मानसून का मौसम आते ही घरों में पानी और नमी से जुड़ी कई तरह की परेशानियां शुरू हो जाती हैं। खासतौर पर प्रवेश द्वार से पानी का अंदर आना और कीचड़ फैलना एक आम समस्या है जिससे निपटने के लिए सही तैयारी की जरूरत होती है। विक्रेता अरशद के अनुसार इस मौसम में घर के बाहर उपयोग के लिए विशेष तौर पर रबर वाले डोर मैट चुनना सबसे समझदारी भरा कदम साबित होता है।
रबर मैट और कपड़े के मैट में अंतर
सामान्य कपड़े के मैट की तुलना में रबर से बने मैट काफी तेजी से सूखते हैं। इनमें नमी ज्यादा समय तक टिक नहीं पाती जिसके कारण फंगस लगने और बदबू आने की समस्या से राहत मिलती है। घर के मुख्य दरवाजे के बाहर रबर मैट बिछाने से जूतों और चप्पलों में लगी हुई मिट्टी, कीचड़ और अतिरिक्त नमी घर के भीतर प्रवेश करने से प्रभावी ढंग से रुक जाती है।
मैट की मोटाई और चौखट का अनुपात
बाजार से किसी भी डोर मैट को खरीदते वक्त उसकी मोटाई पर विशेष ध्यान देना चाहिए। मैट का चयन हमेशा घर के फर्श और दरवाजे की चौखट की ऊंचाई के हिसाब से ही किया जाना चाहिए। यदि जरूरत महसूस हो तो थोड़ा मोटा मैट खरीदने से पानी को घर के अंदर घुसने से रोकने में काफी मदद मिल सकती है। हालांकि इस बात का भी पूरा ध्यान रखना चाहिए कि मैट की मोटाई इतनी ज्यादा न हो जाए कि मुख्य दरवाजे को खोलने और बंद करने में किसी तरह की रुकावट पैदा होने लगे।
बाहर और अंदर के लिए अलग मैट का उपयोग
बारिश के दिनों में घर के दरवाजे के अंदर और बाहर दोनों जगहों पर अलग-अलग प्रकार के मैट बिछाना एक बेहतरीन रणनीति है। दरवाजे के ठीक बाहर रबर या रैकेट टाइप मैट रखने से जूतों की गंदगी बाहर ही रह जाती है। इससे घर के भीतर फर्श पर पानी और कीचड़ फैलने का खतरा काफी हद तक कम हो जाता है और घर साफ-सुथरा रहता है।
पानी रोकने के घरेलू और अन्य उपाय
यदि दरवाजे के निचले हिस्से से लगातार पानी अंदर आ रहा है तो मैट के नीचे एक पुराना तौलिया या कोई मोटा कपड़ा बिछाया जा सकता है। यह कपड़ा बचा हुआ सारा पानी आसानी से सोख लेता है और साथ ही मैट को फर्श पर फिसलने से भी रोकता है। जरूरत पड़ने पर इस कपड़े को धूप में सुखाकर या बदलकर दोबारा आसानी से इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके अलावा दरवाजे के नीचे की खाली जगह को भरने के लिए डोर स्टॉपर या सिलिकॉन स्ट्रिप का उपयोग करना भी काफी फायदेमंद रहता है। इसे दरवाजे के निचले हिस्से में लगाने से पानी का रिसाव काफी हद तक रुक जाता है।
धूप में सुखाना और जल निकासी की व्यवस्था
मानसून के दौरान डोर मैट को समय-समय पर निकालकर धूप में अच्छी तरह सुखाना बहुत जरूरी होता है। लगातार गीले रहने की वजह से मैट में बदबू पैदा होने लगती है और फंगस पनपने का खतरा बढ़ जाता है। जब भी आसमान में धूप निकले, मैट को पूरी तरह सुखाकर ही दोबारा इस्तेमाल में लाना चाहिए। इसके अलावा यदि घर के मुख्य द्वार के पास बारिश का पानी जमा होने की समस्या है तो वहां हल्का सा स्लोप या ढलान बनाना आवश्यक है। इससे पानी दरवाजे की तरफ रुकने के बजाय बाहर की ओर निकल जाता है जिससे चौखट और फर्श पर नमी बनी रहने की समस्या से निजात मिलती है।



















