सरकारी नौकरी की चयन प्रक्रियाओं में शुचिता और योग्यता का सम्मान सबसे अहम माना जाता है, लेकिन जब संवैधानिक भर्ती संस्था की कार्यप्रणाली पर ही सवाल खड़े हो जाएं तो अभ्यर्थियों का विश्वास डगमगा जाता है। दक्षिण भारत के राज्य केरल से ऐसा ही एक बड़ा मामला सामने आया है, जहां केरल लोक सेवा आयोग की विभिन्न भर्ती परीक्षाओं में गंभीर अनियमितताओं की परतें खुल रही हैं। प्रश्न पत्रों में ऑनलाइन अध्ययन सामग्री की सीधी नकल से लेकर मूल्यांकन प्रणाली की तकनीकी खामियों और भाई-भतीजावाद के चलते पूरी चयन प्रक्रिया जांच के दायरे में आ गई है।
वेबसाइट्स से हूबहू उतारे गए 45 सवाल
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ा विवाद सहायक मोटर वाहन निरीक्षक पद के लिए आयोजित परीक्षा को लेकर खड़ा हुआ। जांच में सामने आया कि इस परीक्षा के 45 प्रश्न इंटरनेट पर उपलब्ध अध्ययन सामग्री से शब्द-दर-शब्द नकल करके तैयार किए गए थे। यह आरोप है कि सैनफाउंड्री और स्कैमवेदा जैसी वेबसाइट्स से सीधे प्रश्नों को उठाकर प्रश्न पत्र में शामिल कर लिया गया।
इसके साथ ही इस भर्ती में योग्यता के तय मानकों से छेड़छाड़ की बात भी उजागर हुई है। निर्धारित शारीरिक मापदंड पूरे न करने वाले कई अभ्यर्थियों को नियमों में बदलाव करके चयन प्रक्रिया में शामिल होने की छूट दी गई, जिससे उन योग्य उम्मीदवारों का अधिकार प्रभावित हुआ जिन्होंने सभी जरूरी शर्तें पूरी की थीं।
मत्स्य विभाग की चयन सूची में पक्षपात का मामला
अनियमितताओं की यह जांच केवल एक विभाग तक सीमित नहीं रही। मत्स्य विस्तार अधिकारी पद के लिए निकाली गई भर्ती में भी गंभीर गड़बड़ियों की पुष्टि अपराध शाखा की जांच में हुई है। यह रिक्तियां अगस्त 2020 में विज्ञापित की गई थीं और चयन सूची नवंबर 2022 में जारी की गई।
जांच के अनुसार केरल यूनिवर्सिटी ऑफ फिशरीज एंड ओसियन स्टडीज से जुड़े कुछ चुनिंदा अभ्यर्थियों को अनुचित तरीके से प्राथमिकता दी गई। इन अभ्यर्थियों को आयोग के अध्यक्ष तथा सत्ताधारी दल से जुड़े प्रभावशाली व्यक्तियों का नजदीकी बताया गया है, जिसके चलते योग्यता को दरकिनार कर पक्षपात करने के आरोप लगाए गए हैं।
ऑन स्क्रीन मार्किंग की चूक और मेरिट लिस्ट में भारी बदलाव
राज्य योजना बोर्ड के पदों के लिए हुई परीक्षा में ऑन स्क्रीन मार्किंग प्रणाली की तकनीकी लापरवाही ने प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मचा दिया। अर्थशास्त्र विषय के 10 वर्णनात्मक प्रश्नों के कुल 58 अंक संबंधित परीक्षकों तक सही तरीके से ट्रांसफर ही नहीं हुए। इस गंभीर तकनीकी विफलता के चलते उत्तर पुस्तिकाओं का पूरा मूल्यांकन किए बिना ही परीक्षा परिणाम जारी कर दिए गए।
जब इस विसंगति को लेकर औपचारिक शिकायत दर्ज कराई गई और उत्तर पुस्तिकाओं की पुनः जांच हुई, तो मेरिट सूची में अप्रत्याशित उलटफेर देखा गया। मूल परिणाम में तीसरे स्थान पर रहने वाले श्याम कृष्णा पहले पायदान पर पहुंच गए, जबकि पहली रैंक हासिल करने वाले अरुण जे प्रदीप खिसककर पांचवें स्थान पर आ गए। इस घटना ने डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली की विश्वसनीयता पर गहरे सवाल खड़े कर दिए।
अपराध शाखा की जांच और कई अन्य विभागों की भर्तियां घेरे में
केरल अपराध शाखा की विशेष जांच टीम ने इन मामलों में कानूनी शिकंजा कसते हुए कई अलग-अलग प्राथमिकी दर्ज की हैं। यह मुकदमे भारतीय न्याय संहिता और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत दर्ज किए गए हैं। जांच के सिलसिले में आयोग के अध्यक्ष एमआर बैजू और अन्य सदस्यों से विस्तृत पूछताछ की जा चुकी है, जबकि दो अधिकारियों को गिरफ्तार किया गया है।
विशेष जांच दल अब खादी बोर्ड और ग्राम तेल निरीक्षक के पदों पर हुई नियुक्तियों की फाइलों की भी छानबीन कर रहा है। इन दोनों विभागों में भी नियमों के उल्लंघन और अपनों को उपकृत करने के समान आरोप सामने आए हैं। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि भर्ती प्रणाली में यह खामियां महज प्रशासनिक लापरवाही थीं या फिर किसी सुनियोजित नेटवर्क का हिस्सा।
























