राजस्थान में मानसून की विदाई से पहले मौसम का मिजाज एक बार फिर से बदल गया है और राज्य के तमाम हिस्सों में तेज बारिश का दौर शुरू हो चुका है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) की तरफ से जारी चेतावनियों के अनुसार, अगले कुछ दिनों तक प्रदेश के विभिन्न जिलों में झमाझम बारिश के साथ आंधी और तेज हवाएं चलने की पूरी संभावना बनी हुई है। मौसम विज्ञानियों का कहना है कि दक्षिण-पश्चिमी राजस्थान और उसके पास स्थित कच्छ क्षेत्र के ऊपर एक कम दबाव का क्षेत्र सक्रिय हो चुका है, जिसके असर से वातावरण में नमी बढ़ गई है और बादलों की आवाजाही तेज हो गई है। पिछले चौबीस घंटों के दौरान उदयपुर, कोटा, जोधपुर और अजमेर संभागों में व्यापक स्तर पर पानी बरसा है, जिसमें सर्वाधिक 88 मिलीमीटर बारिश का आंकड़ा उदयपुर के कोटड़ा इलाके में दर्ज किया गया है।
नया पश्चिमी विक्षोभ और मानसून का संयुक्त प्रभाव
आने वाली 16 और 17 तारीख को उत्तर-पश्चिमी भारत के ऊपर एक ताजा पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने की उम्मीद है, जो मानसून की धाराओं के साथ मिलकर राज्य के मौसम को पूरी तरह से प्रभावित करेगा। इस मौसमी हलचल के कारण पूर्वी राजस्थान के जयपुर, उदयपुर, अजमेर, कोटा और भरतपुर संभागों के अधिकांश इलाकों में अगले तीन से चार दिनों तक हल्की से मध्यम बौछारें पड़ने का सिलसिला लगातार जारी रहेगा। इस दौरान अचानक तेज हवाएं चलने और बादलों की तेज गर्जना के साथ वज्रपात की घटनाएं भी सामने आ सकती हैं, जिसे देखते हुए आम नागरिकों और विशेष रूप से किसानों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। हालांकि, पश्चिमी राजस्थान के इलाकों में 19 सितंबर के बाद से इस मूसलाधार पानी से राहत मिलने के आसार जताए गए हैं, क्योंकि उस समय तक मानसून की वापसी के लिए अनुकूल परिस्थितियां बनने लगेंगी।
जयपुर और उदयपुर संभाग का हाल
राजधानी जयपुर में आज सुबह से ही आसमान बादलों से घिरा हुआ है और मौसम विभाग ने यहाँ हल्की से मध्यम वर्षा होने की प्रबल संभावना जताई है। जयपुर मौसम केंद्र के मुताबिक शहर और आसपास के क्षेत्रों में मेघगर्जन के साथ 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से झकोरेदार हवाएं चल सकती हैं, इसलिए निवासियों को खराब मौसम के दौरान सुरक्षित जगहों पर रहने और जलभराव वाले रास्तों से बचने की सलाह दी गई है। दूसरी तरफ, झीलों के शहर उदयपुर में भी बादलों का डेरा बना हुआ है और कोटड़ा में हुई रिकॉर्ड 88 mm बारिश के बाद से ही जनजीवन प्रभावित हुआ है। यहाँ अगले कुछ दिनों तक रुक-रुक कर बौछारें गिरने का दौर चलता रहेगा, जिससे पहाड़ी इलाकों में जलस्तर अचानक बढ़ने का खतरा बना रह सकता है और पर्यटकों को नदी-नालों से दूर रहने की हिदायत दी गई है।
बीकानेर और शेखावाटी क्षेत्र में चेतावनी
पश्चिमी राजस्थान के बीकानेर संभाग में भी मौसम का मिजाज काफी उग्र रहने वाला है जहाँ 16 और 17 सितंबर को आने वाले पश्चिमी विक्षोभ का सीधा असर दिखाई देगा। बीकानेर, गंगानगर, हनुमानगढ़ और चूरू के जिलों में मेघगर्जन के साथ 30 से 40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की चेतावनी दी गई है, साथ ही मध्यम बारिश भी दर्ज की जा सकती है। किसानों के लिए यह वक्त अपनी कटी हुई या पककर तैयार फसलों को बचाने का है ताकि किसी भी तरह के नुकसान से बचा जा सके। इसके अलावा हाड़ौती के कोटा संभाग और सीकर तथा झुंझुनू वाले शेखावाटी क्षेत्र में भी येलो अलर्ट जारी कर दिया गया है, जहाँ तेज हवाओं और पानी के गिरने से उमस भरी गर्मी से लोगों को राहत मिलेगी और तापमान में गिरावट दर्ज की जाएगी।

















