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बरसात में नवजात बछड़ों को बीमारियों से बचाएगा डॉक्टर का यह सुझावजीवनशैली
2 घंटे पहले· 2

बरसात में नवजात बछड़ों को बीमारियों से बचाएगा डॉक्टर का यह सुझाव

मानसून में गाय के नवजात बछड़ों में संक्रमण, दस्त और निमोनिया का खतरा बढ़ जाता है, पशुपालन विभाग के डॉक्टर अरुण कुमार सिंह ने बताया कि खीस, साफ-सफाई और समय पर इलाज से बछड़ों को कैसे बचाया जा सकता है।

प्रिया शर्माप्रिया शर्मालाइफस्टाइल एडिटर 3 मिनट पढ़ें AI के लिए
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बारिश का मौसम शुरू होते ही किसानों और पशुपालकों को झुलसाने वाली गर्मी से राहत तो मिल जाती है, लेकिन यही मौसम गाय के नवजात बछड़ों के लिए खतरे की घंटी भी बजा देता है। हवा में लगातार बनी नमी, चारों ओर फैला कीचड़ और गंदगी नवजात बछड़ों में संक्रमण, दस्त, निमोनिया और तेज बुखार जैसी दिक्कतें बहुत तेजी से पैदा कर देती है। समय पर सही देखभाल न मिले तो बछड़े की जान तक पर बन आती है, इसलिए मानसून के इन दिनों में पशुपालकों को बछड़ों की देखभाल में कोई कोताही नहीं बरतनी चाहिए।

जन्म के बाद पहले तीन घंटे में खीस बेहद जरूरी

पशुपालन विभाग के डॉक्टर अरुण कुमार सिंह का कहना है कि बछड़े को जन्म के तुरंत बाद मां का पहला गाढ़ा दूध, यानी खीस, जरूर पिलाना चाहिए। खीस में पोषक तत्व और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाले तत्व भरपूर मात्रा में होते हैं, जो बछड़े की अंदरूनी रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करते हैं। डॉक्टर सिंह के मुताबिक जन्म के दो से तीन घंटे के भीतर खीस पिला देना सबसे फायदेमंद रहता है। इससे बछड़ा अंदर से मजबूत बनता है और उसमें संक्रमण फैलने का खतरा काफी हद तक घट जाता है।

सूखी और साफ जगह पर ही रखें बछड़ों को

मानसून के मौसम में बछड़ों को हमेशा सूखी, साफ और हवादार जगह पर ही बांधना चाहिए। जहां पानी भरा हो या कीचड़ जमा हो, वहां बछड़ों को भूलकर भी नहीं रखना चाहिए। बिछावन के लिए हमेशा सूखा भूसा या पुआल इस्तेमाल करें और उसे समय-समय पर बदलते रहें। अगर बछड़ा अचानक बारिश में भीग जाए, तो उसे तुरंत सूखे कपड़े से अच्छी तरह पोंछकर गर्म और सुरक्षित जगह पर रख देना चाहिए। डॉक्टर सिंह के अनुसार सिर्फ साफ-सफाई का ध्यान रखकर ही कई गंभीर संक्रामक बीमारियों से बछड़ों को बचाया जा सकता है।

खान-पान और पशु चिकित्सक की सलाह जरूरी

पशुपालकों को बछड़ों के खान-पान पर भी पूरा ध्यान देना चाहिए। उन्हें हमेशा साफ और ताजा पानी दें और उम्र के हिसाब से संतुलित आहार उपलब्ध कराएं। अगर बछड़े में दस्त, सुस्ती, तेज बुखार, खांसी या अचानक दूध पीना बंद कर देने जैसे कोई भी असामान्य लक्षण दिखें, तो बिना देर किए तुरंत नजदीकी पशु चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए। डॉक्टर सिंह बताते हैं कि समय पर सही इलाज मिलने से न सिर्फ बछड़े की जान बचाई जा सकती है, बल्कि पशुपालकों को होने वाले बड़े आर्थिक नुकसान से भी बचा जा सकता है।

टीकाकरण, कृमिनाशक दवा और देसी नुस्खे भी मददगार

बछड़ों को समय पर जरूरी टीकाकरण और कृमिनाशक दवा दिलाना बेहद आवश्यक है। इसके अलावा कुछ आसान देसी उपाय भी बछड़ों को स्वस्थ रखने में सहायक साबित हो सकते हैं। पशु चिकित्सक की उचित सलाह लेकर पशुपालक सीमित मात्रा में हल्दी और गुड़ का इस्तेमाल कर सकते हैं, इससे बछड़ों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बेहतर बनी रहती है। हालांकि डॉक्टर सिंह साफ कहते हैं कि किसी भी घरेलू नुस्खे को मुख्य इलाज का विकल्प कभी नहीं मानना चाहिए। नियमित देखभाल, साफ-सफाई, पौष्टिक आहार और समय पर मिलने वाला इलाज ही मानसून के मौसम में बछड़ों को पूरी तरह स्वस्थ रखने का सबसे कारगर तरीका है।

इसका आप पर असर

भारत में: मानसून के मौसम में देशभर के पशुपालकों को अपने गाय के बछड़ों की सेहत पर विशेष ध्यान देना होगा, क्योंकि समय पर देखभाल न होने से जानलेवा बीमारियां और आर्थिक नुकसान दोनों हो सकते हैं।

  • भीलवाड़ा में: स्थानीय पशुपालन विभाग की सलाह से यहां के किसान खीस पिलाने, बछड़ों को सूखी जगह रखने और समय पर टीकाकरण कराने जैसे उपाय अपनाकर अपने पशुधन को बीमारियों से बचा सकते हैं।
  • पशुपालकों के लिए: सही समय पर पशु चिकित्सक से संपर्क करने से बछड़े की जान बचने के साथ-साथ इलाज पर होने वाला बड़ा खर्च भी बच सकता है।

सवाल-जवाब

बछड़ों को खीस कब पिलानी चाहिए?
जन्म के दो से तीन घंटे के भीतर खीस पिलाना सबसे फायदेमंद माना जाता है।
मानसून में बछड़ों को किन बीमारियों का खतरा रहता है?
संक्रमण, दस्त, निमोनिया और तेज बुखार जैसी समस्याएं तेजी से हो सकती हैं।
बछड़ों को कहां रखना चाहिए?
उन्हें हमेशा सूखी, साफ और हवादार जगह पर ही रखना चाहिए, कीचड़ या पानी भरे स्थान पर नहीं।
बछड़ा बारिश में भीग जाए तो क्या करें?
उसे तुरंत सूखे कपड़े से अच्छी तरह पोंछकर गर्म और सुरक्षित जगह पर रखना चाहिए।
किन लक्षणों पर पशु चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए?
दस्त, सुस्ती, तेज बुखार, खांसी या दूध पीना बंद करने जैसे लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
क्या घरेलू नुस्खे इलाज का विकल्प हैं?
नहीं, हल्दी-गुड़ जैसे देसी उपाय सिर्फ सहायक हैं, इन्हें मुख्य इलाज का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए।
यह सलाह किसने दी है?
पशुपालन विभाग के डॉक्टर अरुण कुमार सिंह ने यह जानकारी दी है।
प्रिया शर्मा
लेखक के बारे मेंप्रिया शर्मालाइफस्टाइल एडिटर नई दिल्ली
विशेषज्ञतालाइफस्टाइल पत्रकारिता, वेलनेस, यात्रा, संस्कृति, रिश्ते, खानपान, फ़ैशन, आधुनिक जीवन, व्यक्तित्व विकास, संपादकीय क्यूरेशन

प्रिया शर्मा एक लाइफस्टाइल एडिटर हैं जो आधुनिक जीवनशैली, वेलनेस, यात्रा, संस्कृति, रिश्तों और रोज़मर्रा के लाइफस्टाइल रुझानों को कवर करती हैं। वे समकालीन जीवन और पाठकों की रुचियों को दर्शाने वाली दिलचस्प सामग्री तैयार करती हैं।

प्रिया शर्मा एक लाइफस्टाइल एडिटर हैं जो लाइफस्टाइल पत्रकारिता — वेलनेस, यात्रा, संस्कृति, रिश्ते, खानपान, फ़ैशन और आधुनिक जीवन के रुझानों — में विशेषज्ञता रखती हैं। वे बदलती जीवनशैली, रोज़मर्रा की आदतों और सांस्कृतिक बदलावों को दर्शाने वाली दिलचस्प कहानियों की देखरेख और क्यूरेशन करती हैं। स्पष्टता और प्रासंगिकता पर मज़बूत संपादकीय ज़ोर के साथ प्रिया ऐसी कहानियाँ सामने लाती हैं जो पाठकों को स्वस्थ, संतुलित और रुझान-सजग जीवन के लिए प्रेरित व सूचित करती हैं। उनका काम वैश्विक लाइफस्टाइल आंदोलनों, व्यक्तित्व विकास, सांस्कृतिक अंतर्दृष्टि और आधुनिक पाठकों के लिए रोज़मर्रा की प्रेरणा को उजागर करता है।

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