झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाले आकीब ने उच्च शिक्षा पूरी करने के बाद किसी सामान्य नौकरी के बजाय अपने अनूठे उद्यम की राह चुनी। आईएमएस से एमबीए की डिग्री हासिल करने वाले आकीब को बचपन से ही नाश्ते में शुद्ध घी से बने पराठे खाने का शौक था। बड़े होकर जब उन्होंने बाजार में मिलने वाले घी की गुणवत्ता को परखा, तो पाया कि अधिकांश उत्पाद मिलावटी और नकली हैं। इसी चिंता ने उन्हें एक नई दिशा दी और उन्होंने तय किया कि ग्रामीण महिलाओं की मदद से पारंपरिक तरीके से तैयार शुद्ध ए2 बिलोना घी बनाया जाए और सीधे ग्राहकों तक पहुंचाया जाए।
पारंपरिक विधि और जंगल से शहद जुटाने की पहल
आकीब का यह उद्यम खास तौर पर ए2 बिलोना घी तैयार करता है, जिसे दूध से सीधे नहीं बल्कि पहले दही जमाकर और फिर मथकर निकले मक्खन से पारंपरिक पद्धति द्वारा पकाया जाता है। इसके साथ ही, वे झारखंड के वनों से प्राकृतिक रूप से व्हाइट फॉरेस्ट शहद जुटाकर बेचने का कार्य भी करते हैं। उनके उत्पाद की कीमत आम बाजार के मुकाबले काफी ज्यादा है, जहां एक किलोग्राम ए2 बिलोना घी का दाम ₹2200 तय किया गया है। शुरुआत में लोगों को यह कीमत अधिक लग सकती है, लेकिन शुद्धता और पोषण के मामले में इसे पूरी तरह जायज ठहराया जाता है।
सवेरे टहलने वालों से शुरू हुई जागरूकता और सीधी ब्रांडिंग
शुरुआती दौर में ग्राहकों को इस प्रीमियम और महंगे उत्पाद का महत्व समझाना एक बड़ी चुनौती थी। आकीब का मानना था कि किसी भी नए काम में ब्रांडिंग दूसरे व्यक्ति के भरोसे नहीं छोड़ी जा सकती, इसलिए उन्होंने खुद आगे आकर कमान संभाली। वे सुबह के वक्त टहलने निकलने वाले लोगों के बीच स्टॉल लगाते थे और उन्हें समझाते थे कि इस घी की कीमत अधिक क्यों है। वे लोगों को बताते थे कि पारंपरिक बिलोना पद्धति से दही का मक्खन तैयार करने में कितनी मेहनत लगती है और यह किस तरह शरीर के लिए लाभदायक व उत्तम फैट माना जाता है।
वीडियो से समझाया उत्पादन का तरीका, बड़े शहरों तक पहुंचे ऑर्डर
ग्राहकों का भरोसा जीतने के लिए उन्होंने बिलोना तकनीक से घी बनाने की पूरी प्रक्रिया का वीडियो लोगों को दिखाना शुरू किया। इस पारदर्शी तरीके ने लोगों का संकोच दूर कर दिया और उत्पाद की मांग तेजी से बढ़ने लगी। आज स्थिति यह है कि दिल्ली, मुंबई और पुणे जैसे बड़े महानगरों से लगातार आर्डर मिल रहे हैं। इसके अलावा रांची शहर के लगभग 10 प्रतिष्ठित रेस्टोरेंट, जिनमें गोकुल स्वीट्स, राज रेस्टोरेंट और गणगौर स्वीट्स शामिल हैं, नियमित तौर पर उनके ग्राहक बन चुके हैं। पूरे देश में डिलीवरी की सुविधा के साथ शुद्धता ही उनके काम की सबसे बड़ी ताकत बन चुकी है।
मासिक बिक्री और ग्रामीण महिलाओं के लिए स्वावलंबन का जरिया
आकीब के अनुसार, सबसे बड़ी मेहनत केवल पहले ग्राहक को जोड़ने में होती है। एक बार जब कोई उपभोक्ता असली और शुद्ध स्वाद पहचान लेता है, तो वह दोबारा खुद फोन करके ऑर्डर देता है और साथ में अन्य नए खरीदारों को भी जोड़ता है। इस कारोबार के माध्यम से अब हर महीने आराम से दो से ढाई लाख रुपये की बिक्री दर्ज की जा रही है। सबसे खास बात यह है कि इस पूरी प्रक्रिया में 50 से अधिक घरेलू महिलाएं सक्रिय रूप से जुड़ी हुई हैं, जिनसे सीधे यह उत्पाद तैयार कराया जाता है। उन्हें उचित पारिश्रमिक मिलने से स्थानीय स्तर पर आजीविका का ठोस माध्यम मिल रहा है।





















