तेजी से चढ़ते पारे और लू के थपेड़ों के बीच शहरी इलाकों में हरियाली बचाए रखना एक कठिन काम बनता जा रहा है। हैदराबाद में लगातार बढ़ती गर्मी के कारण जब आम पौधे झुलसने लगते हैं, तब पर्यावरणविदों और बागवानी के शौकीनों का ध्यान एक बेहद खास किस्म के पेड़ की तरफ गया है। बोतल के आकार जैसा दिखने वाला यह अनोखा पेड़ कम वर्षा वाले शुष्क इलाकों की पैदाइश है, जिसके चलते यह स्थानीय गर्म मौसम में भी पूरी तरह हरा-भरा बना रहता है और सूखने से बचा रहता है।
हैदराबाद की चिलचिलाती धूप में क्यों बढ़ रही इस पेड़ की मांग
हैदराबाद का गर्म और सूखा वातावरण इस पौधे के स्वाभाविक विकास के लिए एकदम अनुकूल वातावरण प्रदान करता है। अप्रैल और मई के महीनों में जब सूरज की तेज किरणें अधिकांश पेड़-पौधों को बेहाल कर देती हैं, तब भी यह पेड़ बिना किसी परेशानी के अपनी हरियाली बनाए रखता है। स्थानीय जलवायु के साथ इसका तालमेल इतना सहज है कि अब यह शहर के सार्वजनिक पार्कों के साथ-साथ निजी घरों के बागीचों में भी पहली पसंद बनता जा रहा है।
मोटा तना और पानी बचाने की प्राकृतिक क्षमता
इस पेड़ की सबसे बड़ी शारीरिक विशेषता इसका फूला हुआ और मोटा तना है, जो प्राकृतिक जल भंडारण की तरह काम करता है। जमीन में एक बार अच्छी तरह जड़ें जमा लेने के बाद इसे लगातार पानी देने की आवश्यकता लगभग खत्म हो जाती है। सूखे के लंबे दौर में भी यह अपने तने में संचित नमी के सहारे खुद को जीवित और तरोताजा बनाए रखता है। घटते भूजल स्तर की समस्या से जूझ रहे शहरों में इस पेड़ को लगाने से बागवानी में पानी की बहुत बड़ी बचत होती है।
रोपाई के समय मिट्टी और जलनिकासी का सही प्रबंधन
इस पेड़ को लगाते समय सबसे ज्यादा सावधानी पानी के निकास को लेकर रखनी पड़ती है। अगर इसे अत्यधिक चिकनी मिट्टी या ऐसे स्थान पर लगा दिया जाए जहां पानी जमा रहता हो, तो इसकी जड़ों और तने में फफूंद लगने या सड़न पैदा होने का भारी जोखिम रहता है। इसे लगाते समय मिट्टी में बालू, बारीक बजरी और जैविक कंपोस्ट का संतुलित मिश्रण तैयार करना चाहिए, ताकि सिंचाई या बारिश का अतिरिक्त पानी जड़ों में ठहरे बिना तुरंत बहकर बाहर निकल जाए।
धूप की जरूरत और जगह का चुनाव
यह पेड़ बंद या छायादार जगहों के बजाय पूरी तरह खुले माहौल में ही सबसे अच्छा बढ़ता है। इसके स्वस्थ विकास के लिए हर दिन कम से कम 6 से 8 घंटे की सीधी और तेज धूप मिलना अनिवार्य है। इसके अलावा, रोपाई के दौरान स्थान का चयन भी सोच-समझकर करना होता है। बड़ा होने पर इस पेड़ का तना 1.5 से 2 मीटर तक चौड़ा हो सकता है, इसलिए इसे मकान की मुख्य दीवारों, चारदीवारी और जमीन के भीतर बिछी पाइपलाइनों से पर्याप्त दूरी पर ही लगाना समझदारी है।
मानसून के जलभराव से सुरक्षा और गमले में लगाने का तरीका
यद्यपि यह पेड़ भीषण सूखे का सामना बेहद आसानी से कर लेता है, लेकिन जरूरत से ज्यादा बारिश और पानी का जमाव इसके जीवन के लिए घातक साबित हो सकता है। बरसात के मौसम में इसके तने के चारों ओर कभी भी पानी खड़ा न होने दें। इस समस्या से बचने के लिए तने के आसपास की मिट्टी को हल्का ऊंचा यानी टीले के आकार में लगाना सबसे सुरक्षित उपाय माना जाता है।
शुरुआती 5 से 8 वर्षों के दौरान यह एक साधारण सीधे पौधे की तरह बढ़ता है, जिसके बाद इसका निचला हिस्सा धीरे-धीरे चौड़ा होकर विशिष्ट बोतल का रूप ले लेता है। जिन घरों में जमीन में लगाने के लिए पर्याप्त जगह नहीं है, वे इसे किसी बड़े गमले में लगा सकते हैं या फिर बालकनी और छत की सजावट के लिए इसे बोन्साई के रूप में भी आसानी से पाल सकते हैं।



















