देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर तैनात हस्तियों की सुरक्षा और दिनचर्या कड़े प्रोटोकॉल तथा तय नियमों से बंधी होती है। आमतौर पर वीआईपी सुरक्षा व्यवस्था में तैनात अधिकारियों का काम एक अभेद्य सुरक्षा घेरा बनाना होता है, जहाँ औपचारिकता और अनुशासन को प्राथमिकता दी जाती है। हालांकि, भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कई अवसरों पर अपनी सहज मानवीय संवेदनाओं और सादगी से इन औपचारिक दायरों को पार किया है। उनके पूर्व एडीसी (ADC) मेजर ऋषभ सिंह साम्ब्याल ने हाल ही में राज शमानी के लोकप्रिय पॉडकास्ट में राष्ट्रपति के साथ बिताए अपने कार्यकाल की एक बेहद भावुक और यादगार घटना साझा की है, जो इस समय काफी चर्चा में है।
गुवाहाटी में बारिश और प्रोटोकॉल से परे संवेदनशीलता
यह पूरा मामला मई 2024 का है, जब राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू असम के आधिकारिक दौरे पर गुवाहाटी स्थित ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (AIIMS) के परिसर में आयोजित एक कार्यक्रम में भाग लेने पहुंची थीं। कार्यक्रम के दौरान अचानक मौसम ने करवट ली और मूसलाधार बारिश शुरू हो गई। सुरक्षा मानकों के अनुसार, राष्ट्रपति के पर्सनल बॉडीगार्ड और उनके एडीसी तुरंत सक्रिय हो गए। उन्होंने राष्ट्रपति को भीगने से बचाने के लिए उनके सिर पर एक बड़ी काली छतरी लगा दी और उन्हें सुरक्षित स्थान की ओर ले जाने लगे।
इसी दौरान राष्ट्रपति मुर्मू की नजर अपने ठीक बगल में चल रहे मेजर ऋषभ सिंह साम्ब्याल पर पड़ी। उन्होंने देखा कि सुरक्षा व्यवस्था संभाल रहे मेजर ऋषभ तेज बारिश में पूरी तरह भीग रहे हैं। किसी भी तरह की औपचारिक झिझक या वीआईपी कल्चर की परवाह न करते हुए, राष्ट्रपति ने बिना पल गंवाए अपनी छतरी का एक हिस्सा मेजर ऋषभ के सिर की तरफ कर दिया। देश की सर्वोच्च नागरिक का अपने सुरक्षा अधिकारी के प्रति ऐसा वात्सल्य और ममता से भरा व्यवहार देखकर वहां मौजूद हर कोई स्तब्ध रह गया।
पॉडकास्ट में एडीसी ने सुनाई अपनी आत्मीय दास्तान
राज शमानी के पॉडकास्ट कार्यक्रम में जब मेजबान ने मेजर ऋषभ सिंह साम्ब्याल से राष्ट्रपति मुर्मू के साथ उनके विशेष जुड़ाव के बारे में पूछा, तो उन्होंने बहुत ही सादगी से अपने अनुभव व्यक्त किए। मेजर ऋषभ ने बताया कि जब वे पहली बार राष्ट्रपति के एडीसी के रूप में उनसे मिले थे, तो उन्हें बिल्कुल भी यह महसूस नहीं हुआ कि वे किसी विशाल सुरक्षा तंत्र या औपचारिक पद के सामने खड़े हैं। उन्हें लगा जैसे वे अपनी माँ के सामने मौजूद हैं। उनके व्यवहार में एक अनोखा घरेलूपन और अपनत्व था जिसने तुरंत एक भावनात्मक रिश्ता कायम कर दिया।
बारिश वाली घटना को याद करते हुए मेजर ऋषभ ने स्पष्ट किया कि जब बारिश शुरू हुई, तो उनके मन में राष्ट्रपति को छतरी देने की भावना किसी सुरक्षा मैनुअल या लिखित नियम की वजह से नहीं आई थी। यह उनका एक प्राकृतिक और सहज व्यवहार था, ठीक वैसा ही जैसा कोई भी बेटा अपनी मां के साथ बाहर निकलते समय करता है। उन्होंने साझा किया कि राष्ट्रपति के एडीसी के रूप में तैनात रहने के कारण वे अपनी सगी मां से भी ज्यादा समय राष्ट्रपति के साथ बिताते थे। इस निरंतर उपस्थिति और राष्ट्रपति के करुणामय व्यवहार ने उनके मन में अपार सम्मान और प्रेम भर दिया था।
वीआईपी संस्कृति के बीच मानवीय मूल्यों का संदेश
सशस्त्र बलों के प्रोटोकॉल और प्रशासनिक नियमों में अधिकारियों से अनुशासन की कठोर अपेक्षा की जाती है, लेकिन राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के इस छोटे से कदम ने दिखाया कि पद की गरिमा और मानवीय संवेदनाएं साथ-साथ चल सकती हैं। सुरक्षाकर्मी केवल ड्यूटी पर तैनात कर्मचारी नहीं होते, बल्कि वे भी उसी मानवीय देखभाल और सम्मान के हकदार हैं जो किसी परिजन को मिलता है।
यह संस्मरण न केवल राष्ट्रपति मुर्मू की जमीनी सोच और ममता को उजागर करता है, बल्कि यह भी संदेश देता है कि उच्च पदों पर बैठे व्यक्तियों का विनम्र आचरण किस तरह उनके मातहत काम करने वाले कर्मचारियों के दिलों में स्थायी जगह बना लेता है। सोशल मीडिया पर लोग इस संस्मरण को व्यापक रूप से देख रहे हैं और राष्ट्रपति के इस सादगी भरे रवैये की सराहना कर रहे हैं।



















