न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में अंतरराष्ट्रीय समुदाय को संबोधित करते हुए वेनेजुएला की अंतरिम राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज ने घोषणा की है कि उनके देश में लोकतांत्रिक व्यवस्था को पूरी तरह बहाल करने के लिए आम चुनाव कराए जाएंगे। हालांकि अपने इस अहम संबोधन के दौरान उन्होंने मतदान के लिए किसी निश्चित समय सीमा अथवा तारीख का कोई भी उल्लेख नहीं किया। उनका यह रुख ऐसे समय में सामने आया है जब देश का मुख्य विपक्षी खेमा चुनावी प्रक्रिया को लेकर लगातार अनिर्णय की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है और अंतरिम प्रशासन से अविलंब एक स्पष्ट समय सारणी घोषित करने की मांग कर रहा है।
डेल्सी रोड्रिगेज को वेनेजुएला की सत्ता संभाले हुए कुछ ही महीने बीते हैं। उनसे पहले राष्ट्रपति पद पर आसीन रहे निकोलस मादुरो को अमेरिकी सैन्य बलों द्वारा चलाए गए एक गुप्त और आक्रामक अभियान के तहत बंदी बना लिया गया था। अमेरिकी सेना मादुरो को सीधे न्यूयॉर्क ले गई थी, जहां उन पर अंतरराष्ट्रीय नशीले पदार्थों की तस्करी से जुड़े गंभीर आपराधिक आरोपों में मुकदमा शुरू किया गया है। निकोलस मादुरो के लंबे शासनकाल में उपराष्ट्रपति की भूमिका निभाने वाली रोड्रिगेज ने उनके सत्ता से हटने के महज कुछ ही दिनों बाद नए अंतरिम प्रमुख के रूप में शपथ ग्रहण कर ली थी।
संयुक्त राष्ट्र के मंच से कूटनीतिक संदेश
संयुक्त राष्ट्र महासभा के वार्षिक सत्र में मंगलवार को अपने भाषण के दौरान अंतरिम राष्ट्रपति ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वेनेजुएला में निश्चित तौर पर निष्पक्ष चुनाव आयोजित किए जाएंगे। उन्होंने रेखांकित किया कि मतदान कराने का सबसे उपयुक्त और सही समय देश की जनता खुद तय करेगी। यह एक बेहद उल्लेखनीय बदलाव था कि पूर्ववर्ती राष्ट्रपति के साथ बेहद नजदीकी राजनीतिक संबंध रखने और अमेरिकी कार्रवाई तक उनकी सरकार में दूसरे सबसे ताकतवर पद पर रहने के बावजूद, रोड्रिगेज ने अपने पूरे भाषण में एक बार भी जेल में बंद पूर्व नेता का नाम नहीं लिया।
राजधानी कराकस में अमेरिकी विशेष बलों की छापेमारी को अभी नौ महीने से भी कम समय हुआ है। उस खूनी सैन्य कार्रवाई में राष्ट्रपति भवन से निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को पकड़ लिया गया था, जबकि भीषण संघर्ष के दौरान लगभग 100 लोगों की जान चली गई थी। इस गहरे आघात और खूनी इतिहास के बावजूद अंतरिम राष्ट्रपति के सुर संयुक्त राष्ट्र में पूरी तरह बदले हुए नजर आए। उन्होंने अपने पुराने नेतृत्व की गिरफ्तारी पर नाराजगी जताने के बजाय अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि वाशिंगटन ने जिस तरह कूटनीतिक रिश्तों और आपसी सहयोग का मार्ग चुना है, वह बेहद सराहनीय कदम है।
वाशिंगटन के साथ ऐतिहासिक तेल समझौता
रोड्रिगेज ने अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों को बताया कि वेनेजुएला का वर्तमान अंतरिम प्रशासन और डोनाल्ड ट्रंप की सरकार दोनों देशों के बीच मौजूद पुराने मतभेदों को गंभीर बातचीत के माध्यम से सुलझाने में जुटी हुई है। उनके अनुसार दोनों देश अब ऊर्जा संबंधों को मजबूत करने, राष्ट्रीय व क्षेत्रीय सुरक्षा को बढ़ावा देने, अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध के खिलाफ संयुक्त मोर्चा बनाने और आर्थिक साझेदारी का नया रास्ता तैयार करने पर पूरी गंभीरता से काम कर रहे हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस नए कूटनीतिक समन्वय से न केवल दोनों देशों की जनता को बल्कि पूरे लातिन अमेरिकी महाद्वीप को सीधा लाभ पहुंचेगा।
दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के अपने संबोधन में पूर्व राष्ट्रपति को लेकर बेहद कड़े और आक्रामक शब्दों का प्रयोग किया। ट्रंप ने निकोलस मादुरो को सीधे तौर पर एक गैरकानूनी तानाशाह और वास्तविक अपराधी करार दिया। इसके साथ ही अमेरिकी राष्ट्रपति ने वेनेजुएला की अंतरिम सरकार के साथ हस्ताक्षरित एक विशाल तेल समझौते पर सार्वजनिक रूप से प्रसन्नता व्यक्त की। ट्रंप ने इसे इतिहास का सबसे बड़ा तेल सौदा बताया, जो 65 अरब बैरल कच्चे तेल के विशाल भंडार को कवर करता है।
भूराजनीतिक समीकरण और अमेरिकी रुख
इस बड़े समझौते की घोषणा करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति ने ऐतिहासिक कहावत का हवाला देते हुए कहा कि जो विजेता होता है, संसाधनों और लाभ पर उसी का अधिकार होता है। इसके साथ ही उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि कभी आवश्यकता पड़ी, तो संयुक्त राज्य अमेरिका अपने अनिवार्य राष्ट्रीय हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अपनी अद्वितीय सैन्य ताकत का पूरा इस्तेमाल करने से पीछे नहीं हटेगा। यद्यपि ट्रंप ने महासभा में अपने मुख्य भाषण में चुनावी समय सारणी का कोई सीधा जिक्र नहीं किया, लेकिन इस महीने की शुरुआत में एलए टाइम्स के साथ बातचीत में उन्होंने साफ कहा था कि उनके विचार में वेनेजुएला अभी आम चुनाव कराने के लिए पूरी तरह तैयार नहीं है।
मंगलवार को ही संयुक्त राष्ट्र महासभा की आधिकारिक बैठकों से इतर दोनों नेताओं के बीच एक संक्षिप्त द्विपक्षीय मुलाकात भी हुई। इस बैठक में मौजूद अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने बाद में संवाददाताओं को पुष्टि की कि दोनों पक्षों ने देश में चुनाव कराने के विषय पर सीधी चर्चा की है। हालांकि रुबियो ने भी वेनेजुएला के विपक्षी नेताओं को जल्दबाजी न करने और धैर्य रखने का स्पष्ट परामर्श दिया।
संस्थागत ढांचे का पुनर्निर्माण और विपक्ष का असंतोष
विदेश मंत्री मार्को रुबियो का तर्क था कि निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव कराने से पहले देश की बुनियादी संस्थाओं को दोबारा खड़ा करने के लिए एक व्यवस्थित राजनीतिक संक्रमण प्रक्रिया का होना अनिवार्य है। रुबियो ने इस बात पर विशेष बल दिया कि यदि संस्थागत सुधारों के बिना आनन-फानन में चुनाव करा दिए गए, तो जो भी नया नेता चुना जाएगा, उसे केवल एक आर्थिक और सामाजिक तबाही विरासत में मिलेगी। उन्होंने अंतरिम प्रशासन और विपक्ष के कुछ चुनिंदा गुटों के बीच चल रही वार्ताओं का हवाला देते हुए इसे सकारात्मक प्रगति का संकेत बताया।
लेकिन कराकस के राजनीतिक गलियारों और निर्वासित विपक्षी हलकों में इस स्थिति को लेकर गहरा रोष व्याप्त है। विपक्ष के प्रमुख नेताओं ने रोड्रिगेज की इस बात के लिए तीखी आलोचना की है कि उन्होंने संयुक्त राष्ट्र के मंच से भी मतदान के लिए कोई संभावित तारीख तक तय नहीं की। इसके अलावा वार्ता प्रक्रिया पर सवाल उठाने वाले विश्लेषकों का कहना है कि वेनेजुएला की सबसे प्रमुख विपक्षी हस्ती मारिया कोरीना मचाडो को इन सभी वार्ताओं से पूरी तरह बाहर रखा गया है।
मारिया कोरीना मचाडो पिछले साल दिसंबर में ओस्लो में नोबेल शांति पुरस्कार ग्रहण करने के लिए देश से बाहर गई थीं, जिसके बाद से वह स्वदेश नहीं लौट सकी हैं। उनके एक राजनीतिक सलाहकार ने जानकारी दी है कि उन्होंने इसी सप्ताह तीन बार अपनी मातृभूमि में प्रवेश करने का गंभीर प्रयास किया, लेकिन उनके तीनों प्रयासों को पूरी तरह विफल कर दिया गया। मादुरो शासनकाल के दौरान मचाडो पर सार्वजनिक पद संभालने पर जो प्रतिबंध लगाया गया था, वह आज भी प्रभावी है। इसके अतिरिक्त वेनेजुएला के गृह मंत्री डियोसडाडो कैबेलो पूर्व में सार्वजनिक रूप से चेतावनी दे चुके हैं कि यदि मचाडो वापस लौटने की कोशिश करती हैं, तो सुरक्षा अधिकारी उनके लिए एक बहुत बड़ा सरप्राइज तैयार रखेंगे। न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र भाषण से पहले भी रोड्रिगेज के विरोधियों ने सड़कों पर उतरकर व्यापक प्रदर्शन किया और लोकतांत्रिक अधिकारों की तुरंत बहाली की मांग उठाई।



















