वर्षा ऋतु के विदा होते ही वातावरण में नमी का स्तर तेजी से बदलता है। इस मौसम के बदलाव का सीधा असर हमारी त्वचा की सेहत पर पड़ता है। बारिश के दौरान लगातार बने रहने वाले उमस भरे माहौल, शरीर से निकलने वाले पसीने और हवा में उड़ने वाली धूल के कारण चेहरे की रंगत फीकी पड़ जाती है। जब यह मौसम पूरी तरह से बदलता है, तो बहुत से लोगों को अपने चेहरे पर टैनिंग उभरने, जिद्दी दाग-धब्बे दिखने, त्वचा बेजान होने और रंगत असमान नजर आने की शिकायत होने लगती है। ऐसे में गोरापन पाने के लिए प्रयास करने के बजाय, त्वचा की प्राकृतिक सुरक्षात्मक परत को मजबूत बनाए रखना और पिगमेंटेशन को और अधिक बिगड़ने से रोकना कहीं अधिक समझदारी भरा कदम होता है। एक अनुशासित और सही स्किनकेयर रूटीन का पालन करके आप धीरे-धीरे अपनी त्वचा का खोया हुआ निखार और एक समान रंगत वापस पा सकते हैं।
चेहरे की सफाई का रखें खास ख्याल
मानसून बीत जाने के बाद भी त्वचा के रोमछिद्रों में अतिरिक्त तेल, पसीना और धूल के कण फंसे रह सकते हैं। इनसे निजात पाने के लिए दिन की शुरुआत और रात को सोने से पहले किसी अच्छे, हल्के और सौम्य क्लींजर से अपना चेहरा अच्छी तरह साफ करें। चेहरे को बार-बार धोने की आदत से बचें और किसी भी तरह के कठोर स्क्रब का इस्तेमाल करने से पूरी तरह दूर रहें। ज्यादा रगड़ने या कठोर उत्पादों के प्रयोग से त्वचा की ऊपरी सतह पर जलन और सूजन बढ़ सकती है, जिससे स्थिति और बिगड़ सकती है।
त्वचा की नमी बनाए रखना है जरूरी
जब लोगों की त्वचा का रंग एक समान नहीं रहता है, तो अक्सर वे मॉइश्चराइजर लगाना छोड़ देते हैं, जबकि यह एक बहुत बड़ी भूल है। त्वचा के अंदर नमी को सुरक्षित रखना उसकी सेहत के लिए बेहद आवश्यक है। आपको अपनी त्वचा के प्रकार के अनुसार ही किसी हल्के मॉइश्चराइजर का चुनाव करना चाहिए। यदि आपकी त्वचा तैलीय है, तो आपके लिए जेल आधारित मॉइश्चराइजर सबसे उपयुक्त रहते हैं। इसके विपरीत, जिन लोगों की त्वचा सूखी या बेजान है, उनके लिए क्रीम आधारित मॉइश्चराइजर ज्यादा फायदेमंद साबित होते हैं।
धूप से बचाव के लिए सनस्क्रीन का उपयोग
बारिश के थमने के बाद आसमान में सूरज की चमक भले ही थोड़ी कम महसूस हो, लेकिन हानिकारक यूवी किरणें बादलों को चीरकर अब भी आपकी त्वचा को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती हैं। घर से बाहर निकलने से करीब पंद्रह से बीस मिनट पहले हमेशा एसपीएफ़ तीस या उससे अधिक क्षमता वाले ब्रॉड स्पेक्ट्रम सनस्क्रीन का अच्छी तरह लेप करें। यदि आप धूप में लंबे समय तक बाहर रहने वाले हैं, तो कुछ घंटों बाद सनस्क्रीन की परत को दोबारा लगाना बिल्कुल न भूलें।
त्वचा को रगड़ने या ज्यादा एक्सफोलिएट करने से बचें
सिर्फ इसलिए कि आपका चेहरा सुस्त और बेजान नजर आ रहा है, बार-बार स्क्रब करने की गलती बिल्कुल न दोहराएं। जरूरत से ज्यादा एक्सफोलिएशन करने से त्वचा की सहनशक्ति कम होती है और उस पर जलन तथा संवेदनशीलता तेजी से बढ़ जाती है। यदि जरूरी लगे तो आप लैक्टिक एसिड या सैलिसिलिक एसिड जैसे हल्के रासायनिक एक्सफोलिएंट्स वाले उत्पादों का इस्तेमाल कर सकते हैं, लेकिन संवेदनशील त्वचा वालों को इस मामले में अत्यधिक सावधानी बरतने की जरूरत होती है।
विटामिन सी और नियासिनमाइड को करें शामिल
त्वचा की रंगत को एक समान और चमकदार बनाने के लिए नियासिनमाइड या विटामिन सी युक्त स्किनकेयर उत्पादों को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाया जा सकता है। हमेशा इनकी कम मात्रा या हल्की सांद्रता से ही अपनी शुरुआत करें। इस बात का विशेष ध्यान रखें कि एक ही समय पर बहुत सारे अलग-अलग सक्रिय तत्वों का एक साथ उपयोग न करें, वरना त्वचा पर विपरीत असर पड़ सकता है।
भीतर से सेहतमंद रखें अपना शरीर
केवल बाहरी तौर पर क्रीम या लोशन लगा लेना ही त्वचा की देखभाल के लिए काफी नहीं होता है। पर्याप्त मात्रा में साफ पानी पिएं और अपने रोजमर्रा के खानपान में ताजे फल, हरी सब्जियां, पर्याप्त प्रोटीन और अन्य पौष्टिक खाद्य पदार्थों को जगह दें। इसके अलावा, भरपूर नींद लेना और मानसिक तनाव को नियंत्रण में रखना भी आपकी समग्र त्वचा के स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभकारी साबित होता है।



















