प्रगतिशील युवा किसान रनजोद सिंह ने जानकारी दी कि बारिश के दिनों में हवा में मौजूद नमी अनाज के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन जाती है। जब नमी का स्तर बढ़ने लगता है तो गेहूं में घुन और सुंडी जैसे बारीक कीड़े पनपने की संभावना बहुत अधिक हो जाती है। ये सूक्ष्म कीट अनाज को भीतर से खोखला कर देते हैं, जिससे उसकी गुणवत्ता खराब हो जाती है। इसलिए मानसून के आगमन से पहले ही गेहूं की उचित देखभाल और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करना बेहद आवश्यक हो जाता है ताकि साल भर अनाज सुरक्षित बना रहे।
अनाज को लंबे समय तक सुरक्षित रखने की दिशा में सही भंडारण बर्तन या ड्रम का चयन करना सबसे पहला कदम है। हमेशा पूरी तरह से सूखे और वायुरोधक ड्रम या कोठी में ही गेहूं को भरकर रखना चाहिए। यदि भंडारण पात्र में थोड़ी सी भी हवा या नमी का प्रवेश होगा, तो कीड़े बहुत तेजी से फैलेंगे। इस बात का विशेष ध्यान रखें कि ड्रम का ढक्कन हमेशा कसकर बंद रहे ताकि बाहरी आद्र्रता अंदर तक न पहुंच सके और अनाज सुरक्षित रह सके।
कीड़ों से प्राकृतिक रूप से बचाव करने के लिए नीम की सूखी पत्तियों का इस्तेमाल एक बेहद असरदार और पुराना घरेलू उपाय है। सबसे पहले नीम की ताजी पत्तियों को धूप में पूरी तरह से कड़क सूखा लें। इसके पश्चात इन सूखी पत्तियों को किसी पतले सूती कपड़े में बांधकर छोटी-छोटी पोटलियां तैयार कर लें। इन पोटलियों को गेहूं के डिब्बे या ड्रम में अलग-अलग परतों के बीच में रख दें। नीम की तेज गंध से कीड़े और घुन अनाज के आसपास भी नहीं भटकते हैं।
घरेलू नुस्खों में माचिस की तीलियों का प्रयोग भी गेहूं को घुन और सुंडी से महफूज रखने में काफी मददगार साबित होता है। माचिस के मसाले में फास्फोरस और सल्फर जैसे तत्व पाए जाते हैं, जिनकी महक से कीट दूर भागते हैं। कुछ माचिस की तीलियों को कपड़े में सुरक्षित लपेटकर गेहूं के ड्रम के भीतर रख देना चाहिए। यह एक बहुत ही सरल, किफायती और असरदार तरीका है जो बिना किसी झंझट के अनाज को कीटों के प्रकोप से बचाता है।
यदि गेहूं में कीड़ों और घुन का संक्रमण बहुत अधिक बढ़ जाए, तो मजबूरी में रासायनिक उपायों का सहारा लेना पड़ता है। ऐसी स्थिति से निपटने के लिए एल्युमीनियम फॉस्फाइड की गोलियों का उपयोग किया जा सकता है। हालांकि यह बेहद जरूरी है कि इन जहरीली गोलियों का इस्तेमाल हमेशा किसी कृषि विशेषज्ञ की सलाह और देखरेख में ही किया जाए। सुरक्षा के सभी नियमों का कड़ाई से पालन करना अनिवार्य है क्योंकि ये गोलियां स्वास्थ्य के लिए अत्यधिक हानिकारक हो सकती हैं।
अनाज के ड्रम को घर में किस जगह रखा जा रहा है, यह बात भी इसकी सुरक्षा में बहुत मायने रखती है। ड्रम को कभी भी सीधे नंगे फर्श या जमीन पर भूलकर भी न रखें। इसके साथ ही ड्रम को किसी भी गीली या सीलन वाली दीवार से थोड़ा फासला रखकर स्थापित करें। जमीन की सीलन धीरे-धीरे ड्रम के अंदर तक पहुंच सकती है। इसलिए ड्रम के नीचे लकड़ी का पट्टा या ईंटें लगाकर उसे जमीन से थोड़ा ऊपर उठा देना चाहिए।
ड्रम में गेहूं भरने से पहले इस बात की पुष्टि कर लें कि अनाज को तेज धूप में अच्छी तरह सुखाया गया है या नहीं। यदि गेहूं के अंदर थोड़ा सा भी मॉइश्चर या नमी शेष रह जाएगी, तो उसमें घुन लगने की आशंका कई गुना तक बढ़ जाएगी। अनाज को दो से तीन दिन की कड़क धूप में अच्छी तरह सुखाने के बाद जब वह पूरी तरह ठंडा हो जाए, तब उसे ड्रम में भरें। कभी भी गरम गेहूं को डिब्बे में बंद न करें।
भंडारित किए गए गेहूं की समय-समय पर नियमित जांच करते रहना भी बेहद जरूरी प्रक्रिया है। महीने में कम से कम एक या दो बार ड्रम खोलकर यह मुआयना करें कि कहीं अनाज में नमी या कीड़ों की शुरुआत तो नहीं हो रही है। यदि शुरुआती अवस्था में ही कीड़ों की मौजूदगी का पता चल जाए, तो गेहूं को बाहर निकालकर धूप में फैला देने से उसे आसानी से बचाया जा सकता है। थोड़ी सी सतर्कता और सावधानी आपके अनाज को सड़ने या खराब होने से पूरी तरह बचा सकती है।



















