रांची के रहने वाले किसान दीपेश ने खेती के क्षेत्र में अपनी मेहनत से एक नया मुकाम हासिल किया है। उन्होंने हाल ही में समाप्त हुए सीजन के दौरान एक एकड़ जमीन पर भिंडी की फसल उगाई थी, जिससे उन्हें दो लाख रुपये की शुद्ध आय प्राप्त हुई। उनकी इस फसल की गुणवत्ता इतनी बेहतरीन थी कि खेत में आज भी हरी-भरी भिंडियां देखी जा सकती हैं, जो उनकी उन्नत कृषि तकनीकों का प्रमाण देती हैं।
सब्जी उत्पादन का नया प्लान
भिंडी की शानदार सफलता के बाद अब दीपेश ने ठंडे मौसम की फसलों पर अपना ध्यान केंद्रित कर लिया है। वह आगामी सीजन में एक एकड़ के भूखंड पर पत्तागोभी और फूलगोभी उगाने की पुख्ता योजना बना रहे हैं। उनका पूरा विश्वास है कि यदि पिछली बार की तरह इन सर्दियों की सब्जियों की गुणवत्ता भी उच्च स्तर की रही, तो उन्हें बाजार में बंपर मुनाफा कमाने से कोई नहीं रोक सकेगा।
जैविक खाद और मिट्टी की तैयारी का सीक्रेट
सफलता के पीछे के मंत्र को साझा करते हुए दीपेश का कहना है कि किसी भी फसल की बंपर पैदावार के लिए खेत की मिट्टी का उपजाऊ और सेहतमंद होना सबसे ज्यादा जरूरी है। अपनी फसलों के लिए वह बाजार की महंगी खादों पर निर्भर रहने के बजाय खुद ही जैविक खाद तैयार करते हैं। उनके पास लगभग 10 साल पुराना सड़ा हुआ गोबर का खाद उपलब्ध रहता है, जिसका वह खेतों में नियमित रूप से उपयोग करते हैं।
उनके अपने घर पर गाय और भैंस होने की वजह से उन्हें उच्च गुणवत्ता वाला गोबर आसानी से मिल जाता है। खेती का नया चक्र शुरू होने से ठीक पहले वह खेत में 7 साल पुराना खाद मिलाते हैं। इसके साथ ही मिट्टी की सेहत सुधारने के लिए उसमें उचित मात्रा में चूना और पोटाश भी मिलाया जाता है। खासकर पोटाश का इस्तेमाल करने से पत्तागोभी जैसी फसलें बेहद चिकनी और चमकदार बनती हैं, जिससे ग्राहकों को आकर्षित करना और बाजार में उनकी अच्छी कीमत वसूलना आसान हो जाता है।
नीम और लहसुन का अनोखा फॉर्मूला
फसलों को कीटों और बीमारियों से सुरक्षित रखने के लिए दीपेश पूरी तरह प्राकृतिक और घरेलू तरीकों पर भरोसा करते हैं। वह बाजार के रासायनिक कीटनाशकों के विकल्प के तौर पर नीम और लहसुन से तैयार किए गए विशेष घोल का इस्तेमाल करते हैं। इस देसी नुस्खे को बनाने के लिए वह नीम की ताजी पत्तियों और लहसुन की कलियों को 5 लीटर पानी में करीब 10 से 12 दिनों के लिए भिगोकर छोड़ देते हैं। तैयार होने के बाद इस प्रभावी घोल को पौधों की जड़ों में डाला जाता है, जिससे कीटों का हमला स्वतः रुक जाता है।
कड़ी मेहनत और नियमित देखरेख
सिर्फ खाद और पानी ही नहीं बल्कि दीपेश अपनी फसल की सफलता का श्रेय अपनी कड़ी मेहनत को भी देते हैं। वह हर रोज अपने खेतों में 4 से 5 घंटे का लंबा समय बिताते हैं और एक-एक पौधे का बहुत ही बारीकी से निरीक्षण करते हैं। हालांकि जरूरत पड़ने पर वह बाजार में मिलने वाले कीटनाशकों का भी उपयोग कर लेते हैं, लेकिन कीट नियंत्रण के लिए उनका यह नीम और लहसुन वाला घोल सबसे अचूक और प्रभावी माध्यम साबित हुआ है।



















