मानसून की दस्तक के साथ ही खेतों की मेड़ों, खाली जमीनों, रास्तों और घरों के आसपास हरी घास और खरपतवार बेहद तेजी से पनपने लगते हैं। कुछ ही हफ्तों में यह वनस्पति इतनी सघन हो जाती है कि कई बार आने-जाने के रास्ते तक छिप जाते हैं। यदि इस स्थिति पर समय रहते काबू न पाया जाए, तो यह केवल कृषि कार्यों के लिए ही नहीं, बल्कि इंसानी सुरक्षा के लिहाज से भी एक बड़ी चुनौती बन जाती है।
कृषि विज्ञान केंद्र सुल्तानपुर के कृषि वैज्ञानिक डॉ. जे. बी. सिंह का कहना है कि बरसात के इस सीजन में घनी घास के भीतर सांप, बिच्छू और अन्य जहरीले जीव आसानी से शरण ले लेते हैं। ऐसी स्थिति में खेतों की मेड़ों पर चलना या खेतों के भीतर दैनिक कार्य करना काफी खतरनाक साबित हो सकता है, इसलिए किसानों और आम नागरिकों को इस दौरान विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए।
यह परेशानी सिर्फ ग्रामीण इलाकों या खेतों तक सीमित नहीं रहती है, बल्कि शहरी और अर्ध-शहरी बस्तियों में भी नजर आती है। बरसात के दिनों में मकानों के आगे, गलियों में, खाली पड़े प्लॉटों और परिसरों के आसपास अवांछित घास बहुत तेजी से फैलती है। इस तरह के स्थान जहरीले जीवों के छिपने के लिए सबसे सुरक्षित ठिकाने बन जाते हैं, जिसके चलते घर के आस-पास की नियमित साफ-सफाई अत्यंत आवश्यक हो जाती है।
वर्षा ऋतु के दौरान विषैले जीवों के बाहर आने और काटने की घटनाएं अक्सर बढ़ जाती हैं। यदि आसपास बड़ी और घनी घास मौजूद हो, तो ये जीव नजर नहीं आते और अचानक हमला करके बड़ा नुकसान पहुंचा सकते हैं। सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए यह बेहद जरूरी है कि समय-समय पर अनावश्यक वनस्पतियों को जड़ से या काटकर हटाया जाए।
डॉ. जे. बी. सिंह के मुताबिक, जहां भी आवश्यकता महसूस हो, वहां अवांछित घास और खरपतवार को काबू में रखने के लिए उपयुक्त खरपतवारनाशक रसायनों का प्रयोग किया जा सकता है। इसके उपयोग से घास बहुत जल्द सूख जाती है और भविष्य में उसके दोबारा उगने की आशंका भी काफी हद तक कम हो जाती है।
खरपतवारों के प्रभावी नियंत्रण के लिए ग्लाइफोसेट का घोल तैयार करना एक उपयोगी तरीका है। इस प्रक्रिया को पूरा करने के लिए एक लीटर पानी में दस मिलीलीटर ग्लाइफोसेट की मात्रा को अच्छी तरह मिलाएं और फिर इस तैयार मिश्रण का छिड़काव अवांछित घास पर करें। इसके प्रभाव से घास धीरे-धीरे सूखने लगती है और उसकी ग्रोथ पूरी तरह थम जाती है।
यह ध्यान रखना बहुत आवश्यक है कि ग्लाइफोसेट एक गैर-चयनात्मक खरपतवारनाशी रसायन है। इसलिए इसका छिड़काव कभी भी धान या किसी अन्य प्रकार की खड़ी फसल के ऊपर नहीं किया जाना चाहिए। यदि यह दवा गलती से भी मुख्य फसल पर गिर जाती है, तो पौधे नष्ट हो सकते हैं। छिड़काव करते वक्त हवा के बहाव की दिशा और आसपास की फसलों की सुरक्षा का पूरा ध्यान रखना चाहिए।
कुल मिलाकर, बरसात के पूरे मौसम में अपने खेतों, मेड़ों, आवासीय परिसरों और आसपास के क्षेत्रों से समय-समय पर घास-फूस साफ करते रहना चाहिए। जिन जगहों पर घास ज्यादा हो, वहां बिना सावधानी के न जाएं और खेतों में काम करते समय हमेशा मजबूत जूते पहनें। नियमित स्वच्छता अभियानों और समयबद्ध खरपतवार प्रबंधन के माध्यम से सांप और बिच्छू के खतरे को काफी हद तक टाला जा सकता है।



















