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रांची के आकीब ने पारंपरिक बिलोना घी से खड़ा किया लाखों का उद्यम, 50 से अधिक ग्रामीण महिलाओं को मिला कामझारखंड
6 अक्तू॰ 2026, 8:32 am (2 घंटे पहले)· 0

रांची के आकीब ने पारंपरिक बिलोना घी से खड़ा किया लाखों का उद्यम, 50 से अधिक ग्रामीण महिलाओं को मिला काम

आईएमएस से एमबीए करने वाले आकीब ने रांची में पारंपरिक ए2 बिलोना घी और जंगल के शहद का सफल व्यवसाय शुरू किया है। आज उनका यह उद्यम न केवल बड़े शहरों तक पहुंच रहा है, बल्कि 50 से अधिक ग्रामीण महिलाओं को रोजगार भी दे रहा है।

झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाले आकीब ने उच्च शिक्षा पूरी करने के बाद किसी सामान्य नौकरी के बजाय अपने अनूठे उद्यम की राह चुनी। आईएमएस से एमबीए की डिग्री हासिल करने वाले आकीब को बचपन से ही नाश्ते में शुद्ध घी से बने पराठे खाने का शौक था। बड़े होकर जब उन्होंने बाजार में मिलने वाले घी की गुणवत्ता को परखा, तो पाया कि अधिकांश उत्पाद मिलावटी और नकली हैं। इसी चिंता ने उन्हें एक नई दिशा दी और उन्होंने तय किया कि ग्रामीण महिलाओं की मदद से पारंपरिक तरीके से तैयार शुद्ध ए2 बिलोना घी बनाया जाए और सीधे ग्राहकों तक पहुंचाया जाए।

पारंपरिक विधि और जंगल से शहद जुटाने की पहल

आकीब का यह उद्यम खास तौर पर ए2 बिलोना घी तैयार करता है, जिसे दूध से सीधे नहीं बल्कि पहले दही जमाकर और फिर मथकर निकले मक्खन से पारंपरिक पद्धति द्वारा पकाया जाता है। इसके साथ ही, वे झारखंड के वनों से प्राकृतिक रूप से व्हाइट फॉरेस्ट शहद जुटाकर बेचने का कार्य भी करते हैं। उनके उत्पाद की कीमत आम बाजार के मुकाबले काफी ज्यादा है, जहां एक किलोग्राम ए2 बिलोना घी का दाम ₹2200 तय किया गया है। शुरुआत में लोगों को यह कीमत अधिक लग सकती है, लेकिन शुद्धता और पोषण के मामले में इसे पूरी तरह जायज ठहराया जाता है।

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सवेरे टहलने वालों से शुरू हुई जागरूकता और सीधी ब्रांडिंग

शुरुआती दौर में ग्राहकों को इस प्रीमियम और महंगे उत्पाद का महत्व समझाना एक बड़ी चुनौती थी। आकीब का मानना था कि किसी भी नए काम में ब्रांडिंग दूसरे व्यक्ति के भरोसे नहीं छोड़ी जा सकती, इसलिए उन्होंने खुद आगे आकर कमान संभाली। वे सुबह के वक्त टहलने निकलने वाले लोगों के बीच स्टॉल लगाते थे और उन्हें समझाते थे कि इस घी की कीमत अधिक क्यों है। वे लोगों को बताते थे कि पारंपरिक बिलोना पद्धति से दही का मक्खन तैयार करने में कितनी मेहनत लगती है और यह किस तरह शरीर के लिए लाभदायक व उत्तम फैट माना जाता है।

वीडियो से समझाया उत्पादन का तरीका, बड़े शहरों तक पहुंचे ऑर्डर

ग्राहकों का भरोसा जीतने के लिए उन्होंने बिलोना तकनीक से घी बनाने की पूरी प्रक्रिया का वीडियो लोगों को दिखाना शुरू किया। इस पारदर्शी तरीके ने लोगों का संकोच दूर कर दिया और उत्पाद की मांग तेजी से बढ़ने लगी। आज स्थिति यह है कि दिल्ली, मुंबई और पुणे जैसे बड़े महानगरों से लगातार आर्डर मिल रहे हैं। इसके अलावा रांची शहर के लगभग 10 प्रतिष्ठित रेस्टोरेंट, जिनमें गोकुल स्वीट्स, राज रेस्टोरेंट और गणगौर स्वीट्स शामिल हैं, नियमित तौर पर उनके ग्राहक बन चुके हैं। पूरे देश में डिलीवरी की सुविधा के साथ शुद्धता ही उनके काम की सबसे बड़ी ताकत बन चुकी है।

मासिक बिक्री और ग्रामीण महिलाओं के लिए स्वावलंबन का जरिया

आकीब के अनुसार, सबसे बड़ी मेहनत केवल पहले ग्राहक को जोड़ने में होती है। एक बार जब कोई उपभोक्ता असली और शुद्ध स्वाद पहचान लेता है, तो वह दोबारा खुद फोन करके ऑर्डर देता है और साथ में अन्य नए खरीदारों को भी जोड़ता है। इस कारोबार के माध्यम से अब हर महीने आराम से दो से ढाई लाख रुपये की बिक्री दर्ज की जा रही है। सबसे खास बात यह है कि इस पूरी प्रक्रिया में 50 से अधिक घरेलू महिलाएं सक्रिय रूप से जुड़ी हुई हैं, जिनसे सीधे यह उत्पाद तैयार कराया जाता है। उन्हें उचित पारिश्रमिक मिलने से स्थानीय स्तर पर आजीविका का ठोस माध्यम मिल रहा है।

सवाल-जवाब

आकीब का यह घी व्यवसाय किस शहर से संचालित होता है?
यह व्यवसाय झारखंड की राजधानी रांची से संचालित होता है।
ए2 बिलोना घी तैयार करने की मुख्य विधि क्या है?
यह घी सीधे दूध से नहीं, बल्कि दही जमाकर उसके मक्खन को पारंपरिक बिलोना पद्धति से मथकर तैयार किया जाता है।
इस ए2 बिलोना घी की कीमत कितनी रखी गई है?
एक किलोग्राम ए2 बिलोना घी की कीमत ₹2200 है।
घी के अलावा आकीब कौन सा अन्य उत्पाद बेचते हैं?
वे झारखंड के जंगलों से निकाला गया व्हाइट फॉरेस्ट शहद भी उपलब्ध कराते हैं।
इस व्यवसाय में कितनी स्थानीय महिलाएं जुड़ी हुई हैं?
इस कार्य में 50 से अधिक ग्रामीण और घरेलू महिलाएं सीधे जुड़ी हुई हैं जो इसे तैयार करती हैं।
इस उद्यम की मासिक बिक्री लगभग कितनी होती है?
वर्तमान में इस व्यवसाय से प्रति माह लगभग ₹2 लाख से ₹2.5 लाख तक की बिक्री हो जाती है।
रांची के कौन से प्रमुख रेस्टोरेंट इनके उत्पाद का उपयोग करते हैं?
रांची के गोकुल स्वीट्स, राज रेस्टोरेंट और गणगौर स्वीट्स समेत लगभग 10 बड़े रेस्टोरेंट इनके ग्राहक हैं।
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टिप्पणियाँ 2

Rohan Verma@rohan-verma·1 घंटे पहले

एमबीए करने के बाद नौकरी के पीछे भागने के बजाय ऐसा कुछ शुरू करना वाकई काबिले तारीफ है। सबसे अच्छी बात यह लगी कि इससे पचास से ज्यादा ग्रामीण महिलाओं को घर बैठे काम मिल गया। शुद्धता और मेहनत दोनों दिखती हैं।

Karan Malhotra@karan-malhotra·1 घंटे पहले

रोहन जी, बात सही है। पर ऐसे मामलों में मिलावटखोरों पर फूड सेफ्टी एक्ट के तहत कानूनी शिकंजा कसना भी उतना ही जरूरी है, वरना असली उत्पादक पिछड़ जाते हैं।

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