बारिश का मौसम शुरू होते ही किसानों और पशुपालकों को झुलसाने वाली गर्मी से राहत तो मिल जाती है, लेकिन यही मौसम गाय के नवजात बछड़ों के लिए खतरे की घंटी भी बजा देता है। हवा में लगातार बनी नमी, चारों ओर फैला कीचड़ और गंदगी नवजात बछड़ों में संक्रमण, दस्त, निमोनिया और तेज बुखार जैसी दिक्कतें बहुत तेजी से पैदा कर देती है। समय पर सही देखभाल न मिले तो बछड़े की जान तक पर बन आती है, इसलिए मानसून के इन दिनों में पशुपालकों को बछड़ों की देखभाल में कोई कोताही नहीं बरतनी चाहिए।
जन्म के बाद पहले तीन घंटे में खीस बेहद जरूरी
पशुपालन विभाग के डॉक्टर अरुण कुमार सिंह का कहना है कि बछड़े को जन्म के तुरंत बाद मां का पहला गाढ़ा दूध, यानी खीस, जरूर पिलाना चाहिए। खीस में पोषक तत्व और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाले तत्व भरपूर मात्रा में होते हैं, जो बछड़े की अंदरूनी रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करते हैं। डॉक्टर सिंह के मुताबिक जन्म के दो से तीन घंटे के भीतर खीस पिला देना सबसे फायदेमंद रहता है। इससे बछड़ा अंदर से मजबूत बनता है और उसमें संक्रमण फैलने का खतरा काफी हद तक घट जाता है।
सूखी और साफ जगह पर ही रखें बछड़ों को
मानसून के मौसम में बछड़ों को हमेशा सूखी, साफ और हवादार जगह पर ही बांधना चाहिए। जहां पानी भरा हो या कीचड़ जमा हो, वहां बछड़ों को भूलकर भी नहीं रखना चाहिए। बिछावन के लिए हमेशा सूखा भूसा या पुआल इस्तेमाल करें और उसे समय-समय पर बदलते रहें। अगर बछड़ा अचानक बारिश में भीग जाए, तो उसे तुरंत सूखे कपड़े से अच्छी तरह पोंछकर गर्म और सुरक्षित जगह पर रख देना चाहिए। डॉक्टर सिंह के अनुसार सिर्फ साफ-सफाई का ध्यान रखकर ही कई गंभीर संक्रामक बीमारियों से बछड़ों को बचाया जा सकता है।
खान-पान और पशु चिकित्सक की सलाह जरूरी
पशुपालकों को बछड़ों के खान-पान पर भी पूरा ध्यान देना चाहिए। उन्हें हमेशा साफ और ताजा पानी दें और उम्र के हिसाब से संतुलित आहार उपलब्ध कराएं। अगर बछड़े में दस्त, सुस्ती, तेज बुखार, खांसी या अचानक दूध पीना बंद कर देने जैसे कोई भी असामान्य लक्षण दिखें, तो बिना देर किए तुरंत नजदीकी पशु चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए। डॉक्टर सिंह बताते हैं कि समय पर सही इलाज मिलने से न सिर्फ बछड़े की जान बचाई जा सकती है, बल्कि पशुपालकों को होने वाले बड़े आर्थिक नुकसान से भी बचा जा सकता है।
टीकाकरण, कृमिनाशक दवा और देसी नुस्खे भी मददगार
बछड़ों को समय पर जरूरी टीकाकरण और कृमिनाशक दवा दिलाना बेहद आवश्यक है। इसके अलावा कुछ आसान देसी उपाय भी बछड़ों को स्वस्थ रखने में सहायक साबित हो सकते हैं। पशु चिकित्सक की उचित सलाह लेकर पशुपालक सीमित मात्रा में हल्दी और गुड़ का इस्तेमाल कर सकते हैं, इससे बछड़ों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बेहतर बनी रहती है। हालांकि डॉक्टर सिंह साफ कहते हैं कि किसी भी घरेलू नुस्खे को मुख्य इलाज का विकल्प कभी नहीं मानना चाहिए। नियमित देखभाल, साफ-सफाई, पौष्टिक आहार और समय पर मिलने वाला इलाज ही मानसून के मौसम में बछड़ों को पूरी तरह स्वस्थ रखने का सबसे कारगर तरीका है।













