यदि आप राजस्थान के प्रसिद्ध शहर अजमेर जाने का विचार बना रहे हैं, तो अपनी यात्रा सूची में ज्ञानोदय तीर्थ नारेली को जरूर जगह दें। यह पवित्र जैन मंदिर मुख्य शहर से लगभग 8 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है और आस्था के साथ-साथ प्राकृतिक खूबसूरती का एक बेहतरीन मेल पेश करता है। अरावली पर्वतमाला की हरी-भरी तलहटी में बसा यह धार्मिक स्थल खासतौर पर बरसात के मौसम और उसके बाद देखने लायक होता है।
भव्य वास्तुकला और गुलाबी पत्थरों की नक्काशी
नारेली जैन मंदिर दिगंबर जैन समाज के अनुयायियों के लिए एक अत्यंत पवित्र स्थान माना जाता है। यह भव्य परिसर अपनी शानदार वास्तुकला और गुलाबी बलुआ पत्थरों पर की गई बारीक कारीगरी के लिए दुनिया भर में मशहूर है। इसके निर्माण में प्राचीन भारतीय मंदिर शैली और आधुनिक इंजीनियरिंग का अनूठा संगम देखने को मिलता है। मुख्य मंदिर के पीछे की पहाड़ियों पर सभी 24 तीर्थंकरों को समर्पित छोटे-छोटे जिनालय बनाए गए हैं। जब श्रद्धालु सीढ़ियों से ऊपर इन मंदिरों तक चढ़ते हैं, तो वहां से पूरे धार्मिक परिसर का बेहद भव्य और विस्तृत दृश्य दिखाई देता है।
मानसून के दिनों में कुदरती खूबसूरती
इस पूरे मंदिर परिसर में चारों तरफ बेहद करीने से सजे हुए हरे-भरे बगीचे और लॉन बनाए गए हैं। बरसात के दिनों में पानी बरसने के बाद आसपास की पथरीली पहाड़ियां पूरी तरह से हरियाली की चादर से ढक जाती हैं। ऊंचाई पर बने इन मंदिरों से दूर तक फैले प्राकृतिक नजारों को निहारना हर पर्यटक और श्रद्धालु के लिए एक बेहद सुकून भरा और कभी न भूलने वाला अनुभव साबित होता है.
आसानी से ऐसे पहुंचें नारेली तीर्थ
अगर आप इस खूबसूरत जगह की यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो यह अजमेर शहर से महज 8 किलोमीटर की दूरी पर स्थापित है। शहर के किसी भी हिस्से या आसपास के इलाकों से यहां आने के लिए ऑटो रिक्शा और टैक्सी बहुत आसानी से मिल जाती हैं। सड़क मार्ग के जरिए इस स्थान तक पहुंचना बेहद सुगम है। इसके अलावा ट्रेन से आने वाले यात्रियों के लिए सबसे पास अजमेर रेलवे स्टेशन पड़ता है, जबकि हवाई जहाज से सफर करने वालों के लिए किशनगढ़ हवाई अड्डा सबसे नज़दीकी विकल्प है।



















