दक्षिण अमेरिका के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच कूटनीतिक कड़वाहट उस समय सतह पर आ गई, जब ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज़ इनासियो लूला डा सिल्वा ने पुष्टि की कि अमेरिकी सरकार के दो अधिकारियों को प्रवेश वीजा देने से औपचारिक रूप से इनकार कर दिया गया है। राष्ट्रपति प्रशासन को संदेह था कि यह राजनयिक दौरा आगामी अक्टूबर में होने जा रहे आम चुनावों के नतीजों को प्रभावित करने के मकसद से तैयार किया गया था। बुधवार को इस विषय पर बोलते हुए राष्ट्रपति लूला डा सिल्वा ने विदेशी हस्तक्षेप के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया और स्पष्ट किया कि देश की लोकतांत्रिक प्रक्रिया में संप्रभुता को हर हाल में अक्षुण्ण रखा जाएगा। लूला ने कहा, "हमें ब्राजील के चुनावों में दखल देने के लिए भेजे जा रहे दो युवाओं को वीजा देने से इनकार करना पड़ा।"
दखलअंदाजी के अंदेशे पर अमेरिकी राजनयिकों का वीजा खारिज
यह पूरा विवाद अमेरिकी स्टेट डिपार्टमेंट के दो वरिष्ठ अधिकारियों से जुड़ा हुआ है, जिनकी पहचान लोकतंत्र, मानवाधिकार और श्रम मामलों के सहायक सचिव राइली एम बार्न्स और उसी विभाग के उप सहायक सचिव सैमुअल सैमसन के रूप में हुई है। दोनों राजनयिकों की जुलाई के अंत में ब्राजील यात्रा प्रस्तावित थी, जिसका आधिकारिक उद्देश्य अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, धार्मिक स्वतंत्रता और चुनाव निष्पक्षता जैसे विषयों पर संवाद करना बताया गया था। अपनी यात्रा के दौरान वे दक्षिणपंथी राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार फ्लावियो बोलसोनारो से भी मुलाकात करने वाले थे। हालांकि, ब्राजील सरकार ने उनकी वीजा अर्जी खारिज कर दी और चिंता जताई कि इस दौरे का इस्तेमाल चुनावी प्रणाली पर बेबुनियाद सवाल उठाने के लिए किया जा सकता है। वहीं, दूसरी तरफ अमेरिकी स्टेट डिपार्टमेंट ने चुनावों में हस्तक्षेप की किसी भी बात को पूरी तरह खारिज करते हुए ऐसे दावों को एक बेबुनियाद झूठ करार दिया है।
अक्टूबर चुनाव की सियासी जंग और बोलसोनारो परिवार का इतिहास
ब्राजील का आगामी अक्टूबर चुनाव बेहद प्रतिस्पर्धी और निर्णायक साबित होने वाला है। इस चुनाव में 80 वर्ष के मौजूदा वामपंथी राष्ट्रपति लुइज़ इनासियो लूला डा सिल्वा का मुकाबला दक्षिणपंथी उम्मीदवार फ्लावियो बोलसोनारो से है। फ्लावियो ब्राजील के पूर्व राष्ट्रपति जायर बोलसोनारो के बेटे हैं। जायर बोलसोनारो को पिछला चुनाव हारने के बाद सैन्य तख्तापलट की साजिश रचने के दोष में 27 वर्ष की जेल की सजा सुनाई जा चुकी है। बीते वर्ष तख्तापलट मामले में दोषी ठहराए जाने से पहले ही जायर बोलसोनारो को सार्वजनिक पद की दौड़ से अयोग्य घोषित कर दिया गया था, क्योंकि उन्होंने 2018 के विजयी अभियान और 2022 के चुनाव अभियान के दौरान बार-बार इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों में गड़बड़ी के निराधार दावे किए थे। उन्होंने एक अवसर पर विदेशी राजनयिकों की बैठक में भी चुनावी प्रणाली की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए थे। चुनाव में पराजय के बाद उनके समर्थकों ने 8 जनवरी 2023 को ब्राजील के सुप्रीम कोर्ट, कांग्रेस और राष्ट्रपति भवन पर हिंसक हमला कर दिया था, जिसे अमेरिका की 6 जनवरी की कैपिटल हिल हिंसा जैसी घटना माना जाता है।
वोटिंग मशीन पर बयानबाजी और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाएं
हाल के हफ्तों में यह कूटनीतिक तनाव उस समय और बढ़ गया, जब फ्लावियो बोलसोनारो ने विदेशी राजनयिकों के साथ एक बैठक बुलाई। फ्लावियो को अर्जेंटीना के राष्ट्रपति जेवियर माइली और इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का समर्थन हासिल है। इस बैठक में फ्लावियो ने दावा किया कि ब्राजील की वोटिंग मशीनों का स्रोत वेनेजुएला जैसा ही है और उन्होंने उस देश में चुनावी धोखाधड़ी से जुड़ी सीआईए रिपोर्ट का हवाला दिया। हालांकि, बाद में फ्लावियो ने सफाई देते हुए कहा कि वे प्रणाली की सुरक्षा पर सवाल नहीं उठा रहे थे, बल्कि अधिक से अधिक अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों की मौजूदगी चाहते थे। लेकिन ब्राजील सरकार ने इस तरह के वक्तव्यों को चुनाव प्रक्रिया में अविश्वास पैदा करने की कोशिश माना और अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल को वीजा देने से रोक दिया।
ब्राजील के इलेक्ट्रॉनिक मतदान तंत्र की सुरक्षा विशेषताएं
इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों में कमियों के दावों को ब्राजील के सुपीरियर इलेक्टोरल कोर्ट ने पूरी तरह से खारिज कर दिया है। ब्राजील में 1996 से इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग प्रणाली का लगातार उपयोग किया जा रहा है और इस दौरान संस्थागत धोखाधड़ी की एक भी घटना दर्ज नहीं की गई है। साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ ब्राजील की मतदान प्रणाली को दुनिया के सबसे सुरक्षित और मजबूत मॉडलों में से एक मानते हैं। इसमें मतदाताओं की पहचान की जांच बायोमेट्रिक फिंगरप्रिंट के माध्यम से की जाती है, ताकि फर्जी मतदान या दोहरा पंजीकरण रोका जा सके। इसके अलावा, प्रत्येक मशीन अपने कुल वोटों का एक कागजी पर्चा भी प्रिंट करती है और उसे प्रदर्शित करती है, जिससे स्वतंत्र लेखा परीक्षक इलेक्ट्रॉनिक परिणामों का मिलान कर सकते हैं। चुनाव प्रक्रिया शुरू होने से पहले विशेषज्ञों को वोटिंग तंत्र को हैक करने या खामियां ढूंढने का अवसर दिया जाता है ताकि जनता का विश्वास कायम रहे।















