ब्राजील के राष्ट्रपति चुनाव के दूसरे दौर के मतदान से पहले राजनीतिक पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। वामपंथी राष्ट्रपति लुईज इनासियो लूला दा सिल्वा और उनके दक्षिणपंथी प्रतिद्वंद्वी के बीच मुकाबला बेहद कड़ा हो गया है। चुनाव आयोग और अदालतों में दोनों पक्षों की ओर से लगातार शिकायतें दर्ज कराई जा रही हैं। इस चुनावी महासमर के बीच सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की भूमिका पर सबसे बड़ा सवालिया निशान लग गया है, जिससे देश की सियासत में भूचाल आ गया है।
मेटा पर चुनावी प्रक्रिया में दखल देने का गंभीर आरोप
बुधवार को देश के शीर्ष चुनावी न्यायालय में दायर एक याचिका में मौजूदा राष्ट्रपति लुईज इनासियो लूला दा सिल्वा के खेमे ने मेटा पर गंभीर आरोप लगाए। याचिका में कहा गया कि व्हाट्सएप, इंस्टाग्राम और फेसबुक की संचालन कंपनी मेटा ने जानबूझकर वामपंथी कंटेंट को सीमित किया ताकि उनके विरोधी कैंपेन को फायदा पहुंचाया जा सके। समर्थकों ने सैन पालो स्थित मेटा दफ्तर के बाहर प्रदर्शन भी किया और आरोप लगाया कि कंपनी ब्राजील की लोकतांत्रिक प्रक्रिया में अनुचित दखल दे रही है।
बोल्सनारो का पलटवार और अयोग्यता की मांग
इस याचिका के जवाब में विपक्षी खेमे की ओर से फ्लैवियो बोल्सनारो ने भी एक काउंटर याचिका दायर कर दी। फ्लैवियो बोल्सनारो ने अपने प्रतिद्वंद्वी लूला दा सिल्वा को अयोग्य ठहराने की मांग उठाई है। उनका आरोप है कि सरकारी मशीनरी और आधिकारिक डेटाबेस से लिए गए पर्सनल डेटा का इस्तेमाल करके व्हाट्सएप पर बड़े पैमाने पर मैसेज भेजे गए, जिससे सरकारी सामाजिक कार्यक्रमों का गलत राजनीतिक प्रचार हुआ। विपक्षी खेमे ने इसे राजनीतिक और आर्थिक ताकत का दुरुपयोग करार दिया है।
यूएन विशेषज्ञों की चेतावनी और तकनीकी बाधाएं
चुनाव में सोशल मीडिया के प्रभाव को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिंता जताई गई है। संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार विशेषज्ञों ने बुधवार को एक रिपोर्ट जारी कर कहा कि मेटा के प्लेटफॉर्म्स पर दोनों उम्मीदवारों की पहुंच में असमानता देखने को मिली है। रिपोर्ट में एक उम्मीदवार के अकाउंट में अस्थाई रुकावट और रीच में अंतर आने की बात कही गई है। इसके अलावा, आम यूजर्स ने यह भी शिकायत की कि मेटा के आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टूल्स लूला दा सिल्वा से जुड़ी तस्वीरें जनरेट नहीं कर रहे हैं।
कड़ा मुकाबला और आने वाला फैसला
ब्राजील के 159 मिलियन पंजीकृत मतदाता रविवार को होने वाले मतदान के लिए पूरी तरह तैयार हैं। पिछले दौर के चुनाव में दोनों के बीच कांटे की टक्कर रही थी और किसी को भी 50 प्रतिशत से अधिक वोट नहीं मिले थे। अब पूरे देश की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि चुनावी अदालत इन शिकायतों पर क्या फैसला लेती है और रविवार को मतदाता किसके सिर पर ताज सजाते हैं।



















