दीवाली का पावन त्योहार जैसे-जैसे करीब आता है, वैसे-वैसे बाजारों में भगवान गणेश और माता लक्ष्मी की मूर्तियों की मांग में काफी तेजी आ जाती है। इस खास अवसर पर अगर आप भी अपने घर के मंदिर के लिए पीतल की मूर्तियां खरीदने का मन बना रहे हैं, तो खरीदारी करते समय आपको कुछ बेहद जरूरी बातों पर विशेष रूप से गौर करना चाहिए। आज के समय में बाजारों में ऐसी कई मूर्तियां बिकती हैं जो देखने में बिल्कुल पीतल जैसी ही प्रतीत होती हैं, लेकिन असल में वे किसी अन्य सस्ती धातु से बनाई जाती हैं और उन पर सिर्फ पीतल की सुनहरी पॉलिश चढ़ा दी जाती है। इस शातिर तरीके के कारण आम ग्राहक अक्सर असली और नकली मूर्ति के बीच का बारीक फर्क नहीं समझ पाते हैं और धोखा खा जाते हैं।
पीतल के जाने-माने कारोबारी नितिन खन्ना ने इस बारे में जानकारी देते हुए बताया कि पीतल मुख्य रूप से तांबे और जिंक यानी जस्ते को मिलाकर तैयार की जाने वाली एक मजबूत मिश्रधातु होती है। बाजार में कई विक्रेता अन्य हल्की धातुओं से मूर्तियां ढालने के बाद उन पर पीतल की परत चढ़ा देते हैं। ये नकली मूर्तियां पहली नजर में देखने में बिल्कुल असली पीतल की मूर्तियों जैसी ही चमकती हैं, लेकिन जब आप इन्हें उठाएंगे तो पाएंगे कि ये वजन में काफी हल्की होती हैं।
वजन और भारीपन से परखें असली पीतल
नितिन खन्ना का कहना है कि असली पीतल से बनी मूर्ति का वजन आमतौर पर काफी ज्यादा होता है। यदि मूर्ति अंदर से थोड़ी बहुत खोखली भी हो, तब भी उसका कुल वजन अन्य हल्की धातुओं से बनी मूर्तियों की तुलना में हमेशा ज्यादा ही निकलेगा। इसके विपरीत, एल्युमिनियम या जिंक जैसी सस्ती धातुओं से ढाली गई मूर्तियां हाथ में लेने पर काफी हल्की महसूस होती हैं। इसलिए बाजार से जब भी आप मूर्ति खरीदें, तो उसे अपने हाथों में उठाकर उसके वजन का अंदाजा जरूर लगाएं। हालांकि, केवल वजन के आधार पर ही किसी मूर्ति के सौ फीसदी असली होने का अंतिम दावा नहीं किया जा सकता है।
नक्काशी और फिनिशिंग पर दें पूरा ध्यान
वजन के अलावा मूर्ति की बनावट भी बहुत कुछ बयां करती है। नितिन खन्ना के मुताबिक, असली पीतल की मूर्तियों की ढलाई और उन पर की जाने वाली बारीक नक्काशी में एक अलग ही नजाकत और सफाई देखने को मिलती है। इनकी कारीगरी, बनावट और फिनिशिंग बहुत ही आकर्षक और स्पष्ट होती है। जबकि इसके मुकाबले दूसरी साधारण धातुओं से बनाई जाने वाली मूर्तियों में उतनी बारीक और स्पष्ट नक्काशी नहीं उभर पाती है। इसलिए दुकान पर मूर्ति का चुनाव करते वक्त उसकी बनावट, बारीकियों और फिनिशिंग को भी बहुत गौर से देखना चाहिए।
अपने बजट और गुणवत्ता का रखें पूरा ख्याल
बाजार में मिलने वाली असली पीतल की मूर्तियां अक्सर दूसरी अन्य धातुओं से तैयार मूर्तियों की तुलना में काफी महंगी होती हैं। यही वजह है कि हर किसी के लिए इन्हें अपने बजट में खरीद पाना मुमकिन नहीं हो पाता है। इसी मजबूरी या पसंद के चलते बहुत से लोग कम कीमत वाली दूसरी धातुओं के विकल्प चुन लेते हैं। दीवाली के खास मौके पर जब भी आप बाजार जाएं, तो केवल मूर्ति की कीमत न देखें, बल्कि उसकी धातु और गुणवत्ता के बारे में दुकानदार से पूरी जानकारी जरूर हासिल करें।
मिट्टी की मूर्तियां भी हैं एक बेहतरीन और पारंपरिक विकल्प
पीतल और धातु के अलावा दीवाली के दिनों में बाजारों में पारंपरिक मिट्टी की मूर्तियों की भी अनगिनत दुकानें सजती हैं। देश के तमाम हिस्सों में आज भी बड़ी संख्या में लोग शुभ दीवाली पूजा के लिए शुद्ध मिट्टी से बनी मूर्तियां खरीदना ही सबसे उत्तम मानते हैं। नितिन खन्ना का सुझाव है कि यदि आपका बजट सीमित है या आप पारंपरिक रूप से पूजा करना चाहते हैं, तो आप अपनी श्रद्धा, पसंद और पारिवारिक परंपरा के अनुसार सुंदर मिट्टी की मूर्तियां भी खरीद सकते हैं।



















