किचन में काम करते समय दूध या चाय उबलने से पैन और भगोने का जल जाना एक आम परेशानी है। बर्तन की तली में जम जाने वाली यह काली और ज़िद्दी परत आसानी से नहीं छूटती है, जिसके कारण घंटों मेहनत करने के बाद भी बर्तन की चमक वापस नहीं आती। पूजा के बाद घरों में अक्सर बेकार पड़े रहने वाले पुराने मिट्टी के दीयों का इस्तेमाल करके इस समस्या से आसानी से निपटा जा सकता है।
दीयों से क्लीनर बनाने की सामग्री
पूनम देवनानी की बताई गई इस देसी ट्रिक के लिए आपको कुछ बेहद सामान्य चीज़ों की जरूरत होगी जो घर में ही मिल जाती हैं। इस मिश्रण को तैयार करने के लिए सबसे पहले पूजा में इस्तेमाल किया जा चुका पुराना मिट्टी का एक दीया लें, जो दिवाली के बचे हुए दीये होने पर और भी बेहतर परिणाम देता है। इसके अलावा एक चम्मच मीठा सोडा यानी बेकिंग सोडा, एक पूरा नींबू, किसी भी ब्रांड का शैंपू का एक छोटा सैशे और पेस्ट तैयार करने के लिए जरूरत के अनुसार थोड़ा-सा पानी चाहिए होता है।
पेस्ट तैयार करने और लगाने की विधि
इस चमत्कारी क्लीनर को बनाने की प्रक्रिया बहुत सरल है। सबसे पहले एक पुराने मिट्टी के दीये को किसी भारी वस्तु जैसे मूसल या सिलबट्टे के बट्टे की मदद से अच्छी तरह कूटकर एकदम बारीक पाउडर बना लें। इस तैयार किए गए मिट्टी के चूरे में एक चम्मच बेकिंग सोडा, एक पूरा नींबू का रस और शैंपू का पूरा सैशे मिला दें। अब इसमें थोड़ा-सा पानी डालकर चम्मच से अच्छी तरह मिलाएं ताकि एक गाढ़ा और चिकना पेस्ट बनकर तैयार हो जाए।
सफाई का आसान तरीका
इस तैयार किए गए मैजिकल पेस्ट को चम्मच या हाथों की मदद से जले हुए बर्तन या पैन के काले और गंदे हिस्सों पर अच्छी तरह फैलाकर लगा दें। अगर बर्तन पर कालिख हल्की है तो यह मिश्रण तुरंत असर दिखाना शुरू कर देता है, लेकिन यदि पैन बहुत ज्यादा काला और बुरी तरह जला हुआ है तो पेस्ट को लगाकर दस मिनट के लिए छोड़ देना चाहिए। इसके बाद एक नॉर्मल स्क्रबर या हल्के स्पॉन्ज की मदद से जले हुए हिस्से को हल्के हाथों से रगड़ें। आप देखेंगे कि बर्तनों पर जमी काली परत पपड़ी बनकर तुरंत उतरने लगेगी और बर्तन एकदम नए जैसे चमक उठेंगे।
इस देसी जुगाड़ के अन्य फायदे
यह पूरी तरह से इको-फ्रेंडली, रसायन-मुक्त और बेहद किफायती तरीका है जिससे बिना किसी फालतू खर्चे के बर्तनों की खोई हुई रंगत वापस लाई जा सकती है। त्योहारों का सीजन नजदीक है और दिवाली के बाद अक्सर लोग दीयों को कूड़े में फेंक देते हैं, लेकिन इन्हें संभालकर रखने से रसोई के कई काम आसान हो सकते हैं। यह ज़ीरो वेस्ट तकनीक पर्यावरण के अनुकूल होने के साथ-साथ आपके घरेलू बजट को भी संतुलित रखती है।



















