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बागेश्वर के कलमी आमों को घर पर ऐसे करें नेचुरली तैयार, बिना केमिकल के मिलेगा जबरदस्त स्वादजीवनशैली
9 अग॰ 2026, 6:15 pm (10 घंटे पहले)· 0

बागेश्वर के कलमी आमों को घर पर ऐसे करें नेचुरली तैयार, बिना केमिकल के मिलेगा जबरदस्त स्वाद

उत्तराखंड के बागेश्वर क्षेत्र में मशहूर कलमी आमों को बिना किसी हानिकारक केमिकल के घर पर ही सुरक्षित तरीके से पकाने के आसान और असरदार नुस्खे जानिए।

बागेश्वर समेत उत्तराखंड के तमाम हिस्सों में अपनी अनोखी मिठास और भीनी खुशबू के लिए अपनी एक अलग पहचान रखने वाले कलमी आमों का लुत्फ उठाना हर किसी को पसंद होता है। बाजार में कई बार मुनाफा कमाने के चक्कर में कारोबारियों द्वारा कैल्शियम कार्बाइड जैसे खतरनाक रसायनों का इस्तेमाल करके फलों को जल्दी पका दिया जाता है, जो सेहत के लिहाज से बहुत नुकसानदेह साबित हो सकते हैं। इसके विपरीत, अगर इन फलों को पूरी तरह प्राकृतिक तरीकों से तैयार किया जाए तो इनका असली रंग, लाजवाब स्वाद और सोंधी खुशबू बरकरार रहती है और इनमें मौजूद सभी जरूरी पोषक तत्व भी पूरी तरह सुरक्षित रहते हैं। थोड़ी सी सावधानी और सही जानकारी अपनाकर कोई भी व्यक्ति अपने घर पर बिना किसी अतिरिक्त खर्च के इन स्वादिष्ट फलों को आसानी से पका सकता है, जिससे परिवार के सभी सदस्यों को पूरी तरह शुद्ध और सुरक्षित खाद्य पदार्थ खाने को मिलते हैं।

सबसे पहले बाजार से लाए गए कच्चे कलमी आमों को साफ पानी से अच्छी तरह धोना बहुत जरूरी होता है ताकि उन पर जमी धूल, मिट्टी और बाहरी गंदगी पूरी तरह साफ हो जाए। धुलाई के बाद एक साफ सूती कपड़े की मदद से इन फलों को पूरी तरह सुखाना आवश्यक है क्योंकि सतह पर जरा भी नमी रहने से उन पर फफूंद लगने का खतरा काफी बढ़ जाता है। इसलिए हमेशा यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि भंडारण से पहले आम पूरी तरह सूख चुके हों, क्योंकि साफ और सूखे फल ही एक समान गति से पकते हैं। यदि किसी फल की सतह पर कोई चोट का निशान या शुरुआती सड़न दिखाई दे, तो उसे तुरंत अलग कर देना चाहिए ताकि वह दूसरे स्वस्थ फलों को खराब न कर सके।

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इन फलों को प्राकृतिक रूप से पकाने की प्रक्रिया में हर एक आम को अलग-अलग अखबार में लपेटना सबसे पुराना और कारगर तरीका माना गया है। ऐसा करने से फलों के भीतर से जो प्राकृतिक एथिलीन गैस निकलती है, वह बाहर नहीं जा पाती और वही गैस पकने की पूरी प्रक्रिया को तेज कर देती है, जिससे सभी फल लगभग एक समान रूप से तैयार होते हैं। अखबार में लपेटते समय इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए कि उन्हें बहुत ज्यादा कसकर न बांधा जाए बल्कि हल्का सा लपेटना ही काफी होता है, और यदि अखबार हाथ में न हो तो किसी भी साफ कागज का इस्तेमाल किया जा सकता है, जिससे फलों की मूल गुणवत्ता और स्वाद पर कोई आंच नहीं आती।

कागज में अच्छी तरह लपेटने के बाद इन फलों को सुरक्षित रखने के लिए गत्ते के डिब्बों, बांस की टोकरियों या फिर गेहूं तथा चावल से भरे बड़े ड्रमों का उपयोग किया जा सकता है, जिनके ऊपर से कोई सूती कपड़ा या अखबार ढक देना तापमान को संतुलित बनाए रखने में मदद करता है। इन बक्सों या बर्तनों को हमेशा सामान्य कमरे के तापमान पर ही रखना चाहिए और इन्हें गलती से भी फ्रिज, एयर कंडीशनर वाले कमरों या अत्यधिक ठंडी जगहों पर नहीं रखना चाहिए क्योंकि ठंडक के कारण पकने की प्रक्रिया काफी धीमी पड़ जाती है। इसी तरह इन्हें तेज धूप में छोड़ देने से फल जल्दी खराब भी हो सकते हैं, और सामान्य कमरे के तापमान पर रखने पर आमतौर पर तीन से पांच दिनों के भीतर बेहतरीन नतीजे सामने आ जाते हैं।

इस पूरी प्रक्रिया के दौरान स्थानीय स्तर पर जानकारी रखने वाली अनीता टम्टा का सुझाव है कि आमों को एक बार बक्से में रखकर पूरी तरह निश्चिंत नहीं हो जाना चाहिए बल्कि हर दूसरे या तीसरे दिन उनकी नियमित रूप से निगरानी करते रहना चाहिए। जो फल हल्के पीले पड़ने लगें और हाथों से दबाने पर थोड़े नरम महसूस होने लगें, उन्हें तुरंत उस बक्से से बाहर निकाल लेना चाहिए और पूरी तरह तैयार हो जाने के बाद उन्हें ज्यादा दिनों तक किसी बंद डिब्बे के अंदर नहीं छोड़ना चाहिए। यदि बीच में कोई फल खराब या सड़ा हुआ नजर आए तो उसे बिना देर किए हटा देना बहुत जरूरी होता है ताकि बाकी बचे हुए सुरक्षित फल भी सही सलामत पक सकें, और समय पर जांच करते रहने से सारे फल सही अवस्था में तैयार होते हैं।

आजकल बाजार में कम समय में अधिक मुनाफा कमाने की होड़ में कैल्शियम कार्बाइड जैसे रसायनों के जरिए फलों को कृत्रिम रूप से पकाने का चलन बढ़ गया है, जिसकी वजह से ऐसे फल बाहर से तो चमकदार और पीले नजर आते हैं लेकिन अंदर से पूरी तरह कच्चे और बेस्वाद रह जाते हैं। इन रासायनिक रूप से तैयार फलों में न तो वह प्राकृतिक मिठास होती है और न ही वैसी सोंधी खुशबू पाई जाती है, और लंबे समय तक ऐसे पदार्थों का सेवन मानव स्वास्थ्य के लिए गंभीर समस्याओं का कारण बन सकता है। यही वजह है कि विशेषज्ञ हमेशा यही सलाह देते हैं कि या तो प्राकृतिक रूप से पके हुए फल ही खरीदे जाएं या फिर घर पर ही सुरक्षित तरीके से उन्हें पकाया जाए ताकि स्वाद के साथ-साथ सेहत से भी कोई खिलवाड़ न हो।

एक सही और प्राकृतिक तरीके से पका हुआ कलमी आम अपनी पहचान हल्के पीले या सुनहरे रंग तथा अपनी अनूठी प्राकृतिक महक से दे देता है, जिसे हाथ से हल्का सा दबाने पर वह अंदर से थोड़ा मुलायम महसूस होता है। यदि कोई फल हाथ लगाने पर बहुत ज्यादा सख्त महसूस हो तो इसका मतलब है कि वह अभी भी कच्चा है, और यदि वह जरूरत से ज्यादा दब जाए तो वह जरूरत से ज्यादा पक चुका हो सकता है। ऐसे पूरी तरह तैयार फलों को बक्से से निकालकर सामान्य तापमान पर एक या दो दिन और रखा जा सकता है, या फिर उनकी ताजगी को कुछ दिनों तक और बनाए रखने के लिए उन्हें फ्रिज के अंदर भी सुरक्षित रखा जा सकता है।

केमिकल रहित प्राकृतिक विधियों से तैयार किए गए कलमी आम केवल खाने में ही बेहद स्वादिष्ट नहीं होते बल्कि हमारे शरीर के स्वास्थ्य के लिए भी अनमोल माने जाते हैं क्योंकि इनमें प्रचुर मात्रा में विटामिन ए, विटामिन सी, डाइटरी फाइबर और कई महत्वपूर्ण एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने का काम करते हैं। गर्मियों के मौसम में सीमित मात्रा में इन फलों का सेवन करने से शरीर को भरपूर ऊर्जा मिलती है और जब फल प्रकृति के नियमों के अनुसार पकते हैं तो उनका गूदा ज्यादा रसीला और मिठास से भरपूर होता है, इसलिए थोड़ा सा संयम रखकर हमेशा बिना किसी हानिकारक रसायन के पकाए गए फलों का ही चुनाव करना चाहिए।

सवाल-जवाब

कच्चे कलमी आमों को घर पर प्राकृतिक रूप से कैसे पकाया जा सकता है?
कच्चे आमों को धोने और सुखाने के बाद अलग-अलग अखबार में लपेटकर गत्ते के डिब्बे या अनाज के ड्रम में सामान्य तापमान पर रखना चाहिए।
आमों को अखबार में लपेटने से क्या फायदा होता है?
अखबार में लपेटने से फलों से निकलने वाली प्राकृतिक एथिलीन गैस बाहर नहीं जाती, जिससे पकने की प्रक्रिया तेज होती है और सभी आम एक समान पकते हैं।
कैल्शियम कार्बाइड से पके आम स्वास्थ्य के लिए क्यों हानिकारक माने जाते हैं?
ऐसे रासायनिक फल बाहर से पीले दिखते हैं लेकिन अंदर से कच्चे और कम खुशबू वाले होते हैं, जिनका लंबा सेवन सेहत को नुकसान पहुंचा सकता है।
पके हुए कलमी आमों की पहचान कैसे की जाती है?
पके हुए आम हल्के पीले या सुनहरे रंग के होते हैं, उनमें प्राकृतिक खुशबू आती है और हाथ से दबाने पर वे थोड़े नरम महसूस होते हैं।
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