चीन के पूर्वी हिस्से में रहने वाली एक बुजुर्ग महिला इन दिनों अपनी असाधारण जीवनशैली के कारण काफी चर्चा में आ गई हैं। वांग गाइयिंग नाम की इन महिला की उम्र 111 साल हो चुकी है और वह जियांग्सू प्रांत के रुगाओ शहर में अपने परिवार के साथ निवास करती हैं। उनका जीवन यह साबित करता है कि लंबी आयु पाने के लिए किसी एक रहस्य की जरूरत नहीं होती, बल्कि रोजमर्रा की छोटी-छोटी आदतें जैसे कि एक्टिव रहना, सही खान-पान, पूरी नींद लेना और तनाव से दूर रहना अहम भूमिका निभाते हैं। जिस शहर में वांग रहती हैं, उसे लंबी उम्र वाले लोगों के गढ़ के रूप में जाना जाता है जहां बड़ी संख्या में लोग सदी का सफर पार कर चुके हैं।
रुगाओ शहर की विशेषता और वैज्ञानिक अध्ययन
स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस साल फरवरी के आंकड़े बताते हैं कि रुगाओ शहर में 100 साल या उससे अधिक आयु के कुल 672 लोग मौजूद हैं। इस क्षेत्र के लोगों की लंबी उम्र ने वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं का भी ध्यान अपनी ओर खींचा है। चीनी विज्ञान एकेडमी के नानजिंग स्थित सोइल साइंस इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिकों का कहना है कि इस इलाके की मिट्टी में प्राकृतिक रूप से कई तरह के खनिज पाए जाते हैं। इन खनिजों से उगने वाली फसलें स्थानीय लोगों के शरीर को जरूरी सूक्ष्म पोषक तत्व प्रदान करती हैं, जो स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद साबित होते हैं।
बुढ़ापे को नहीं मानतीं बाधा, करती हैं घरेलू काम
वांग गाइयिंग एक बड़े परिवार का हिस्सा हैं जिसमें पांच पीढ़ियां एक साथ रहती हैं। हालांकि उनकी उम्र 111 वर्ष हो चुकी है, लेकिन वह खुद को कभी भी बूढ़ा नहीं मानती हैं। सौ साल की उम्र पार करने के बाद भी वह खेतों में जाकर मूंगफली और तरबूज की फसल काटने में अपने परिवार का हाथ बंटाती थीं। अब अधिक उम्र के कारण उनकी गति थोड़ी धीमी जरूर हो गई है, मगर वह आज भी घर के छोटे-मोटे काम खुद संभालती हैं। वह खाने की मेज साफ करने और अपने कपड़े करीने से तह करने जैसे काम रोजाना करती हैं। परिवार के सदस्य जब उन्हें आराम करने की सलाह देते हैं, तो उनका जवाब होता है कि काम करते रहने से उनके हाथ-पांव सक्रिय रहते हैं और शरीर में ब्लड सर्कुलेशन ठीक बना रहता है। उनके अनुसार लगातार थोड़ा-बहुत चलते-फिरना लंबी और स्वस्थ जिंदगी की कुंजी है।
वांग का खान-पान बेहद साधारण और संतुलित है। उनके परिजन उनके भोजन में लगातार बदलाव करते रहते हैं ताकि उन्हें तरह-तरह की चीजें मिल सकें, जिनमें पकौड़ी और भाप में पकाए गए बन्स शामिल हैं। उन्हें मछली खाना सबसे ज्यादा पसंद है क्योंकि यह मुलायम होती है और आसानी से पच जाती है। वह कभी भी जरूरत से ज्यादा भोजन नहीं करतीं और उनका मानना है कि पेट को हमेशा पूरा न भरकर थोड़ा हल्का रखना चाहिए। कुछ साल पहले तक वह अपने चावल में पारंपरिक चीनी शराब मिलाकर खाने का शौक रखती थीं, हालांकि गिरने के जोखिम और नशे की आशंका को देखते हुए परिवार ने करीब पांच साल पहले यह आदत छुड़ा दी थी।
अच्छा व्यवहार और सुकून भरी नींद
अपनी लंबी और स्वस्थ जिंदगी के पीछे वांग अपने अच्छे स्वभाव को भी एक बड़ा कारण मानती हैं। उनका एक कड़ा नियम है कि वह हर दिन कम से कम एक अच्छा काम जरूर करती हैं। यह काम परिवार के किसी सदस्य की तारीफ करना या किसी पुराने मित्र को एक छोटा सा संदेश भेजना हो सकता है। वह किसी भी बात पर गुस्सा या तनाव को अपने ऊपर हावी नहीं होने देतीं और उसे ज्यादा देर तक मन में नहीं रखतीं। उनका साफ मानना है कि परेशानियों को लेकर सोने जाने से बेहतर है कि चैन की नींद ली जाए। वांग हर रात लगभग 7 बजे बिस्तर पर चली जाती हैं और सुबह 7 बजे उठती हैं, इसके अलावा वह दिन में भी एक या दो बार छोटी झपकी जरूर लेती हैं।



















