ती परीक्षाओं से जुड़े मामले में एक बड़ा कानूनी आदेश पारित किया है। अदालत ने राज्य सरकार द्वारा झारखंड लोक सेवा आयोग की 11वीं से 13वीं परीक्षा तथा खाद्य सुरक्षा अधिकारी परीक्षा को लेकर जारी किए गए आदेश पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। इस न्यायिक हस्तक्षेप से लंबे समय से संशय में पड़े अभ्यर्थियों को बहुत बड़ी राहत मिली है, क्योंकि राज्य सरकार की प्रशासनिक कार्रवाई पर फिलहाल पूरी तरह से विराम लग गया है।
भर्ती परीक्षाओं से जुड़ी सरकारी कार्रवाई पर अंतरिम स्टे
रांची स्थित झारखंड हाईकोर्ट में इस पूरे विवाद की विस्तृत सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार की उस प्रशासनिक कार्रवाई और आदेश को स्थगित कर दिया, जिसके तहत JPSC की 11वीं, 12वीं और 13वीं परीक्षाओं के साथ-साथ फूड सेफ्टी ऑफिसर भर्ती परीक्षा की प्रक्रिया प्रभावित हो रही थी। अदालत का यह रुख उन सभी उम्मीदवारों के लिए सुखद खबर लेकर आया है जो परीक्षा के भविष्य और अपनी उम्मीदवारी को लेकर चिंतित थे।
राज्य सरकार को 15 दिनों के भीतर जवाब दाखिल करने की मोहलत
न्यायाधीशों की पीठ ने सुनवाई के दौरान राज्य प्रशासन को सख्त निर्देश देते हुए अपना पक्ष स्पष्ट करने को कहा है। उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को निर्देश जारी किया है कि वह अगले 15 दिनों के भीतर अपना औपचारिक जवाब कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत करे। सरकार को इस समयावधि के अंदर एक विस्तृत काउंटर एफिडेविट दाखिल करना होगा। अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि राज्य सरकार द्वारा लिखित जवाब और शपथ पत्र प्रस्तुत किए जाने के पश्चात ही इस मामले में आगे की अदालती कार्यवाही और सुनवाई आगे बढ़ाई जाएगी।
याचिकाकर्ताओं को काम पर लौटने का स्पष्ट निर्देश
परीक्षा प्रक्रिया पर रोक के अलावा, झारखंड उच्च न्यायालय के इस फैसले से याचिकाकर्ताओं को भी सीधे तौर पर बड़ी राहत प्राप्त हुई है। कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया है कि दोनों मामलों से संबंधित जितने भी याचिकाकर्ता हैं, वे बिना किसी विलंब के तत्काल प्रभाव से अपने-अपने कार्य पर वापस लौटेंगे। इस निर्देश के बाद याचिकाकर्ताओं की कार्यशैली और पदस्थिति से जुड़ा संशय दूर हो गया है।
अदालत के विचाराधीन रहेगा पूरा मामला
उच्च न्यायालय के इस अंतरिम फैसले के बाद सरकारी आदेश और परीक्षा संचालन को लेकर उत्पन्न हुआ कानूनी विवाद फिलहाल न्यायालय के विचाराधीन बना रहेगा। अब राज्य के प्रशासनिक महकमे, विधिक विशेषज्ञों तथा अभ्यर्थियों की नजरें सरकार द्वारा दाखिल किए जाने वाले जवाब पर टिकी हुई हैं। 15 दिनों की दी गई समय सीमा में राज्य सरकार द्वारा काउंटर एफिडेविट पेश किए जाने के बाद ही हाईकोर्ट इस पूरे मामले में आगामी रुख और अंतिम दिशा तय करेगा।



















