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मैदा की जगह खोया का स्वाद: छतरपुर के त्योहारों में धूम मचा रही 400 रुपये किलो वाली यह खास जलेबीखानपान
11 सित॰ 2026, 7:47 pm (56 मिनट पहले)· 0

मैदा की जगह खोया का स्वाद: छतरपुर के त्योहारों में धूम मचा रही 400 रुपये किलो वाली यह खास जलेबी

छतरपुर में इन दिनों 400 रुपये किलो बिकने वाली मावा जलेबी की मांग त्योहारों के चलते काफी बढ़ गई है, जिसे खास तौर पर शुद्ध खोये से तैयार किया जाता है।

छतरपुर के मिठाइयों के शौकीनों के लिए इन दिनों एक नया और अनोखा स्वाद गहरी चर्चा का विषय बना हुआ है। यहां तैयार होने वाली मावा जलेबी अपनी खास बनावट और बेहतरीन स्वाद के कारण लोगों की पहली पसंद बनती जा रही है। 400 रुपये प्रति किलोग्राम की कीमत पर बिकने वाली यह अनूठी मिठाई आम मैदा जलेबी से बिल्कुल अलग है। आगामी त्योहारों के सीजन को देखते हुए इस खास मिठाई की मांग में बहुत तेजी से बढ़ोतरी देखी जा रही है, क्योंकि लोग अब साधारण मिठाइयों के बजाय कुछ प्रीमियम और सेहतमंद स्वाद आजमाना पसंद कर रहे हैं।

इंदौर से छतरपुर तक का सफर और स्वाद का अनूठा जादू

छतरपुर के स्थानीय हलवाई अरविंद सोनी ने इस विशेष मिठाई को स्थानीय बाजार में उतारा है। अरविंद इससे पहले मध्य प्रदेश के सबसे प्रसिद्ध खान-पान के केंद्र इंदौर में काम करते थे, जहां उन्होंने मावा जलेबी बनाने की पारंपरिक और बेहतरीन कला सीखी थी। अब वे छतरपुर में अपनी दुकान खोलकर लोगों को इस अनोखे स्वाद का चस्का लगा रहे हैं। अरविंद बताते हैं कि उन्होंने अपने लंबे करियर में कई प्रकार की मिठाइयां तैयार की हैं। उनकी बनाई मिठाइयों की सूची में काजू सेब, खजूर लड्डू, ड्राई-फूट्स लड्डू, मूंग लड्डू, मलाई बर्फी और प्रसिद्ध चंद्रकला गुजिया जैसी लोकप्रिय मिठाइयां शामिल हैं। लेकिन आगामी गणेश उत्सव और उसके बाद आने वाले नवदुर्गा उत्सव के पावन अवसर को ध्यान में रखकर उन्होंने विशेष रूप से मावा जलेबी बनाना शुरू किया है। उनकी दुकान पर आने वाला हर ग्राहक इस नई मिठाई के बारे में बड़ी उत्सुकता से पूछता है।

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मैदा और मावा जलेबी का बड़ा अंतर

ग्रामीण क्षेत्रों और छोटे कस्बों से आने वाले लोग अक्सर होटल में आकर मैदा से बनी पारंपरिक जलेबी की ही मांग करते हैं। इसका कारण यह है कि उन्होंने पहले कभी खोया या मावा से बनी ऐसी प्रीमियम जलेबी नहीं देखी होती है। हालांकि, अब धीरे-धीरे लोग इस बात को समझ रहे हैं कि यह लाजवाब मिठाई पूरी तरह से शुद्ध खोया से ही तैयार की जाती है। जहां बाजार में सामान्य मैदा की जलेबी 120 रुपये से लेकर 150 रुपये प्रति किलोग्राम तक आसानी से मिल जाती है, वहीं मावा जलेबी की कीमत 400 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंचती है। यह मिठाई दिखने में काफी हद तक प्रसिद्ध इमरती की तरह लगती है, लेकिन इसका असली स्वाद और पारंपरिक स्वरूप जलेबी का ही होता है। इसके सीरे यानी चाशनी को तैयार करते समय शक्कर की मात्रा भी काफी कम रखी जाती है, जिससे यह बहुत ज्यादा मीठी नहीं लगती और लोग इसे बिना किसी परेशानी के खा पाते हैं। हालांकि, अरविंद ने इस अनोखी जलेबी को बनाने का अपना गुप्त फार्मूला साझा करने से पूरी तरह इनकार कर दिया।

त्योहारों और विशेष आर्डरों पर ही होती है इसकी तैयारी

इस प्रीमियम और महंगी मावा जलेबी को रोजाना नहीं बनाया जाता है। हलवाई अरविंद सोनी का कहना है कि उच्च कीमत होने के कारण आम लोग इसे रोजाना नहीं खरीद पाते हैं, इसलिए वे इसे केवल बड़े त्योहारों, पारिवारिक कार्यक्रमों या विशेष मांग आने पर ही तैयार करते हैं। हाल ही में एक प्राइवेट बैंकिंग शाखा के भव्य उद्घाटन समारोह के लिए उन्हें इसका एक बहुत बड़ा ऑर्डर मिला था, जिसके लिए इसे खास तौर पर तैयार किया गया। वे बताते हैं कि जहां एक आम आदमी मात्र 10 रुपये खर्च करके मैदा की जलेबी का लुत्फ उठा सकता है, वहीं मावा जलेबी का स्वाद लेने के लिए ग्राहकों को अपनी जेब थोड़ी ज्यादा ढीली करनी पड़ती है। इसके बावजूद, इसका बेमिसाल स्वाद और संतुलित मिठास स्वास्थ्य के लिहाज से भी अधिक नुकसानदेह नहीं है, बशर्ते इसे सीमित और उचित मात्रा में ही खाया जाए।

सवाल-जवाब

छतरपुर में मावा जलेबी की कीमत क्या है?
छतरपुर में मावा जलेबी 400 रुपये प्रति किलोग्राम की कीमत पर बेची जा रही है।
मावा जलेबी और साधारण मैदा जलेबी की कीमतों में कितना अंतर है?
सामान्य मैदा जलेबी जहां 120 से 150 रुपये प्रति किलो मिलती है, वहीं मावा जलेबी 400 रुपये प्रति किलो बिकती है।
मावा जलेबी को बनाने में मुख्य रूप से किस सामग्री का उपयोग किया जाता है?
इस खास जलेबी को पूरी तरह से खोया यानी मावा से तैयार किया जाता है और इसकी चाशनी में शक्कर भी कम मिलाई जाती है।
क्या मावा जलेबी हर दिन दुकान पर उपलब्ध रहती है?
नहीं, इसकी उच्च कीमत और सीमित दैनिक मांग के कारण इसे केवल त्योहारों, बड़े पारिवारिक अवसरों या विशेष ऑर्डर मिलने पर ही बनाया जाता है।
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