भारतीय खानपान की थाली दही के बिना अधूरी मानी जाती है। भोजन का स्वाद बढ़ाने के अतिरिक्त इसका उपयोग छाछ, लस्सी और अलग-अलग तरह के रायते तैयार करने में नियमित रूप से किया जाता है। मौसम में गर्माहट आते ही कई घरों में यह परेशानी आम हो जाती है कि रात के समय जमाया गया दही अगली सुबह तक जरूरत से ज्यादा खट्टा हो जाता है। इसका मुख्य कारण वातावरण का अधिक तापमान होता है, जो दही जमाने में सहायक लाभदायक बैक्टीरिया की सक्रियता को कई गुना बढ़ा देता है। ये सूक्ष्म जीवाणु दूध के अंदर मौजूद लैक्टोज को बहुत तेजी से लैक्टिक एसिड में परिवर्तित करने लगते हैं, जिससे दही का स्वाद कसैला या अत्यधिक खट्टा हो जाता है।
दूध से दही बनने की इस रासायनिक प्रक्रिया को नियंत्रित करना असंभव नहीं है। यदि समय रहते तापमान और जामन की मात्रा पर ध्यान दिया जाए, तो दही के स्वाद को बिगड़ने से आसानी से बचाया जा सकता है। सही स्टोरेज तकनीक अपनाकर दही की ताजगी को कई दिनों तक बरकरार रखना संभव है। आइए समझते हैं कि किन सावधानियों से दही को खट्टा होने से रोका जा सकता है और रेफ्रिजरेटर में यह कितने समय तक खाने योग्य रहता है।
दही जमते ही बिना देरी किए फ्रिज में रखें
मौसम के तापमान का सीधा प्रभाव दूध के जमने की अवधि पर पड़ता है। कड़ाके की सर्दियों में जहां दूध को जमने में 8-10 घंटे का समय लग जाता है, वहीं गर्मियों के दिनों में यही काम कुछ ही घंटों में पूरा हो जाता है। ऐसे में दही जमाने वाले बर्तन पर नजर बनाए रखना बहुत जरूरी हो जाता है। जैसे ही बर्तन में दही अच्छी तरह सेट हो जाए, उसे तुरंत कमरे से हटाकर फ्रिज में रख देना चाहिए। जमे हुए दही को सामान्य कमरे के तापमान पर ज्यादा देर तक छोड़ना ही उसमें तेजी से खट्टापन बढ़ने का सबसे बड़ा कारण बनता है।
जामन की मात्रा संतुलित रखें
दही जमाने के लिए दूध में मिलाए जाने वाले जामन या स्टार्टर कल्चर का अनुपात स्वाद तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। गर्मी के मौसम में अधिक मात्रा में जामन डालना दही को समय से पहले खट्टा कर देता है। सुरक्षित शुरुआत के लिए 500 मिलीलीटर दूध में लगभग आधा छोटा चम्मच जामन मिलाना पर्याप्त माना जाता है। दूध की गर्माहट और जामन की गुणवत्ता व खटास के आधार पर इस मात्रा में मामूली फेरबदल किया जा सकता है। संतुलित जामन से दही मीठा और गाढ़ा तैयार होता है।
बर्तन रखने के लिए ठंडी और सुरक्षित जगह का चुनाव
दही जमाने के बर्तन को रसोई में कहां रखा जा रहा है, इसका विशेष ध्यान रखना चाहिए। इसे हमेशा रसोई के किसी अपेक्षाकृत ठंडे हिस्से में स्थापित करें। गैस के चूल्हे के समीप, सीधी धूप आने वाली खिड़की या किसी अन्य गर्म उपकरण के पास बर्तन रखने की गलती बिल्कुल न करें। यदि पूरे घर का तापमान बहुत ज्यादा है, तो बर्तन को ढककर किसी अच्छे कैसरोल या इंसुलेटेड डिब्बे के भीतर रखा जा सकता है। यह तकनीक बाहरी गर्मी के झटकों से बचाकर जमने की गति को नियंत्रित रखती है।
एयरटाइट डिब्बे में सुरक्षित भंडारण
दही के पूरी तरह तैयार होने के बाद उसे किसी साफ-सुथरे और एयरटाइट ढक्कन वाले कंटेनर में भरकर ही फ्रिज में रखना चाहिए। स्टोरेज के लिए फ्रिज की ऐसी रैक का चयन करें जहां ठंडक एक समान और स्थिर बनी रहती हो। दही के बर्तन को बार-बार बाहर निकालने और लंबे समय तक बाहर खुला छोड़ने की आदत से बचना चाहिए। फ्रिज के भीतर मौजूद कम तापमान बैक्टीरिया की जैविक गतिविधियों को सुस्त कर देता है, जिससे लैक्टिक एसिड का निर्माण धीमा पड़ जाता है और स्वाद लंबे समय तक नहीं बदलता।
फ्रिज में कितने दिनों तक सुरक्षित रहता है दही
घर में तैयार किया गया पारंपरिक दही आमतौर पर फ्रिज में 3-5 दिन तक अपनी बेहतरीन गुणवत्ता और स्वाद बनाए रख सकता है। इसके विपरीत बाजार से खरीदे जाने वाले पैकेट बंद दही की शेल्फ लाइफ उसकी पैकेजिंग के तरीके, निर्माण प्रक्रिया और उस पर अंकित एक्सपायरी डेट पर निर्भर करती है। अलग-अलग ब्रांड के सीलबंद पैकेट की मियाद भिन्न हो सकती है। पैकेट की सील खुल जाने के बाद उसे भी अनिवार्य रूप से फ्रिज में सुरक्षित रखना चाहिए और उसके पैकेट पर लिखे दिशा-निर्देशों का पालन करना चाहिए।



















