झारखंड के पलामू जिले में बाढ़ की विभीषिका के बीच शिक्षा के प्रति एक नन्हीं बच्ची के अटूट जज़्बे की अनोखी तस्वीर सामने आई है। मेदिनीनगर क्षेत्र के वार्ड नंबर 2 स्थित बैंक कॉलोनी की रहने वाली कक्षा 5 की छात्रा कृतिका कुमारी ने प्राकृतिक आपदा के सामने हार मानने के बजाय सीधे प्रशासन का दरवाजा खटखटाया। बाढ़ के पानी में अपनी किताबें और कॉपियां बह जाने के बाद यह 5 वर्षीय मासूम बच्ची जिला प्रशासन द्वारा आयोजित जन समाधान कार्यक्रम में पहुंची और पढ़ाई जारी रखने के लिए गुहार लगाई।
कोयल नदी के उफान से घर में घुसा पानी
हाल के दिनों में हुई तेज बारिश की वजह से पलामू में कोयल नदी का जलस्तर अचानक काफी बढ़ गया था। नदी में उफान आने के कारण आसपास के निचले इलाकों में बाढ़ का पानी तेजी से भर गया। मेदिनीनगर के बैंक कॉलोनी स्थित कृतिका कुमारी के घर में भी पानी प्रवेश कर गया, जिससे घर का तमाम सामान जलमग्न होकर खराब हो गया। इस आपदा में कृतिका का बस्ता, किताबें, कॉपियां और लिखने-पढ़ने की अन्य आवश्यक सामग्री पानी के तेज बहाव में बह गई।
जन समाधान कार्यक्रम में लगाई न्याय की गुहार
बाढ़ के बाद घर की स्थिति बिगड़ने और अध्ययन सामग्री बर्बाद होने से कृतिका के सामने अपनी स्कूली शिक्षा को आगे बढ़ाने का संकट खड़ा हो गया। हालांकि संकट की इस घड़ी में भी इस नन्हीं छात्रा ने हिम्मत नहीं हारी। वह स्वयं चलकर पलामू उपायुक्त के जन समाधान कार्यक्रम में पहुंच गई। वहां उसने उपायुक्त के सामने अपनी पूरी व्यथा सुनाई और बताया कि बाढ़ में उसकी कॉपियां और किताबें बह गई हैं। बच्ची ने स्पष्ट रूप से कहा कि वह किसी भी हाल में अपनी पढ़ाई रोकना नहीं चाहती, इसलिए उसे नई पाठ्य सामग्री उपलब्ध कराई जाए।
उपायुक्त ने दिए तुरंत मदद के निर्देश
मासूम बच्ची की बातें और शिक्षा के प्रति उसकी लगन देखकर पलामू के उपायुक्त दिलीप प्रताप सिंह शेखावत भावुक हो उठे। उन्होंने बिना किसी देरी के मौके पर ही मौजूद जिला शिक्षा पदाधिकारी को निर्देश जारी किए। उपायुक्त ने आदेश दिया कि कृतिका कुमारी को पढ़ाई के लिए आवश्यक सभी कॉपियां, किताबें और अन्य संबंधित सामग्री तुरंत उपलब्ध कराई जाए। प्रशासन के इस त्वरित कदम से नन्हीं कृतिका के दोबारा पढ़ाई शुरू करने का मार्ग पूरी तरह प्रशस्त हो गया है।
साहस और लगन की मिसाल बनी नन्हीं कृतिका
कोयल नदी के उफान से पलामू के कई निचले इलाके प्रभावित हुए हैं, जहां दर्जनों परिवारों को गृहस्थी के सामान का नुकसान झेलना पड़ा है। कृतिका के परिवार को भी इस प्राकृतिक आपदा में काफी नुकसान उठाना पड़ा। इसके बावजूद बच्ची ने जिस निडरता और समझदारी के साथ अपनी समस्या को जिले के सर्वोच्च अधिकारी के सामने रखा, उसकी हर तरफ सराहना हो रही है। मुश्किल परिस्थितियों के बावजूद पढ़ाई के प्रति उसका यह समर्पण समाज के लिए एक प्रेरणादायक मिसाल है।





















