कर्नाटक में बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की गुणवत्ता परखने के लिए एक मंत्री ने देर रात सड़कों का औचक निरीक्षण किया। करीब तीन घंटे तक चले इस निरीक्षण के दौरान मंत्री ने बनरघट्टा-एनआईसीई रोड-गोट्टिगेरे जंक्शन पर चल रहे निर्माण कार्यों का बारीकी से जायजा लिया। जमीनी हकीकत सामने आने पर निर्माण कार्य में कई तकनीकी खामियां और लापरवाही उजागर हुईं, जिस पर मंत्री ने साथ चल रहे अधिकारियों से तीखे सवाल पूछे।
बनरघट्टा जंक्शन पर मिलीं निर्माण में गंभीर गड़बड़ियां
निरीक्षण के दौरान बनरघट्टा-एनआईसीई रोड-गोट्टिगेरे जंक्शन पर सड़क चौड़ीकरण, जल निकासी व्यवस्था और डामरीकरण के स्तर में स्पष्ट कमियां देखी गईं। मंत्री ने उस हिस्से पर विशेष रूप से नाराजगी जताई जहां तारकोल की परत निर्धारित मानकों के अनुसार ठीक से नहीं बिछाई गई थी। सड़क की सतह असंतुलित पाई गई, जिससे भविष्य में यातायात सुगम रहने के बजाय दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ सकता था।
ड्रेनेज के गैर-जरूरी मोड़ पर अधिकारियों से सवाल-जवाब
सड़क के किनारे नाला निर्माण के दौरान किए गए बदलावों पर भी सवाल उठे। ड्रेनेज बनाते समय उसमें एक गैर-जरूरी मोड़ दे दिया गया था, जिसके चलते सड़क की असल चौड़ाई काफी कम हो गई थी। मंत्री ने इंजीनियरों और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों से सीधे पूछा कि इस तरह के अवांछित मोड़ की अनुमति किस आधार पर दी गई। उन्होंने स्पष्ट किया कि सड़क की वास्तविक चौड़ाई को नुकसान पहुंचाकर किया गया निर्माण अस्वीकार्य है और इस तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
रात के वक्त 3 घंटे तक चला जमीनी मुआयना
अधिकारियों के साथ मंत्री ने पूरे इलाके में तीन घंटे तक पैदल और वाहन से मुआयना किया। अचानक हुए इस दौरे और मौके पर मिली कमियों को लेकर मंत्री के कड़े रुख से संबंधित महकमे के अफसरों में हड़कंप मच गया। मौके पर ही सड़क की सतह सुधारने, ड्रेनेज के अड़चनों को दूर करने और तय मानकों के अनुरूप चौड़ीकरण का कार्य पूरा करने के स्पष्ट निर्देश दिए गए।





















