नवरात्रि का उल्लास शुरू होते ही डांडिया और गरबा उत्सवों की धूम चारों तरफ दिखने लगती है। वैसे तो पारंपरिक गरबा की सबसे जीवंत छटा गुजरात की गलियों और मैदानों में नजर आती है, मगर अब देश की राजधानी में भी युवाओं और परिवारों के बीच गरबा कार्यक्रमों का उत्साह बहुत तेजी से बढ़ा है। इन खास रातों में शामिल होने के लिए युवतियां और महिलाएं हफ्तों पहले से अपनी पोशाक तय करने में जुट जाती हैं। किसी की पहली पसंद ठेठ गुजराती शैली की घाघरा-चोली होती है, तो कई लोग चमचमाते शीशों के काम वाली चनिया-चोली पहनना चाहते हैं। यदि आप भी इस उत्सव के दौरान किसी प्रामाणिक और आकर्षक परिधान की तलाश में हैं, तो आईएनए के पास स्थित दिल्ली हाट का रुख कर सकती हैं। यहां पारंपरिक गुजराती कपड़ों का इतना विस्तृत संग्रह मौजूद है कि अपनी पसंदीदा डिजाइन चुनना एक सुखद अनुभव बन जाता है। इस परिसर में केवल घाघरा-चोली ही नहीं, बल्कि कई तरह के कुर्ते, ब्लाउज, चनिया-चोली और मनमोहक दुपट्टे भी बिक्री के लिए उपलब्ध कराए गए हैं।
अज्रख प्रिंट और बारीक शीशा कारीगरी का सुंदर संगम
दिल्ली हाट के भीतर सजी गुजराती परिधानों की इस दुकान पर पारंपरिक शिल्पकला के कई अनूठे नमूने देखने को मिल रहे हैं। यहां विशेष रूप से अज्रख प्रिंट से तैयार किए गए घाघरे बड़ी संख्या में रखे गए हैं। इस पूरे संग्रह की सबसे अहम बात यह है कि ये सभी वस्त्र सीधे गुजरात से मंगाए गए हैं। इन प्रामाणिक पोशाकों को दिल्ली लेकर आने वाली महिला का नाम संगीता है। गुजरात की सदियों पुरानी ब्लॉक प्रिंटिंग परंपराओं में गिना जाने वाला अज्रख प्रिंट अपनी खास ज्यामितीय आकृतियों और गहरे प्राकृतिक रंगों के लिए पहचाना जाता है। इसके साथ ही उत्सव की जगमगाहट के अनुकूल शीशों की कारीगरी वाले घाघरे भी यहां मौजूद हैं, जो रोशनी में शानदार चमक बिखेरते हैं। यहां खरीदारों के लिए विभिन्न प्रकार के कट और पैटर्न पेश किए गए हैं। सादगी भरा पारंपरिक अंदाज पसंद करने वाले लोग अपनी रुचि के अनुसार वस्त्र ले सकते हैं, जबकि कुछ नया चाहने वालों के लिए भारी कढ़ाई और शीशा वर्क के परिधान भी सजाए गए हैं।
विभिन्न बजट विकल्पों में ₹1,000 से उपलब्ध हैं घाघरे
गुजराती शैली के इन प्रामाणिक वस्त्रों की खरीदारी को लेकर अक्सर लोगों को लगता है कि इसके लिए भारी रकम चुकानी पड़ेगी, लेकिन यहां हर वर्ग के बजट का ध्यान रखा गया है। दुकान पर उपलब्ध घाघरा श्रेणियों के दाम ₹1,000 से शुरू होते हैं। इसके बाद अलग-अलग कारीगरी और कपड़ों के आधार पर ₹1,500, ₹2,000 और ₹2,200 के विकल्प भी रखे गए हैं। जो ग्राहक कुछ बेहद खास और उत्कृष्ट शिल्प की तलाश में हैं, उनके लिए विशेष काम वाली मस्रू स्कर्ट ₹3,500 की कीमत में उपलब्ध कराई गई है। इससे खरीदार अपनी व्यक्तिगत जेब और पसंद के संतुलन से मनपसंद पोशाक चुन सकते हैं। कपड़ों की गुणवत्ता, कपड़े के प्रकार और उन पर किए गए काम की जटिलता के अनुसार यह दरें तय की गई हैं।
पारंपरिक परिधानों के साथ आधुनिक कॉर्सेट और कुर्ते
इस केंद्र पर मिलने वाले विकल्प केवल ठेठ पारंपरिक घाघरा-चोली तक सीमित नहीं रखे गए हैं। आधुनिक फैशन पसंद करने वालों के लिए कॉर्सेट सेट, कुर्ते और फ्रॉक शैली की पोशाकें भी प्रदर्शित की गई हैं। इनमें सादे कपड़ों के साथ-साथ रंग-बिरंगे प्रिंट और शीशे की सजावट वाले कई पैटर्न शामिल हैं। यदि कोई गरबा उत्सव में पारंपरिक स्पर्श के साथ समकालीन फैशन का मेल पहनना चाहता है, तो ये परिधान उसके लिए सटीक साबित हो सकते हैं। इसके अलावा यहां अलग से खरीदे जा सकने वाले ब्लाउज का भी विस्तृत संग्रह है। इन ब्लाउज पर रंगीन धागों की हाथ से की गई कढ़ाई और शीशों का सलीकेदार काम दिखता है। इन ब्लाउज को किसी भी साधारण स्कर्ट अथवा अपनी पहले से मौजूद घाघरे के साथ मिलाकर एक नया रूप दिया जा सकता है।
दुपट्टों का विस्तृत संग्रह और ₹700 से शुरू होने वाली दरें
किसी भी पारंपरिक गरबा परिधान की संपूर्ण सुंदरता उसके दुपट्टे के चयन पर बहुत अधिक निर्भर करती है। सही रंग और प्रिंट का दुपट्टा पूरी वेशभूषा को एक अलग भव्यता प्रदान कर देता है। दिल्ली हाट के इस स्टॉल पर सूती, मोडल सिल्क और अज्रख छपाई वाले दुपट्टों का बड़ा भंडार रखा गया है। यहां मिलने वाले दुपट्टों की लंबाई लगभग 2.5 मीटर है, जो घेरदार पारंपरिक कपड़ों के साथ पूरी तरह फबते हैं। विक्रेता संगीता जी के अनुसार, इन दुपट्टों की कीमतें ₹700, ₹1,500 और ₹1,800 रखी गई हैं। रंगों और ज्यामितीय डिजाइनों की भरमार होने के कारण इन्हें किसी भी घाघरा-चोली अथवा कुर्ते के साथ आसानी से मिलाया जा सकता है। लंबे दुपट्टों के अतिरिक्त यहां छोटे आकार के स्टोल भी मिल रहे हैं, जिन्हें दैनिक उपयोग या उपहार देने के उद्देश्य से खरीदा जा सकता है।
परिवार और बच्चों के लिए भी परिधानों की सुविधा
दुकान की एक बड़ी खूबी यह है कि यहां केवल वयस्कों और महिलाओं के लिए ही कपड़े नहीं हैं, बल्कि नन्हे बच्चों के लिए भी आकर्षक पारंपरिक वस्त्र तैयार रखे गए हैं। यदि पूरा परिवार एक साथ डांडिया या गरबा उत्सव में जाने की तैयारी कर रहा है, तो बच्चों के लिए भी पारंपरिक राजस्थानी और गुजराती शैली की पोशाकें इसी एक स्थान से आसानी से खरीदी जा सकती हैं।



















