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केरल के कोझिकोड में जीवनसाथी तलाश रहे 7000 लोग पहुंचे, मंदिर से हाईवे तक लगी लंबी कतारकेरल
3 नव॰ 2026, 7:26 pm (1 घंटे पहले)· 0

केरल के कोझिकोड में जीवनसाथी तलाश रहे 7000 लोग पहुंचे, मंदिर से हाईवे तक लगी लंबी कतार

कोझिकोड के करंथुर स्थित मंदिर में निशुल्क विवाह पंजीकरण शिविर में 1500 फॉर्म के मुकाबले 7000 लोग उमड़ पड़े, जिसमें 80 फीसदी पुरुष आवेदक शामिल रहे।

केरल के कोझिकोड जिले में करंथुर स्थित हरहारा महादेव मंदिर परिसर में रविवार को आयोजित निशुल्क विवाह पंजीकरण शिविर में अप्रत्याशित जनसैलाब देखने को मिला। आयोजकों ने प्रारंभिक तौर पर 1000 से 2000 लोगों के पहुंचने का अनुमान लगाया था और इसी हिसाब से 1,500 फॉर्म तैयार करवाए थे। सुबह सवेरे से ही अविवाहित युवक-युवतियों और उनके अभिभावकों का तांता लगना शुरू हो गया। देखते ही देखते पंजीकरण कराने वालों की तादाद करीब 7000 तक जा पहुंची। मंदिर परिसर के भीतर जब पैर रखने की जगह नहीं बची, तब आवेदकों की कतार मुख्य द्वार से बाहर निकलकर पास से गुजरने वाले नेशनल हाईवे के किनारे स्थित दो बस स्टॉप तक खिंच गई। स्थिति को संभालते हुए प्रबंधन को पहले फोटोकॉपी के जरिए पर्चियां बांटनी पड़ीं और फिर स्थानीय प्रिंटिंग प्रेस से आपातकालीन आधार पर 4000 अतिरिक्त फॉर्म छपवाकर मंगवाने पड़े।

सुबह सात बजे से ही शुरू करना पड़ा पंजीकरण

कार्यक्रम की मूल योजना के तहत विवाह पंजीकरण का कार्य सुबह 9 बजे प्रारंभ होकर दोपहर 1 बजे संपन्न होना था। बड़ी संख्या में लोग निर्धारित समय से काफी पहले ही जुटने लगे थे, जिसकी वजह से आयोजकों को सुबह 7 बजे ही पंजीकरण काउंटर खोलने पड़े। शिविर का औपचारिक उद्घाटन कुन्नमंगलम पंचायत के अध्यक्ष सीवी संजीत ने किया। लोगों का लगातार आना दोपहर के बाद भी नहीं थमा, जिसके चलते पंजीकरण प्रक्रिया को शाम तक जारी रखना पड़ा। शिविर में हिस्सा लेने वाले कई प्रतिभागी एक रात पहले ही लंबी यात्राएं करके कोझिकोड पहुंच चुके थे। कुछ लोग पूरी रात सफर तय कर सुबह तड़के सीधे आयोजन स्थल पर पहुंचे। कई माता-पिता खुद अपनी संतानों के बायोडाटा और विवरण लेकर घंटों कतार में खड़े रहे ताकि वे अपनी संतानों के लिए उपयुक्त रिश्ता तलाश सकें।

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सोशल मीडिया पर दो हफ्ते पहले दी गई थी जानकारी

इस पूरे आयोजन का प्रचार-प्रसार किसी बड़े विज्ञापन अभियान के जरिए नहीं, बल्कि व्हाट्सऐप और फेसबुक ग्रुप्स के माध्यम से किया गया था। खास पहलू यह रहा कि शिविर की जानकारी कार्यक्रम के आयोजन से केवल दो सप्ताह पहले ही साझा की गई थी। इतने संक्षिप्त समय में दी गई सूचना के बावजूद इस पहल को कोझिकोड जिले के अलावा कन्नूर, वायनाड, पलक्कड़ तथा केरल के अन्य सीमावर्ती और दूरदराज के क्षेत्रों से भारी समर्थन मिला। आयोजकों का स्पष्ट दृष्टिकोण था कि सैकड़ों किलोमीटर दूर से उम्मीद लेकर पहुंचे किसी भी व्यक्ति को बिना फॉर्म भरे या बिना नाम दर्ज कराए खाली हाथ वापस न लौटाया जाए। इसी संकल्प के तहत अतिरिक्त प्रतियों और मुद्रण की तत्काल व्यवस्था की गई।

पंजीकरण कराने वालों में 80 प्रतिशत पुरुष

शिविर में जमा हुए आवेदनों के प्राथमिक विश्लेषण से समाज में विवाह को लेकर चल रही जमीनी हकीकत का एक महत्वपूर्ण पहलू सामने आया है। आयोजकों द्वारा जुटाए गए आंकड़ों के मुताबिक, पंजीकरण कराने वाले कुल लोगों में लगभग 80 फीसदी पुरुष थे। इनमें 30 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के अविवाहित पुरुषों का अनुपात सबसे बड़ा था। 40 और 50 वर्ष की आयु सीमा वाले कई अविवाहित पुरुषों ने भी अपने आवेदन जमा किए। महिलाओं के आवेदनों में एक उल्लेखनीय हिस्सा उन महिलाओं का था जो पुनर्विवाह के लिए अनुकूल जीवनसाथी की तलाश कर रही थीं। आयोजन स्थल पर अपने बेटे के लिए रिश्ता ढूंढने पहुंची एक मां ने बताया कि वे काफी लंबे समय से अपने पुत्र के लिए वधू की तलाश में भटक रही थीं, परंतु कहीं बात नहीं बन पा रही थी। उन्होंने इस उम्मीद में शिविर में कई घंटे कतार में बिताए कि शायद यहां उनके बेटे को एक अच्छा जीवनसाथी मिल सके।

कोझिकोड हिंदू समाजम का उद्देश्य और संघर्ष की कहानियां

इस विशेष पहल से जुड़े कोझिकोड हिंदू समाजम के प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया कि इस शिविर की मूल अवधारणा केवल एक सामान्य पंजीकरण केंद्र तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका वास्तविक लक्ष्य उन परिवारों की व्यावहारिक मदद करना है जो आज के दौर में योग्य साथी खोजने में गंभीर मुश्किलों का सामना कर रहे हैं। समाजम की कार्यकारी समिति के सदस्य राघवन सी ने बताया कि आज के समय में युवाओं के बीच विवाह के सामाजिक महत्व को रेखांकित करने और साथी की तलाश के दौरान आने वाली व्यावहारिक अड़चनों को सुलझाने के लिए व्यापक सामाजिक जागरूकता की सख्त आवश्यकता है। उन्होंने स्वीकार किया कि 45 से 50 वर्ष की आयु पार कर चुके कई अविवाहित लोगों के आवेदन देखकर स्वयं समिति के सदस्य भी चकित रह गए। कई माता-पिता अपने बच्चों के भविष्य की चिंता लेकर बेहद भावुक स्थिति में यहां पहुंचे थे।

दिसंबर से शुरू होगा आवेदनों का मिलान और साझाकरण

शिविर के दौरान प्राप्त हुए हजारों आवेदनों को अब एक व्यवस्थित और सुरक्षित डेटाबेस के रूप में संकलित किया जाएगा। आयोजकों के अनुसार, जमा हुए सभी दस्तावेजों को जांचने, उनका वर्गीकरण करने और एक विस्तृत सूची तैयार करने में लगभग 10 से 20 दिन का समय लगेगा। पूरी सूची तैयार हो जाने के बाद, 1 दिसंबर से पंजीकृत उम्मीदवारों के साथ उनकी व्यक्तिगत प्राथमिकताओं और आवश्यकताओं के अनुसार संभावित जीवनसाथियों के विवरण साझा करने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। इससे प्रतिभागी अपनी पसंद, पारिवारिक पृष्ठभूमि और व्यक्तिगत अपेक्षाओं के अनुरूप संपर्क साध सकेंगे।

22 नवंबर के बाद प्रत्येक रविवार लग सकता है शिविर

इस पहले आयोजन को मिले भारी समर्थन और समाज की गहरी आवश्यकता को देखते हुए मंदिर प्रबंधन इस व्यवस्था को नियमित रूप देने पर विचार कर रहा है। नई रूपरेखा के अनुसार, 22 नवंबर के बाद से हर रविवार सुबह 7 बजे से 10 बजे तक इसी प्रकार का निशुल्क पंजीकरण शिविर आयोजित किए जाने की योजना बनाई जा रही है। मंदिर समिति के पदाधिकारियों का कहना है कि पारंपरिक धार्मिक पूजा-पाठ और अनुष्ठानों के साथ-साथ समाज सेवा के कार्यों को आगे बढ़ाना भी संस्थान का प्राथमिक कर्तव्य है। समिति पूर्व से ही जरूरतमंद मरीजों को चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने तथा आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को संबल देने का कार्य करती रही है। ऐसे परिवारों की भी आर्थिक मदद की जाती रही है जो वैवाहिक खर्च उठाने में असमर्थ होते हैं। इस आयोजन ने यह स्पष्ट कर दिया है कि जीवनसाथी की तलाश एक बड़ी सामाजिक चुनौती बन चुकी है, और समिति को आशा है कि इस तरह के प्रयासों को देखकर अन्य मंदिर तथा सामाजिक संगठन भी आगे आएंगे।

सवाल-जवाब

कोझिकोड के विवाह शिविर में कितने लोगों ने पंजीकरण कराया?
इस शिविर में लगभग 7000 लोग पहुंचे, जबकि आयोजकों ने केवल 1000 से 2000 लोगों के आने की संभावना जताई थी।
यह निशुल्क विवाह पंजीकरण शिविर कहां आयोजित किया गया था?
यह शिविर केरल के कोझिकोड जिले के करंथुर स्थित हरहारा महादेव मंदिर परिसर में आयोजित किया गया था।
पंजीकरण कराने वालों में पुरुषों और महिलाओं का अनुपात क्या था?
आयोजकों के अनुसार पंजीकरण कराने वालों में लगभग 80 प्रतिशत पुरुष थे, जिनमें 30 से 50 वर्ष के अविवाहित लोग भी शामिल थे।
आवेदकों को संभावित जीवनसाथियों की सूची कब से मिलनी शुरू होगी?
डेटाबेस तैयार करने में 10 से 20 दिन लगेंगे और 1 दिसंबर से पंजीकृत उम्मीदवारों के साथ विवरण साझा करना शुरू किया जाएगा।
क्या इस प्रकार के पंजीकरण शिविर भविष्य में भी आयोजित किए जाएंगे?
मंदिर समिति 22 नवंबर के बाद से प्रत्येक रविवार सुबह 7 बजे से 10 बजे तक इसी प्रकार का शिविर लगाने पर विचार कर रही है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 3

Karan Malhotra@karan-malhotra·17 मिनट पहले

सात हजार लोग पहुँच गए और अस्सी प्रतिशत सिर्फ़ पुरुष थे, तो क्या महिलाओं की संख्या इतनी कम क्यों रही?

Ravikash Gupta@ravikash·16 मिनट पहले

करण भाई, आपकी बात सही है। पर इतने सारे पुरुषों के मुकाबले असली लड़कियां थीं कहाँ, ये समझ नहीं आया।

Arjun Mehta@arjun-mehta·41 मिनट पहले

कल जब हाईवे पर इतनी लंबी लाइन देखी तो लगा कोई बड़ा प्रोटेस्ट चल रहा है। पास जाकर पता चला कि सब शादी के लिए कतार में हैं, सोचकर हैरानी हुई।

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