छपरा जिले के गरखा प्रखंड स्थित बसंत बाजार में एक ऐसी मिठाई की दुकान है जो अपने अनोखे स्वाद के लिए न केवल स्थानीय स्तर पर, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचानी जाती है। यहां कोयले की धीमी आंच पर तैयार किया गया खोवा और उससे बनी कलाकंद लोगों की पहली पसंद बनी हुई है। इस दुकान की बागडोर वर्तमान में बबलू प्रसाद और उनके पुत्र के हाथों में है, जो इसे अपनी दूसरी पीढ़ी के रूप में बड़ी कुशलता से आगे बढ़ा रहे हैं।
पांच दशकों का अटूट स्वाद
इस मिठाई की दुकान का इतिहास करीब 50 वर्ष से भी अधिक पुराना है। इसकी नींव बबलू प्रसाद के पिता शंभू प्रसाद ने रखी थी। स्थानीय निवासियों का कहना है कि इतने लंबे समय के बावजूद इस मिठाई का जायका आज भी वैसा ही है जैसा दशकों पहले हुआ करता था। यही कारण है कि आज भी पुराने ग्राहक पूरी निष्ठा के साथ यहां खिंचे चले आते हैं। जयप्रकाश सिंह जैसे स्थानीय ग्राहकों के अनुसार, वे बचपन में अपने पिता के साथ यहां कलाकंद खाने आते थे और आज भी वही स्वाद उन्हें इस दुकान की ओर ले आता है।
शुद्धता की खास पहचान
शंभू मिष्ठान भंडार के नाम से मशहूर यह प्रतिष्ठान अपनी शुद्धता के लिए विख्यात है। बबलू प्रसाद के अनुसार, वे आसपास के ग्रामीण इलाकों से ताजा और शुद्ध दूध मंगवाते हैं, जिसे पारंपरिक तरीके से कोयले की आग पर गर्म करके खोवा तैयार किया जाता है। स्वाद को और बेहतर बनाने के लिए इसमें काजू, किशमिश और इलायची जैसे मेवों का उपयोग किया जाता है। दुकानदारों का दावा है कि आधुनिक दौर की बड़ी दुकानों के मुकाबले भी उनकी मिठाई अपनी शुद्धता और स्वाद के कारण अलग पहचान रखती है।
दुबई तक पहुंचा स्वाद
इस मिठाई की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यहां के कलाकंद की मांग जिले की सीमाओं से बाहर निकलकर विदेशों तक पहुंच गई है। बबलू प्रसाद ने बताया कि हाल ही में एक ग्राहक यहां से तीन किलो कलाकंद खरीदकर दुबई ले गया है। दुकान पर स्वच्छता का विशेष ध्यान रखा जाता है, जो ग्राहकों के भरोसे को और मजबूत बनाता है। छोटी दुकान होने के बावजूद, यहां आने वाले लोगों की संख्या और उनके द्वारा मिठाई के प्रति दिखाए गए विश्वास ने इसे छपरा जिले का एक प्रमुख केंद्र बना दिया है।











