दक्षिण अमेरिकी देश पेरू के एक पर्वतीय जिले में हुए स्थानीय चुनाव के नतीजों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। एंडीज पर्वतमाला के दुर्गम इलाके में बसे क्वेरोपाल्का जिले के निकाय चुनाव में 45 वर्षीय नेता हिटलर मुसोलिनी शिमोन फ्लोरेस ने बेहद करीबी मुकाबले में जीत दर्ज कर मेयर पद हासिल किया है। एग्जिट पोल और चुनाव कार्यालय के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस छोटे से क्षेत्र में पड़े कुल मतों में से सर्वाधिक समर्थन हासिल करके उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी को पीछे छोड़ दिया। दो कुख्यात 20वीं सदी के यूरोपीय तानाशाहों के नाम पर रखा गया उनका नाम इस जीत के बाद चर्चा का सबसे बड़ा विषय बन गया है।
क्वेरोपाल्का में मतदान के आंकड़े और चुनावी परिणाम
पेरू के राष्ट्रीय चुनाव कार्यालय से सामने आए चुनावी विवरण के अनुसार, क्वेरोपाल्का जिले में आयोजित इस स्थानीय मतदान प्रक्रिया में कुल 700 से कुछ अधिक मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया था। इस सुदूर इलाके की कुल आबादी 1,000 से भी कम लोगों की है। चुनावी दौड़ में केंद्र-वामपंथी राजनीतिक दल अहोरा नासियों के उम्मीदवार के रूप में उतरे हिटलर मुसोलिनी शिमोन फ्लोरेस को कुल 229 मतदाताओं का समर्थन मिला। इस तरह उन्होंने कुल मतदान का लगभग 34 प्रतिशत हिस्सा अपने पक्ष में हासिल किया।
यह चुनावी मुकाबला बेहद कड़ा साबित हुआ। दक्षिणपंथी दल रेनोवासियों पोपुलर पेरू के उम्मीदवार दूसरे स्थान पर रहे। शिमोन फ्लोरेस ने अपने इस प्रतिद्वंद्वी को महज 25 वोटों के अंतर से हराकर जीत दर्ज की। बेहद कम अंतर से मिली इस जीत ने उन्हें इस छोटे से ग्रामीण समुदाय के प्रशासनिक प्रमुख की कुर्सी तक पहुंचा दिया है।
उम्मीदवार की पृष्ठभूमि और नाम को लेकर वैश्विक उत्सुकता
उम्मीदवार की आधिकारिक प्रोफाइल के मुताबिक, 45 वर्षीय शिमोन फ्लोरेस का जन्म इसी पर्वतीय जिले में हुआ था। क्वेरोपाल्का जिला मध्य हुआनुको विभाग के अंतर्गत आता है और यह इलाका पेरू की राजधानी लीमा से करीब 360 किलोमीटर यानी लगभग 224 मील की दूरी पर स्थित है। भौगोलिक रूप से बेहद शांत और अलग-थलग माने जाने वाले इस क्षेत्र का चुनावी नतीजा केवल स्थानीय विकास के मुद्दों की वजह से नहीं, बल्कि विजेता के असामान्य नाम की वजह से सीमाओं के पार तक फैल गया।
उनका पहला और दूसरा नाम सीधे तौर पर 20वीं सदी के यूरोपीय अधिनायकवादी शासकों एडॉल्फ हिटलर और बेनिटो मुसोलिनी से मेल खाता है। इतिहास के इन दो कुख्यात चेहरों का नाम एक साथ जुड़े होने के कारण उनके चुनावी अभियान को एक बेहद असामान्य और ध्यान खींचने वाली राजनीतिक घटना माना जा रहा था। स्थानीय मीडिया के अनुसार, 1,000 से कम निवासियों का प्रतिनिधित्व करने वाले इस छोटे से पद के लिए हुए मतदान ने अपने नाम की विचित्रता के कारण जरूरत से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय सुर्खियां बटोरी हैं।
पेरू की स्थानीय राजनीति में असामान्य नामों का इतिहास
पेरू की राजनीति में किसी प्रमुख वैश्विक ऐतिहासिक हस्ती के नाम पर चुनाव लड़ने और जीतने का यह पहला मामला नहीं है। लातिन अमेरिकी देश में इस तरह के अनोखे नाम रखने की पुरानी परंपरा रही है। इससे पहले साल 2018 में भी ऐसा ही एक रोचक राजनीतिक मुकाबला देखने को मिला था, जब युंगार जिले में हिटलर ग्वेस्क्लिन अल्बा सांचेज मेयर चुने गए थे।
साल 2018 के उस चुनाव में हिटलर अल्बा सांचेज ने अपने प्रतिद्वंद्वी लेनिन व्लादिमीर रोड्रिग्ज वालवर्दे को चुनावी मैदान में शिकस्त दी थी। उस दौरान अल्बा सांचेज ने मतदाताओं के बीच प्रचार करते हुए बाकायदा यह नारा दिया था कि वह अच्छे हिटलर हैं। उस ऐतिहासिक वाकये के कुछ ही सालों बाद, अब क्वेरोपाल्का में हिटलर मुसोलिनी शिमोन फ्लोरेस की जीत ने एक बार फिर स्थानीय राजनीति के इस अनोखे पहलू को सामने ला दिया है।



















