सर्दियों के महीनों में घर की छत या बालकनी को महकते फूलों से सजाने की योजना बना रहे लोगों के लिए शरद ऋतु का आगमन सबसे उपयुक्त अवसर लेकर आता है। मौसम में हल्की ठंडक घुलते ही स्थानीय पौधशालाओं में कई आकर्षक रंगों के फूल नजर आने लगते हैं, जिनमें पीले, सफेद, गुलाबी, गहरे लाल, नारंगी और मैजेंटा शेड्स प्रमुख हैं। गाजीपुर स्थित ग्रीन गार्डन नर्सरी के संचालक आजाद अली के अनुसार, मौजूदा समय में पंद्रह से बीस अलग-अलग किस्में उपलब्ध हैं, जबकि बागवानी के शौकीनों की मांग पूरी करने के लिए कोलकाता से पौधों की अतिरिक्त खेप मंगाने की तैयारी चल रही है। सही समय पर रोपाई और बुनियादी देखभाल का ध्यान रखा जाए, तो ठंड के पूरे मौसम में गमलों में भरपूर कलियां खिलती हैं।
रोपाई और छंटाई के लिए शुरुआती पखवाड़ा सबसे अनुकूल
गुलाब के नए कलम लगाने अथवा पहले से मौजूद गमलों की कांट-छांट करने के लिए 1 से 15 अक्टूबर की अवधि सबसे मुफीद मानी जाती है। गाजीपुर के मौसमी मिजाज के तहत ठंड के दिनों में खिलने वाले फूल आकार में काफी बड़े, घने और चटख रंगत वाले होते हैं। ग्रीष्म ऋतु के दौरान भी पौधे फूल देते हैं, लेकिन तीखी धूप और अत्यधिक तापमान के कारण पंखुड़ियां छोटी रह जाती हैं और वे तेजी से झुलस जाती हैं। यही वजह है कि यदि आप आने वाले हफ्तों में अपने बगीचे को गुलजार देखना चाहते हैं, तो महीने के शुरुआती पंद्रह दिनों के भीतर प्रूनिंग और नई रोपाई का कार्य संपन्न कर लेना चाहिए।
पौध खरीदते वक्त फूल की जगह तने और पत्तियों पर दें ध्यान
नर्सरी का रुख करते समय अधिकांश खरीदार केवल टहनी पर खिले आकर्षक फूल को देखकर पौधा चुन लेते हैं, जो बागवानी के लिहाज से सही निर्णय नहीं है। आजाद अली का कहना है कि टहनी पर लगा फूल तो महज चंद दिनों में झड़ जाएगा, इसलिए चयन करते वक्त पौधे की समग्र सेहत को परखना ज्यादा जरूरी होता है। हमेशा ऐसे पौधे को प्राथमिकता दें जिसकी पत्तियां चमकदार हरी हों और मुख्य तना स्वस्थ व सुगठित दिखाई दे। पीली पड़ चुकी पत्तियों, कमजोर डालियों अथवा रोगग्रस्त शाखाओं वाले पौधों से बचना चाहिए, क्योंकि मजबूत जड़ और अच्छी बढ़वार वाला पौधा ही आगे चलकर गमले में अनगिनत कलियों को जन्म देता है।
देसी बनाम हाइब्रिड किस्में: बजट और देखरेख के हिसाब से चयन
बागवानी प्रेमियों की पसंद के आधार पर बाजार में दो तरह के विकल्प मुख्य रूप से उपलब्ध रहते हैं। कम फुर्सत पाने वाले लोग देसी किस्मों को तरजीह देते हैं, जबकि नियमित रूप से वक्त बिताने वाले शौकीन अंग्रेजी यानी हाइब्रिड किस्मों का रुख करते हैं। हाइब्रिड गुलाबों को नियमित अंतराल पर टहनियों की सफाई और छंटाई जैसी अतिरिक्त देखभाल की दरकार होती है, जबकि देसी किस्में सामान्य देखरेख में भी आसानी से फलती-फूलती रहती हैं। मूल्य की दृष्टि से देसी पौधे 20 से 40 रुपये की किफायती श्रेणी में मिल जाते हैं, जबकि हाइब्रिड वैरायटी 80, 120 और 140 रुपये के अलग-अलग स्लैब में बिक रही हैं। इसके अलावा बड़े गमलों में तैयार खास नारंगी किस्मों के दाम 220 रुपये तक पहुंच जाते हैं।
धूप, सिंचाई और खली की सही खुराक से लदेंगे फूल
गमले को ऐसे स्थान पर स्थापित करें जहां दिनभर में कम से कम 5 से 6 घंटे की सीधी धूप निरंतर मिलती रहे, क्योंकि धूप की कमी से कलियों का विकास धीमा पड़ जाता है। गमले की पेंदी में जल निकासी के छिद्र का खुला होना अनिवार्य है, अन्यथा ठहरा हुआ पानी जड़ों को सड़ाने लगता है। पोषण प्रबंधन के तहत हर 15 दिन में नीम की खली या सरसों की खली जैसी जैविक खाद मिट्टी में मिलाना लाभकारी रहता है। खाद का प्रयोग करते समय यह सावधानी बरतें कि उसे सीधे मुख्य तने पर डालने के बजाय ऊपरी मिट्टी की परत में हल्का गुड़ाई करके मिलाएं और तुरंत पानी दें। 6-8 इंच के छोटे बर्तनों में 25-30 ग्राम तथा 10-12 इंच वाले बड़े पात्रों में 50 ग्राम जैविक खाद का अनुपात पौधों के समुचित विकास के लिए पर्याप्त माना जाता है।



















