कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में बुनियादी ढांचे के विस्तार के नाम पर विशाल हरित आवरण को हटाने की रूपरेखा तैयार की गई है. हेब्बाल क्षेत्र में बनने वाले 2.3 किलोमीटर लंबे भूमिगत टनल मार्ग के निर्माण हेतु कुल 1,128 घने पेड़ों को जमींदोज करने की योजना बनाई गई है. इस परियोजना के तहत प्रत्येक 1 किलोमीटर टनल निर्माण के बदले लगभग 490 पूर्ण विकसित वृक्षों की बलि चढ़ाई जाएगी. इस कदम से बेल्लारी रोड, वेटरनरी कॉलेज परिसर और हेब्बाल झील से सटे प्राकृतिक क्षेत्रों का अस्तित्व खतरे में आ गया है. बेंगलुरु विकास प्राधिकरण यानी बीडीए की इस योजना के मद्देनजर ग्रेटर बेंगलुरु अथॉरिटी के ट्री ऑफिसर ने जनता से पेड़ों की कटाई को लेकर आधिकारिक आपत्तियां दर्ज कराने का नोटिस जारी किया है.
नागरिकों ने जुटाए तथ्य और उठाया पारदर्शिता का मुद्दा
प्रशासनिक स्तर पर आपत्ति दर्ज कराने का नोटिस जारी होने के तुरंत बाद स्थानीय रहवासियों और पर्यावरण समर्थकों में असंतोष की लहर दौड़ गई. नागरिकों का मुख्य आरोप है कि संबंधित नागरिक निकाय के ऑनलाइन पोर्टल पर काटे जाने वाले पेड़ों की विशिष्ट प्रजातियों अथवा उनकी सही भौगोलिक स्थिति का कोई ब्योरा सार्वजनिक नहीं किया गया. ठोस विवरण उपलब्ध न होने के कारण लोगों के लिए यह समझना असंभव हो गया कि वे किस आधार पर अपनी आपत्तियां दर्ज कराएं. आधिकारिक जानकारी में स्पष्टता की कमी को देखते हुए आम जनता ने स्वयं मैदानी स्तर पर उतरने का निर्णय लिया.
बीते दो महीनों के दौरान 21 स्वयंसेवकों की एक टीम ने इस पूरे मार्ग का गहन सर्वेक्षण पूरा किया. ‘आई-नेचुरलिस्ट’ प्लेटफॉर्म का सहारा लेकर नागरिकों ने बरगद, पीपल, फाइकस तथा कैननबॉल जैसे विशालकाय वृक्षों की सटीक स्थिति को मोबाइल कैमरों से जियोटैग किया. इसके अतिरिक्त पेड़ों पर रहने वाले दुर्लभ स्पॉटेड ऑउलेट्स यानी चित्तीदार उल्लुओं के ठिकानों की तस्वीरें भी संकलित की गईं, ताकि विकास योजनाओं के कारण होने वाले वास्तविक नुकसान की तस्वीर प्रशासन के सामने रखी जा सके.
278 पक्षी प्रजातियों का प्राकृतिक बसेरा और कट-एंड-कवर का प्रभाव
पर्यावरण कार्यकर्ताओं के अनुसार हेब्बाल झील और वेटरनरी कॉलेज परिसर का यह हरा-भरा भूभाग वन्यजीवों और स्थानीय परिंदों के लिए एक स्वाभाविक ग्रीन कॉरिडोर के रूप में काम करता है. वैश्विक पक्षी अवलोकन डेटाबेस ‘ई-बर्ड’ के आधिकारिक आंकड़ों से पता चलता है कि हेब्बाल झील के निकट 183 और वेटरनरी कॉलेज परिसर में 95 पक्षी प्रजातियां दर्ज हैं, जिनका कुल योग 278 बैठता है. इस विशाल जैव विविधता वाले गलियारे पर अब बुलडोजर और निर्माण मशीनों का साया मंडरा रहा है.
परियोजना का निर्माण कट-एंड-कवर तकनीक की सहायता से किया जाना प्रस्तावित है. विशेषज्ञों ने चेताया है कि इस तकनीक में बड़े पैमाने पर गहरी खुदाई की जाती है, जिसके कारण दशकों पुरानी गहरी जड़ें पूरी तरह नष्ट हो जाएंगी. सतह पर कंक्रीट की परत बिछाने और गहरी जड़ों के उखड़ जाने से मिट्टी की प्राकृतिक अवशोषण क्षमता समाप्त हो जाएगी, जिससे इस पूरे इलाके का संवेदनशील पारिस्थितिकी तंत्र पूरी तरह असंतुलित हो जाएगा.
शताब्दी पुराने वृक्ष और दुर्लभ वानस्पतिक धरोहर
नागरिकों द्वारा पूरे किए गए दो महीने के विस्तृत सर्वे से यह तथ्य उजागर हुआ है कि यह क्षेत्र केवल सामान्य झाड़ियों या छोटे पौधों का नहीं, बल्कि अत्यंत मूल्यवान पारिस्थितिक विरासत का केंद्र है. सर्वे के दौरान 40 स्वदेशी और 20 सजावटी वानस्पतिक प्रजातियों की उपस्थिति दर्ज की गई. इन पेड़ों में लगभग 100 वर्ष पुराना ऐतिहासिक बरगद का पेड़ भी शामिल है, जिस पर अब सीधे तौर पर कुल्हाड़ी चलने का खतरा बन गया है.
इस पूरे मार्ग पर जामुन, आंवला, करंज और रेन ट्री के साथ-साथ फाइकस परिवार के कई अहम वृक्ष मौजूद हैं. इनमें मैसूर अंजीर, क्लस्टर अंजीर और सफेद अंजीर प्रमुख हैं, जो स्थानीय स्तर पर कीड़ों, छोटे स्तनधारियों और अनगिनत पक्षियों के भोजन एवं सुरक्षित आश्रय का प्राथमिक स्रोत हैं. इन विशाल पेड़ों का हटना क्षेत्र की संपूर्ण खाद्य श्रृंखला को तहस-नहस कर देगा.
भूजल पुनर्भरण प्रणाली पर मंडराता गंभीर संकट
पर्यावरण विशेषज्ञों ने साफ चेतावनी दी है कि सड़कों के चौड़ीकरण और सुरंग निर्माण के लिए हरित आवरण हटाने से शहर का जलस्तर पाताल में जा सकता है. वेटरनरी कॉलेज परिसर में मौजूद विशालकाय बरगद और पीपल के पेड़ों का गहरा रूट सिस्टम वर्षा जल को भूमि की गहराई तक उतारने यानी ग्राउंडवाटर रिचार्ज में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. बेंगलुरु पहले से ही जल संकट की गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है, ऐसे में इस प्राकृतिक वाटर रिचार्ज तंत्र का टूटना संकट को और बढ़ा देगा.
स्थानीय निवासियों का कहना है कि आज के कंक्रीट से भरे घने शहर में ऐसे सदियों पुराने विशालकाय पेड़ों को दोबारा विकसित करने के लिए न तो जगह बची है और न ही समय. इसी कारण हेब्बाल जंक्शन से यूएएस स्टाफ क्वार्टर्स के बीच प्रस्तावित सड़क और टनल के वर्तमान अलाइनमेंट पर तुरंत पुनर्विचार किया जाना बेहद जरूरी है, ताकि शहर की हवा, पानी और अनमोल जैव विविधता दोनों की रक्षा हो सके.























