केरल में हाल की भारी बारिश और उससे हुए नुकसान के बाद यह सवाल जोर पकड़ रहा है कि आखिर मौसम की चेतावनी जारी करने का अधिकार किसके पास होता है। इस पर मंत्री अनिल कुमार ने साफ किया है कि आपदा प्रबंधन से जुड़े काम भले ही अलग-अलग एजेंसियां संभालती हों, लेकिन मौसम का आधिकारिक अलर्ट जारी करने का अधिकार राज्य सरकार के पास नहीं होता।
राज्य नहीं, सिर्फ केंद्र की एजेंसी को अधिकार
मंत्री अनिल कुमार के मुताबिक केरल सरकार का काम सिर्फ भारतीय मौसम विभाग यानी आईएमडी की चेतावनी को आगे बढ़ाना है। अगर पूर्वानुमान में देरी होती है या कोई कमी रह जाती है तो उसकी जिम्मेदारी सीधे आईएमडी की बनती है, राज्य सरकार की नहीं। देश भर में मौसम की सटीक और भरोसेमंद जानकारी देने के लिए आईएमडी को नोडल एजेंसी बनाया गया है, यानी मौसम से जुड़े हर बड़े फैसले और अलर्ट के पीछे यही एजेंसी होती है।
कानून में सिर्फ आईएमडी को ही अधिकार
आपदा प्रबंधन से जुड़े कानून के तहत आधिकारिक मौसम अलर्ट जारी करने का हक सिर्फ आईएमडी को दिया गया है। इसके पीछे मकसद यह है कि पूरे देश में मौसम की जानकारी को लेकर एक जैसी स्थिति बनी रहे। अगर हर राज्य अपने स्तर पर अलग अलग अलर्ट जारी करने लगे तो लोगों के बीच भ्रम फैलने का खतरा बढ़ जाएगा। यही वजह है कि राज्य सरकारें खुद अलर्ट जारी नहीं करतीं, बल्कि स्टेट डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी के जरिए केंद्र से मिले अलर्ट को अपने यहां लागू भर करती हैं।
बाढ़, सुनामी और हिमस्खलन के लिए अलग एजेंसियां
हालांकि हर तरह की आपदा के लिए आईएमडी अकेला काम नहीं करता। कुछ खास आपदाओं के लिए दूसरी सरकारी एजेंसियां भी सक्रिय रहती हैं। मसलन बाढ़ का पूर्वानुमान केंद्रीय जल आयोग यानी सीडब्ल्यूसी जारी करता है, जो देश की नदियों के जलस्तर पर लगातार नजर रखता है और खतरे की स्थिति में अलर्ट भेजता है। समुद्र से जुड़ी आपदाओं, जैसे सुनामी और समुद्री तूफान की जानकारी के लिए इनकोइस नाम की एजेंसी काम करती है, जो मछुआरों और तटरक्षक बल तक यह जानकारी पहुंचाती है। इसी तरह पहाड़ी इलाकों में हिमस्खलन यानी एवलांच का अलर्ट स्नो एंड एवलांच स्टडी एस्टेब्लिशमेंट जारी करता है। ये सभी एजेंसियां अपने अपने क्षेत्र में काम करती हैं, लेकिन बारिश, आंधी, लू और चक्रवात जैसी आम मौसमी घटनाओं का मुख्य अलर्ट आईएमडी ही जारी करता है।
प्राइवेट एजेंसियों के पास सिर्फ पूर्वानुमान का काम
आज के समय में स्काईमेट जैसी कई प्राइवेट वेदर कंपनियां भी मौसम का पूर्वानुमान देती हैं। ये कंपनियां अपनी तकनीक और डेटा एनालिसिस के दम पर मौसम से जुड़ी जानकारी लोगों तक पहुंचाती हैं, लेकिन इन्हें कानूनी तौर पर आधिकारिक अलर्ट जारी करने का अधिकार नहीं है। प्राइवेट एजेंसियां सिर्फ मौसम का पूर्वानुमान बता सकती हैं, वे जनता को किसी खतरे को लेकर आधिकारिक चेतावनी नहीं दे सकतीं। रेड, ऑरेंज और येलो अलर्ट जारी करने का पूरा अधिकार सिर्फ आईएमडी के पास सुरक्षित रखा गया है। इसके पीछे सोच यह है कि आपदा के वक्त लोग किसी तरह के पैनिक में न आएं। अगर एक साथ कई एजेंसियां अलग अलग तरह के अलर्ट देने लगेंगी तो प्रशासन के लिए राहत और बचाव का काम संभालना मुश्किल हो जाएगा। इसीलिए प्राइवेट एजेंसियों के आंकड़ों को सिर्फ रेफरेंस के तौर पर देखा जाता है, आधिकारिक फैसले हमेशा आईएमडी के अलर्ट पर ही आधारित होते हैं।
केरल में सबसे ज्यादा नुकसान, मंत्री ने गिनाई सफाई
केरल के पथानमथिट्टा, इडुक्की और कोट्टायम जिलों में हाल की आपदा से सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है। इसी पर बोलते हुए मंत्री अनिल कुमार ने कहा, “मौजूदा चेतावनी सिस्टम में सुधार की बहुत जरूरत है।” उन्होंने यह भी बताया कि प्रभावित इलाकों में रेस्क्यू और रिलीफ ऑपरेशन ठीक तरीके से चलाए जा रहे हैं। प्रशासन पर लापरवाही बरतने के जो आरोप लग रहे हैं, उन्हें उन्होंने पूरी तरह गलत बताया। मंत्री के मुताबिक प्रभावित इलाकों में समय रहते मदद पहुंचाई गई है और जहां भी किसी तरह की शिकायत मिली, वहां अधिकारियों ने फौरन एक्शन लिया है। सरकार का यह भी मानना है कि अगर आईएमडी का अलर्ट पहले मिल जाता तो नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता था। बेहतर और समय पर मिलने वाला पूर्वानुमान न सिर्फ प्रशासन बल्कि आम जनता को भी पहले से तैयारी करने का मौका देता है, जिससे जान माल का नुकसान घटाया जा सकता है।


















