सौर ऊर्जा के क्षेत्र में लंबे समय से सूर्यास्त के बाद बिजली उत्पादन ठप होना एक गंभीर चुनौती माना जाता रहा है। राजस्थान के प्रसिद्ध भड़ला सोलर पार्क में अब इस प्राकृतिक बाधा को दूर करने के लिए एक अत्याधुनिक तकनीक का धरातल पर परीक्षण शुरू होने जा रहा है। राजस्थान अक्षय ऊर्जा निगम लिमिटेड ने एनटीपीसी को यहां 320 किलोवाट क्षमता वाली पायलट केंद्रित सौर ऊर्जा परियोजना स्थापित करने की औपचारिक मंजूरी प्रदान कर दी है। यह संयंत्र भारत का पहला ऐसा ऊर्जा प्रोजेक्ट बनने जा रहा है जो सिरेमिक थर्मल स्टोरेज प्रणाली पर आधारित होगा।
सिरेमिक मॉड्यूल में दिन की गर्मी कैद कर रात में चलेगी टरबाइन
इस अनूठी परियोजना की मुख्य ताकत इसका अभिनव ऊर्जा संचयन ढांचा है। दिन के समय जब तेज धूप उपलब्ध होगी, तब सौर ऊर्जा को खास तौर पर तैयार किए गए सिरेमिक मॉड्यूल के भीतर उच्च तापमान वाली ऊष्मा के रूप में सुरक्षित रखा जाएगा। जैसे ही अंधेरा छाएगा और सौर किरणें बंद होंगी, यह जमा की गई गर्मी एयर टरबाइन को चलाने के काम आएगी। इस ऊष्मा ऊर्जा से एयर टरबाइन घूमेगी और रात के सन्नाटे में भी निर्बाध बिजली का उत्पादन संभव हो सकेगा।
रासायनिक बैटरियों की भारी लागत से मुक्ति की राह
पारंपरिक तौर पर सौर संयंत्रों में रात के समय विद्युत आपूर्ति बनाए रखने के लिए महंगी और भारी रासायनिक बैटरियों का सहारा लेना पड़ता है, जो पर्यावरण और रखरखाव दोनों नजरियों से जटिल होती हैं। इस नई व्यवस्था का बुनियादी मकसद उन्हीं रासायनिक बैटरियों पर निर्भरता को पूरी तरह घटाना है। इस प्रक्रिया के जरिए दिन भर संचित की गई स्वच्छ ताप ऊर्जा को बिना किसी नुकसान के सूर्यास्त के बाद भी उपयोगी बिजली में बदला जा सकेगा।
अमेरिकी तकनीक का सहारा और एनटीपीसी की तैयारियां
इस प्रायोगिक संयंत्र में अमेरिका की प्रतिष्ठित कंपनी 247सोलर द्वारा विकसित की गई अत्याधुनिक सिरेमिक थर्मल एनर्जी स्टोरेज तकनीक को आजमाया जाएगा। एनटीपीसी इस विदेशी तकनीक को भड़ला की परिस्थितियों में लागू करने और उसका फील्ड परीक्षण करने के लिए राजस्थान अक्षय ऊर्जा निगम लिमिटेड के साथ संयुक्त रूप से जुटी हुई है। प्रशासनिक मंजूरी हासिल होने के साथ ही अब जमीन पर प्राथमिक व्यवहार्यता अध्ययन, कार्यस्थल का विस्तृत सर्वेक्षण और ढांचागत परीक्षण का काम तेजी से आगे बढ़ेगा। इस 320 किलोवाट पायलट यूनिट से तैयार होने वाली बिजली का उपयोग एनटीपीसी अपने स्थानीय संयंत्र की घरेलू और सहायक जरूरतों को संचालित करने में करेगी।
देश के स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों को मिलेगी नई उड़ान
यदि भड़ला में यह पायलट प्रयोग उम्मीद के मुताबिक परिणाम देता है, तो इसे पूरे भारत में विशाल पैमाने पर तैनात करने का रास्ता खुल जाएगा। यह पहल राजस्थान को केवल सौर ऊर्जा उत्पादक ही नहीं, बल्कि आधुनिक ऊर्जा अनुसंधान और तकनीक के प्रमुख केंद्र के रूप में भी स्थापित करेगी। इसके अलावा, रात में भी नवीकरणीय ऊर्जा की निरंतर उपलब्धता से भारत के समग्र स्वच्छ ऊर्जा मिशन, ऊर्जा सुरक्षा और दीर्घकालिक नेट-जीरो उत्सर्जन लक्ष्यों को हासिल करने में खासी तेजी आएगी।


















