झारखंड की राजधानी रांची में पिछले 25 दिनों से चला आ रहा छात्रों का बड़ा आंदोलन आखिरकार समाप्त हो गया है। राज्य सरकार द्वारा आंदोलनकारी छात्रों की प्रमुख मांगों को स्वीकार किए जाने के बाद आंदोलन का औपचारिक अंत घोषित किया गया। 25 जुलाई से जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में डटे छात्रों ने अपनी मांगों की स्वीकृति के बाद पूरे उत्साह के साथ एक भव्य आभार यात्रा निकाली। इस प्रदर्शन और अनशन का प्रमुख चेहरा रहे छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने 16 दिनों से जारी अपनी भूख हड़ताल समाप्त कर दी। अनशन खत्म होते ही समर्थकों ने उन्हें अबीर-गुलाल से सराबोर कर दिया और जीत के इस क्षण में सभी छात्र जमकर झूमते नजर आए।
जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम से अल्बर्ट एक्का चौक तक आभार यात्रा
छात्रों का यह आंदोलन 25 जुलाई को रांची स्थित जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में शुरू हुआ था। भर्ती परीक्षाओं में धांधली और पेपर लीक के मामलों को लेकर युवाओं में भारी आक्रोश था। दो दिन पहले झारखंड सरकार ने छात्रों की सबसे प्रमुख मांग को मानते हुए जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा रद्द करने का फैसला लिया था। सरकार के इस कदम के बाद छात्रों ने अपनी जीत का ऐलान किया और विरोध प्रदर्शन को धन्यवाद ज्ञापन में बदलते हुए आभार यात्रा का आयोजन किया।
यह आभार यात्रा जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम से शुरू होकर शहर के प्रमुख मार्ग अल्बर्ट एक्का चौक तक पहुंची। इस दौरान हजारों की संख्या में छात्र हाथों में तख्तियां और तिरंगा लिए शामिल हुए। 16 दिनों की कठिन भूख हड़ताल के बाद देवेंद्र नाथ महतो ने जैसे ही अपना अनशन तोड़ा, वहां मौजूद समर्थकों ने उनका स्वागत किया। जटाओं पर अबीर लगाए देवेंद्र नाथ महतो ने समर्थकों के साथ खुशियां मनाईं और इस सफलता को परीक्षार्थियों के एकजुट संघर्ष का परिणाम बताया।
शिक्षा माफिया और भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ा रुख
अनशन समाप्त करने के बाद छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने राज्य की भर्ती प्रणाली पर अपना कड़ा रुख स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि झारखंड की पावन धरती पर किसी भी प्रकार के भ्रष्टाचार और अनियमितताओं को स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि राज्य के युवाओं का भविष्य सुरक्षित करने के लिए भर्ती प्रक्रियाओं में पूर्ण पारदर्शिता आवश्यक है।
देवेंद्र नाथ महतो ने झारखंड के ऐतिहासिक संघर्ष का स्मरण कराते हुए कहा कि यह राज्य बिरसा मुंडा, फूलो-झानो और चांद-भैरव जैसे महान सेनानियों की भूमि है। उन्होंने कहा, "हम शिक्षा माफिया को उसकी जड़ से पूरी तरह खत्म कर देंगे।" उन्होंने चेतावनी दी कि नौकरी भर्ती में लॉबिंग, पेपर लीक और अनुचित तरीकों से युवाओं के अधिकारों का हनन अब राज्य में नहीं होने दिया जाएगा।
सरकार को दो महीने की समय सीमा और चेतावनी
भले ही जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में चल रहा धरना औपचारिक रूप से खत्म हो गया है, लेकिन छात्र नेताओं ने स्पष्ट कर दिया है कि उनकी लड़ाई का यह केवल एक चरण है। छात्र प्रतिनिधियों का कहना है कि सरकार के सामने अब अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा करने की जिम्मेदारी है।
छात्र नेताओं ने झारखंड सरकार को बाकी बची मांगों और प्रशासनिक सुधारों पर त्वरित कार्रवाई करने के लिए दो महीने का समय दिया है। उन्होंने साफ चेतावनी दी है कि यदि इस 2 महीने की अवधि के भीतर सरकार ने ठोस और संतोषजनक कदम नहीं उठाए, तो छात्र एक बार फिर सड़कों पर उतरकर व्यापक आंदोलन शुरू करने के लिए मजबूर होंगे। 25 दिनों तक चला यह आंदोलन फिलहाल थम गया है, परंतु 2 महीने बाद की स्थिति पूरी तरह सरकार की प्रशासनिक कार्रवाई पर निर्भर करेगी।



















