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रांची का चाणक्य बीएनआर होटल कभी ब्रिटिश अफसरों का था ठिकाना, आज भी बरकरार है सदी पुरानी विरासतझारखंड
19 सित॰ 2026, 1:09 pm (37 मिनट पहले)· 0

रांची का चाणक्य बीएनआर होटल कभी ब्रिटिश अफसरों का था ठिकाना, आज भी बरकरार है सदी पुरानी विरासत

रांची में 1915 में बना चाणक्य बीएनआर होटल ब्रिटिश रेलवे अधिकारियों के लिए तैयार किया गया था, जो अपनी मोटी दीवारों और शाही खानपान के लिए आज भी विख्यात है।

झारखंड की राजधानी रांची में मौजूद चाणक्य बीएनआर होटल अपनी अनूठी वास्तुकला और सदी पुराने इतिहास के कारण शहर की खास पहचान बना हुआ है। बहुत से लोग इस भव्य परिसर में समय बिताने पहुंचते हैं, लेकिन कम ही लोगों को यह जानकारी होती है कि इसके नाम में जुड़े बीएनआर का वास्तविक अर्थ क्या है। बीएनआर का पूरा नाम बंगाल नागपुर रेलवे है। इस ऐतिहासिक परिसर का निर्माण सन् 1915 में पूरा हुआ था। सौ साल से भी अधिक समय पहले ब्रिटिश हुकूमत के दौर में तैयार किया गया यह होटल आज भी अपने मूल स्वरूप और राजसी ठाठ-बाट को संजोए हुए है।

ब्रिटिश अधिकारियों और खास मेहमानों के लिए तैयार हुई थी इमारत

इस इमारत की नींव मूल रूप से औपनिवेशिक काल में बंगाल नागपुर रेलवे के वरिष्ठ अंग्रेज अफसरों और विशिष्ट अतिथियों के ठहरने के मकसद से रखी गई थी। इसे रेलवे के एक खास हेरिटेज ठिकाने की तरह विकसित किया गया था ताकि यहां रुकने वाले मेहमानों को हर तरह की शाही सुविधाएं मिल सकें। आज के दौर में यह परिसर रांची के प्रतिष्ठित फाइव स्टार होटलों में शुमार है। दशकों का समय बीत जाने के बाद भी इसकी बाहरी बनावट, भव्य डिजाइन और चारों तरफ की संरचना बिल्कुल वैसी ही दिखाई देती है जैसी अंग्रेजों के जमाने में बनाई गई थी।

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बंगला शैली की वास्तुकला और मोटी दीवारों का अनूठा विज्ञान

होटल के मैनेजर अमित के अनुसार इस धरोहर की सबसे बड़ी खूबी इसका पारंपरिक बंगला ढांचा है। परिसर के ऊपर आज भी पुराने दौर की विशिष्ट लाल रंग की छत देखी जा सकती है। उस कालखंड में बनी इमारत की दीवारें सामान्य इमारतों के मुकाबले बेहद चौड़ी और अत्यधिक मोटी हैं। इस विशेष निर्माण तकनीक की वजह से कमरों का तापमान प्राकृतिक रूप से नियंत्रित रहता है। कड़ाके की ठंड के दिनों में इन दीवारों के भीतर गर्माहट महसूस होती है, जबकि चिलचिलाती गर्मी के मौसम में अंदर का वातावरण बेहद ठंडा और सुकून देने वाला बना रहता है।

ऊंची छत और हेरिटेज दर्जे का संरक्षण

कमरों के भीतर नजर डालें तो इसकी छतें काफी ऊंची हैं, जो सौ साल पहले की निर्माण शैली को हूबहू दर्शाती हैं। समय के साथ केवल जरूरी आंतरिक सज्जा और नवीनीकरण का काम किया गया है, जबकि मूल स्थापत्य में कोई बड़ा फेरबदल नहीं किया गया। ऐतिहासिक बनावट को बिना बदले सहेज कर रखने की वजह से ही इसे हेरिटेज होटल का आधिकारिक गौरव प्राप्त है। यह अनूठा अनुभव पर्यटकों और स्थानीय निवासियों के बीच इसे बेहद लोकप्रिय बनाता है। यहां के शानदार डाइनिंग अनुभव के लिए एक प्लेट भोजन का न्यूनतम खर्च करीब ₹2000 तक आता है।

शाही दस्तरख्वान और रसोई में तैयार होने वाले ताजे व्यंजन

इस फाइव स्टार होटल में आने वाले अतिथियों को बेहद खास और शाही अंदाज में सेवाएं दी जाती हैं। यहां मौजूद रेस्टोरेंट के मेन्यू में देश-दुनिया के लजीज व्यंजनों की विस्तृत श्रृंखला उपलब्ध है। मेहमानों को यहां अवध के पारंपरिक कबाब से लेकर दक्षिण भारत का उत्तपम परोसा जाता है। इसके अलावा इटालियन, मैक्सिकन और कॉन्टिनेंटल खानपान के कई विकल्प भी मौजूद रहते हैं। समय-समय पर यहां विशेष फूड फेस्टिवल आयोजित किए जाते हैं, जिनमें कई दुर्लभ और अनोखी डिशेज पेश की जाती हैं।

यही वजह है कि शहर के लोग अपने परिवार और दोस्तों के साथ लंच या डिनर के लिए इस जगह को पहली पसंद मानते हैं। खास बात यह है कि यहां पास्ता से लेकर विभिन्न प्रकार की ब्रेड तक सब कुछ होटल की अपनी रसोई में इन-हाउस शेफ द्वारा ताजा तैयार किया जाता है। बाहर से बनी सामग्रियों का उपयोग न होने से भोजन का स्वाद बेहद अनूठा रहता है, जिसे लोग लंबे समय तक याद रखते हैं।

सवाल-जवाब

चाणक्य बीएनआर होटल में बीएनआर का क्या मतलब है?
बीएनआर का पूरा नाम बंगाल नागपुर रेलवे (Bengal Nagpur Railway) है, जिसके लिए इस इमारत का निर्माण किया गया था।
यह ऐतिहासिक होटल किस वर्ष बनकर तैयार हुआ था?
यह होटल सन् 1915 में बनकर तैयार हुआ था और वर्तमान में 100 साल से अधिक पुराना है।
मूल रूप से यह होटल किन लोगों के ठहरने के लिए बनाया गया था?
इसे मूल रूप से ब्रिटिश रेलवे अधिकारियों और वीआईपी मेहमानों के विश्राम के लिए हेरिटेज होटल के रूप में तैयार किया गया था।
होटल की दीवारों की क्या बनावट और खासियत है?
होटल की दीवारें काफी चौड़ी और मोटी हैं, जिससे कमरों के अंदर ठंड के दिनों में गर्मी और गर्मियों में ठंडक महसूस होती है।
यहां रेस्टोरेंट में भोजन करने का न्यूनतम खर्च कितना आता है?
होटल के रेस्टोरेंट में एक प्लेट भोजन की शुरुआती कीमत कम से कम ₹2000 है।
होटल के मेन्यू में कौन-कौन से मुख्य व्यंजन उपलब्ध हैं?
मेन्यू में अवध के कबाब, दक्षिण भारतीय उत्तपम के अलावा इटालियन, मैक्सिकन और कॉन्टिनेंटल व्यंजन शामिल हैं।
होटल के पास्ता और ब्रेड की क्या खासियत है?
यहां ब्रेड और पास्ता बाहर से मंगाने के बजाय होटल के शेफ अपनी रसोई में ही ताजा तैयार करते हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Rohan Verma@rohan-verma·7 मिनट पहले

यह रिपोर्ट दर्शाती है कि कैसे औपनिवेशिक वास्तुकला को आधुनिक आतिथ्य सत्कार और पर्यटन के साथ सफलतापूर्वक जोड़ा जा सकता है। मोटी दीवारों और प्राकृतिक तापमान नियंत्रण जैसी पारंपरिक निर्माण तकनीकें आधुनिक ऊर्जा दक्षता के लिए एक बड़ा सबक हैं, बशर्ते इस तरह की ऐतिहासिक संपत्तियों का व्यावसायीकरण करते समय उनके मूल स्वरूप और संरचनात्मक अखंडता से कोई समझौता न किया जाए।

Karan Malhotra@karan-malhotra·7 मिनट पहले

यह ऐतिहासिक इमारत दर्शाती है कि कैसे पुराने वास्तुशिल्प को सहेजते हुए उसका आधुनिक उपयोग किया जा सकता है। यद्यपि यह मुख्य रूप से आतिथ्य सत्कार और पर्यटन से जुड़ा मामला है, लेकिन ऐसी प्राचीन संपत्तियों के व्यावसायिक उपयोग के दौरान लोक सुरक्षा, अग्नि सुरक्षा मानकों और प्राचीन ढांचागत अखंडता के बीच संतुलन बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती होती है।

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